आईपीओ, डिजिटल अरेस्ट और फॉरेक्स घोटाले में दिल्ली साइबर पुलिस ने 3 ठग दबोचे; 1.22 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने तीन राज्यों में छापेमारी कर आईपीओ इन्वेस्टमेंट, डिजिटल अरेस्ट और फॉरेक्स ट्रेडिंग से जुड़े तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है।

तीन मामलों में पीड़ितों से कुल 1.22 करोड़ से अधिक की ठगी की गई थी। प्रतीकात्मक तस्वीर

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने तीन अलग-अलग राज्यों में छापेमारी कर तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। इनकी गिरफ्तारी से पुलिस ने आईपीओ इन्वेस्टमेंट, डिजिटल अरेस्ट और फाॅरेक्स ट्रेडिंग जैसे गंभीर साइबर अपराधों का पर्दाफाश किया है। इन मामलों में पीड़ितों से कुल 1.22 करोड़ से अधिक की ठगी की गई थी।
फर्जी स्टाॅक मार्केट और आईपीओ का जाल
डीसीपी आदित्य गौतम के मुताबिक, लक्ष्मी नगर के रहने वाले एक व्यक्ति को फर्जी स्टाॅक मार्केट और आईपीओ के जाल में फंसाकर 46.66 लाख ठग लिए गए। ठगों ने वाट्सएप ग्रुप के जरिए पीड़ित को भारी मुनाफे का लालच दिया था।
पिछले साल 30 मई को शिकायत मिलने पर पुलिस ने जांच के बाद गुजरात के सूरत से राजेश रत्नभाई हाडिया नाम के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपित, अपनी कंपनी 'राधे ऑटोमोटिव एंड डिटेलिंग' के बैंक खाते का उपयोग कमीशन के बदले ठगी की रकम को रूट करने के लिए कर रहा था। यह खाता पहले भी तीन अन्य साइबर शिकायतों से जुड़ा पाया गया है।
क्या होता है आईपीओ?
आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) में निवेश का मतलब है होता है जब कोई निजी कंपनी पहली बार जनता से पैसा जुटाने के लिए अपने शेयर बेचती है।
इसके लिए एक डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की आवश्यकता होती है। निवेशक आमतौर पर ऑनलाइन या यूपीआई के माध्यम से दो से तीन दिनों की अवधि में आवेदन करते हैं। आईपीओ में अच्छे मुनाफे की संभावना होती है, लेकिन इसमें जोखित भी रहता है।
महिला को डिजिटल अरेस्ट कर 36.19 लाख ऐंठे
दूसरे मामले में 'डिजिटल अरेस्ट' एक महिला से 36.19 लाख ऐंठ लिए गए। 14 अप्रैल को एक महिला को सीबीआई, ईडी और मुंबई क्राइम ब्रांच का फर्जी अधिकारी बनकर घंटों 'डिजिटल अरेस्ट' रखा गया। ठगों ने पीड़ित के आधार कार्ड का दुरुपयोग होने और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामलों का डर दिखाकर उनसे 36.19 लाख ऐंठ लिए।
जांच के बाद पुलिस टीम ने राजस्थान के कोटा से मुसावीर खान को गिरफ्तार कर लिया। मुसावीर एक वित्तीय सलाहकार (सीए की कंसलटेंसी) के रूप में काम कर रहा था और कमीशन के चक्कर में ठगी के पैसे मंगाने के लिए बैंक खाते उपलब्ध करा रहा था। उसके खातों से जुड़ी चार अन्य शिकायतें राष्ट्रीय अपराध रिपोर्टिंग पाेर्टल पर पाई गई है।
फाॅरेक्स ट्रेडिंग वेबसाइट पर निवेश का झांसा
तीसरे मामले में गगन विहार एक्सटेंशन के रहने वाले एक व्यक्ति को फेसबुक और वाट्सएप के जरिए फर्जी फाॅरेक्स ट्रेडिंग वेबसाइट पर निवेश करने का लालच दिया गया। विश्वास जीतने के लिए शुरू में छोटी रकम निकालने की अनुमति दी गई, लेकिन बाद में बड़ी निकासी के नाम पर 40.12 लाख ठग लिए गए।
नौ नवंबर को केस दर्ज करने के बाद पुलिस टीम ने मध्य प्रदेश के भोपाल से शुभम राठौर को गिरफ्तार कर लिया। शुभम के खाते में मात्र एक महीने (अक्टूबर-नवंबर 2025) के भीतर 1.38 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन पाया गया। उसने अपना खाता 50,000 के कमीशन पर हारुन नामक व्यक्ति को बेच दिया था। यह खाता देशभर में 15 साइबर शिकायतों में शामिल पाया गया।
सिंडिकेट के हर सदस्य की तलाश तेज
इन गिरोहों के अन्य सदस्यों और मास्टरमाइंड्स की तलाश जारी है। पुलिस टीमें अब इन सिंडिकेट्स के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं ताकि ठगी गई बाकी रकम बरामद की जा सके।
पुलिस की अपील
किसी भी अनजान वाट्सएप ग्रुप के निवेश सुझावों पर भरोसा न करें। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो काॅल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती है। अनजान ट्रेडिंग वेबसाइट्स पर पैसा लगाने से पहले उनकी प्रामाणिकता की जांच जरूर करें।
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