DCP संदीप लांबा को राहत, थप्पड़ विवाद में ट्रांसफर की मांग दिल्ली HC ने ठुकराई; याची को भी दी सख्त हिदायत
दिल्ली हाई कोर्ट ने डीसीपी संदीप लांबा के तबादले की मांग वाली याचिका खारिज कर दी, जिन्हें प्रदर्शन के दौरान एक महिला को थप्पड़ मारने के आरोप में स्थान ...और पढ़ें

संदीप लांबा का जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला को थप्पड़ मारते हुए वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो ग्रैब
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने डीसीपी संदीप लांबा को राहत दी।
थप्पड़ विवाद में तबादले की मांग वाली याचिका खारिज हुई।
याचिकाकर्ता को संस्था की बदनामी रोकने की हिदायत मिली।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को एक महिला को थप्पड़ मारने वाले एडिशनल डीपीसी संदीप लांबा से जुड़े एक मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि विरोध करने के अधिकार का मतलब संप्रभुता के केंद्र माने जाने वाले संसद को नुकसान पहुंचाना नहीं है। पीठ ने कहा कि नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बल के अत्यधिक प्रयाेग के लिए किसी पुलिस अधिकारी की छवि को खराब नहीं किया जा सकता।
पीठ ने उक्त टिप्पणी करते हुए एक महिला की याचिका को खारिज कर दिया। महिला ने याचिका में मांग की थी कि उसके मामले की जांच एडिशनल डीपीसी संदीप लांबा से किसी और को स्थानांतरित कर दी जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से एडिशनल डीपीसी ने एक महिला के साथ बर्ताव किया, उन्हें उनके मामले में संदीप लांबा से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।
महिला की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता एम. सुफियान सिद्दीकी ने तर्क दिया कि 2025 में उनकी मुवक्किल को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने के मामले की जांच एडिशनल डीपीसी के पास है और महिला को थप्पड़ मारने से जुड़े पुलिस अधिकारी का हालिया वीडियो देखने के बाद पूरी तरह से डगमगा गया है। ऐसे में मामले की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी को सौंपी जानी चाहिए।
हालांकि, पीठ ने कहा कि पुलिस अधिकारी को भी निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है और भले ही उन्हें किसी महिला को थप्पड़ मारते हुए देखा गया हो, लेकिन जरूरी नहीं कि वे हर मामले में पक्षपाती हों। पीठ ने कहा कि अदालत, अधिकारी का पक्ष जाने के बगैर उन्हें पूरी तरह से गलत नहीं ठहरा सकते।
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वहीं, एडिशनल डीसीपी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि याचिका में अब कुछ नहीं बचा है क्योंकि याचिकाकर्ता का बयान दर्ज करने के बाद जांच पूरी हो चुकी है और मामले को अंतिम फैसले के लिए सक्षम अधिकारी के पास भेज दिया गया है। याचिकाकर्ता जारनिगर फातिमा ने दावा किया कि उन्हें 24/25 मार्च 2025 की रात जाफराबाद पुलिस स्टेशन में गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया था और पुलिस की ज्यादतियों के उनके आरोपों की न्यायिक जांच के लिए संदीप लांबा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था।