Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    जज को बदलने की केजरीवाल की मांग के खिलाफ CJI को लिखा पत्र, कहा- न्यायिक नैतिकता और अनुशासन पर है चोट

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 09:19 PM (IST)

    आबकारी घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल की जज बदलने की मांग के खिलाफ वरिष्ठ वकीलों, कुलपतियों और पूर्व अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ...और पढ़ें

    दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल

    दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आबकारी घोटाला मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के बजाय किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित करने की पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मांग के खिलाफ वरिष्ठ वकीलों, कुलपतियों, पूर्व पुलिस अधिकारियों, शिक्षाविदों और बार के सदस्यों के एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है।

    पत्र में केजरीवाल द्वारा न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोप पर चिंता व रोष व्यक्त किया गया है। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय द्वारा मांग ठुकराए जाने के बाद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में रिट याचिका दायर की है।

    पत्र में कहा गया है कि किसी मौजूदा जज पर इस तरह के आरोप लगाने से गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं और यह एक स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी वादी को यह चुनने का हक नहीं है कि कौन सी पीठ और जज मामले को सुन सकता है। इसके अलावा बिना किसी ठोस आधार के किसी मौजूदा जज पर खुले तौर पर पक्षपात या गलत इरादों का आरोप लगाना न्यायिक नैतिकता और अनुशासन की बुनियाद पर ही चोट करता है।

    इस तरह के आचरण को बिना रोक-टोक चलने देना एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा और इससे वादियों को अदालतों के अधिकार को कमजोर करने और न्याय प्रशासन में जनता के भरोसे को खत्म करने का मौका मिलेगा। ऐसे में निवेदन है कि ऐसे कार्यों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

    खबरें और भी

    इतना ही नहीं अगर जरूरी समझा जाए तो स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों ने सीजेआई से इस मामले का संज्ञान लेने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया, ताकि न्यायपालिका की गरिमा, स्वतंत्रता और अधिकार को बनाए रखा जा सके। साथ ही ऐसी प्रथाओं को जड़ जमाने से रोका जा सके।

    पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में प्रमुख रूप से नालंदा विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति सुनैना सिंह, गुजरात विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति नीरज गुप्ता, सोनीपत स्थित डाॅ. बीआर अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति विनय कपूर, झारखंड की पूर्व डीजीपी आइपीएस निर्मल कौर, दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद, वरिष्ठ अधिवक्ता कीर्ति उप्पल, दिल्ली हाई कोर्ट बार ऐसोसिएशन पूर्व सचिव अशेाक कुमार कश्यप, अधिवक्ता डाॅ. मोनिका अरोड़ा सहित अन्य शामिल हैं।

    यह भी पढ़ें- दक्षिण दिल्ली को जाम से मिलेगी मुक्ति, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का 8 किमी सेक्शन तैयार; गडकरी निरीक्षण करेंगे

    यह भी पढ़ें- दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहन सब्सिडी का इंतजार खत्म, लंबित रकम मिलने की प्रक्रिया शुरू

    यह भी पढ़ें- दिल्ली के पालम अग्निकांड ने पुराना जख्म किया ताजा, 10 साल पहले रसोई गैस धमाके में गई थी सास-बहू की जान