डीडीसीए में IPL मैचों के टिकटों की बड़ी कालाबाजारी का 'खेल', 700 मरे हुए सदस्यों के नाम पर जारी पास बेचे
क्राइम ब्रांच ने आईपीएल मैचों के टिकटों की कालाबाजारी का भंडाफोड़ किया है, जिसमें डीडीसीए के 700 मृत सदस्यों के नाम पर जारी पास बेचे जा रहे थे। ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। आईपीएल मैचों की काॅम्प्लीमेंट्री पास और टिकटों की कालाबाजारी करने के मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच को हैरान करने वाली जानकारी मिली है। डीडीसीए के मरे हुए और पता बदलकर अलग जगहों पर रहने वाले करीब 700 सदस्याें को मिलने वाले काॅम्पलीमेंट्री पास, पंकज यादव नाम के शख्स के जरिये गिरोह को बेच दिए जाते थे।
700 मृतकों के नाम के अवैध टिकट
स्टेडियम के पास स्थित पेट्रोल पंप पर बतौर सुपरवाइजर रहे पंकज इन दोनोें के बीच की कड़ी था। डीडीसीए के करीब 4000 सदस्य हैं, उनमें 700 सदस्य ऐसे पाए गए जिनमें कई की मृत्यु हो चुकी है तो कुछ के पते बदल चुके हैं। इसके अलावा 84 क्रिकेट क्लबों में प्रत्येक को 10-10 पास मिलते हैं। इक्के-दुक्के क्रिकेट क्लब वाले पास लेते हैं। ऐसे में क्लबों और डायरेक्टरों को मिलने वाले पास भी बेच दिए जाते थे।
तीन-चार दिनों में जवाब देने का आश्वासन
उधर, क्राइम ब्रांच को डीडीसीए के सीईओ आरआर सिंह, उनके निजी सचिव राकेश और डीडीसीए के सचिव अशोक शर्मा की तरफ से अभी लिखित जवाब नहीं मिल पाया है। क्राइम ब्रांच ने बीते दिनों अशोक शर्मा को पास व टिकट के मसले पर कई सवाल करते हुए उनसे लिखित में जवाब देने के लिए जनरल नोटिस दिया था लेकिन उन्होंने 17 मई को हुए मैच में अपनी व्यस्तता बताते हुए तीन-चार दिनों के अंदर जवाब देने का आश्वासन दिया था।
क्राइम ब्रांच ने लिखित में मांगा जवाब
वहीं, आरआर सिंह व राकेश को शकरपुर स्थित क्राइम ब्रांच के ऑफिस बुलाकर पूछताछ की गई थी। संतोषप्रद जवाब न मिलने पर क्राइम ब्रांच ने दोनों को लिखित में जवाब देने को कहा था। उन्होंने भी तीन-चार दिनों का समय मांग लिया था, उनकी ओर से भी जवाब नहीं मिल पाया है।
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सारा डाटा कर दिया फॉर्मेट
जांच अधिकारी का कहना है कि टिकटों व पासों को ब्लैक करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों के पकड़े जाने के बाद बिचौलिया पंकज यादव ने अपने एक मोबाइल का डाटा फार्मेट कर दिया था। तीनों से पूछताछ के बाद क्राइम ब्रांच ने जब कुछ दिनों बाद बागपत के रहने वाले पंकज यादव को गिरफ्तार किया तब उसके पास से दो मोबाइल मिले थे, उनमें एक का सारा डाटा फाॅर्मेट कर देने के कारण पुलिस को उसके संपर्क सूत्रों की जानकारी नहीं मिल पाई।
डिलीट डाटा को रिकवर करने का प्रयास
पुलिस ने उसके मोबाइल का डाटा को रिट्रीव करने के लिए मोबाइल को एफएसएल लैब में भेज दिया था। एफएसएल की रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। पुलिस का मानना है कि रिट्रीव डाटा मिल जाने पर पता लग सकेगा कि पंकज से डीडीसीए के कौन-काैन पदाधिकारी जुड़े हुए थे और उनसे वाट्सएप चैट के जरिये क्या-क्या बातें होती थी।
उक्त रिपोर्ट के आधार पर पुलिस को आगे की कार्रवाई करने की दिशा मिल सकेगी। पुलिस को पंकज यादव के बैंक खातों की जांच से डीडीसीए के एक पदाधिकारी को ट्रांजक्शन होने की जानकारी भी मिली है। उसकी गहराई से जांच की जा रही है।
8 मई को सामने आया था मामला
ज्ञात रहे बीते आठ मई को क्राइम ब्रांच ने पहले मुरादनगर के रहने वाले मुकीम, जामिया नगर के रहने वाले गुफरान उर्फ साजिद और सीलमपुर के रहने वाले मोहम्मद फैसल को गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ के बाद 11 मई को पंकज को गिरफ्तार किया था।
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