One Nation One Election पर CEC ज्ञानेश कुमार का बड़ा बयान- संविधान में अभी प्रावधान नहीं, लोगों का भरोसा है बरकरार
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान में 'एक देश, एक चुनाव' का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने भारत की चुनावी व्यवस्था को ...और पढ़ें

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयोग के संबंध में कई सवालों का जवाब दिया।
HighLights
CEC ज्ञानेश कुमार ने 'एक देश, एक चुनाव' पर स्थिति स्पष्ट की।
भारतीय संविधान में अभी ऐसी कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है।
चुनाव आयोग संविधान के दायरे में रहकर ही कार्य करता है।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने 'एक देश, एक चुनाव' (One Nation One Election) को लेकर स्पष्ट किया कि वर्तमान में भारतीय संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पूरी तरह संविधान के अनुसार कार्य करता है और उसके दायरे से बाहर जाकर कोई कदम नहीं उठा सकता।
ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'फिलहाल संविधानिक व्यवस्था में 'एक देश, एक चुनाव' का कोई प्रावधान नहीं है। चुनाव आयोग संविधान पर चलता है, उससे इतर नहीं।' उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदान प्रतिशत में हुई बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, मतदान प्रतिशत में आया उल्लेखनीय उछाल इस बात का प्रमाण है कि निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर मतदाताओं का पूरा भरोसा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि भारत की चुनावी व्यवस्था दुनिया की सबसे पारदर्शी और मजबूत व्यवस्थाओं में से एक है। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि दुनिया के करीब 40 देशों के प्रतिनिधि भारत आते हैं और मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतदान और मतगणना तक की पूरी चुनावी प्रक्रिया का अध्ययन करते हैं। उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताते हुए कहा कि इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी होती है। ऐसे में इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
भारत के मजबूत निर्वाचन प्रणाली और चुनाव आयोग की व्यवस्था पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इसे आप इस तथ्य से समझने की कोशिश करें कि दुनिया के कई ऐसे देश जहां मतदान अनिवार्य है, नहीं देने पर जुर्माने का प्रविधान है वहां मतदान का प्रतिशत हमारे राज्यों के मतदान के प्रतिशत से भी कम हैं। वहां लोग जुर्माना देना पसंद करते हैं बजाय वोट देने के लेकिन अपने यहां लोगों को हमपर पूरा भरोसा है।