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    कैंसर-डायबिटीज सहित कई बीमारियों की नकली दवा खपाने वाले रैकेट का भंडाफोड़, दिल्ली क्राइम ब्रांच ने चार को दबोचा

    Updated: Thu, 07 May 2026 10:03 PM (IST)

    दिल्ली क्राइम ब्रांच ने कैंसर, अस्थमा और डायबिटीज जैसी बीमारियों की नकली दवाएं बेचने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मुखर्जी नगर में अवैध फैक् ...और पढ़ें

    नकली दवा खपाने वाले गिरोह का भंडाफोड़। (AI Generated Image)

    नकली दवा खपाने वाले गिरोह का भंडाफोड़। (AI Generated Image)

    HighLights

    1. दिल्ली में नकली दवाओं का 6 करोड़ का रैकेट ध्वस्त।

    2. कैंसर, डायबिटीज सहित कई बीमारियों की नकली दवाएं जब्त।

    3. मुखर्जी नगर की अवैध फैक्ट्री से सरगना समेत चार गिरफ्तार।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी में नकली दवाओं का कारोबार धड़ल्ले से फलफूल रहा है। हाल ही में दिल्ली से नकली दवाएं बनाने में शामिल कई गिरोह पकड़े जा चुके हैं। इसी कड़ी में अब कैंसर, अस्थमा, एनिमल बाइट, लिवर, डायबिटीज और थायरायड की नकली और सरकारी सप्लाई के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं को रीपैकेजिंग कर देशभर में खपाने वाले गिरोह का क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ कर सरगना समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

    मुखर्जी नगर इलाके में चल रही अवैध फैक्ट्री में छापेमारी कर करीब छह करोड़ रुपये कीमत की नकली, री-लेबल की गई और सरकारी अस्पतालों के लिए निर्धारित दवाएं बरामद की हैं। बरामद दवाओं में रेबीज वैक्सीन, इंसुलिन, ह्यूमन एल्ब्यूमिन, हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन, स्नेक वेनम एंटीसीरम और अन्य दवाएं व इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी शामिल हैं।

    ट्रेन के जरिए असम भेजते थे

    वर्ष 2023 से चल रही फैक्ट्री में छोटे-छोटे पार्सल बनाकर ट्रेन व बस के जरिये नकली दवाओं को असम भेजा जाता था, वहां से बंगाल के साथ पूर्वोत्तर राज्यों में थोक विक्रेताओं को इन दवाओं की सप्लाई की जाती थी। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मुखर्जी नगर के मनोज कुमार जैन, पंचकूला, हरियाणा के राजू कुमार, प्रयागराज के विक्रम सिंह उर्फ सन्नी और वतन के रूप में हुई है। यह गिरोह करीब तीन साल से सक्रिय था।

    उपायुक्त पंकज कुमार के मुताबिक, 22 अप्रैल को क्राइम ब्रांच को नकली दवाओं के निर्माण और सरकारी सप्लाई की दवाओं के अवैध कारोबार से जुड़ी गुप्त सूचना मिली थी। जांच के दौरान पता चला कि एक संगठित गिरोह प्रयागराज के सरकारी अस्पतालों व डिस्पेंसरी के लिए निर्धारित दवाओं को अवैध तरीके से बाहर निकालकर उनके लेबल बदलता था और फिर उन्हें बाजार में ऊंचे दामों पर बेच देता था।

    खबरें और भी

    सूचना पुख्ता होने के बाद क्राइम ब्रांच ने ड्रग कंट्रोल विभाग और सीडीएससीओ अधिकारियों के साथ मुखर्जी नगर की इंद्र विकास कालोनी स्थित दूसरी मंजिल पर चल रही अवैध फैक्ट्री पर छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान वहां भारी मात्रा में दवाएं, नकली लेबल, पैकेजिंग मटेरियल, मशीनें और कच्चा माल बरामद हुआ। मौके से मनोज कुमार जैन को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि बाद में अन्य आरोपितों को भी दबोच लिया गया।

    छापेमारी के दौरान ये दवाएं हुईं बरामद

    छापेमारी के दौरान मौके से हेपबेस्ट की 7,900 गोलियां, एंटीबायोटिक दवाओं की हजारों टैबलेट, 953 रेबीज वैक्सीन, 1500 विटामिन-डी इंजेक्शन, 315 इंसुलिन कार्ट्रिज, 2500 हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन, 55 स्नेक वेनम एंटीसीरम और बड़ी मात्रा में ह्यूमन एल्ब्यूमिन बरामद की है। इसके अलावा चार पैकेजिंग और लेबलिंग मशीनें भी जब्त की गई हैं।

    कैसे चल रहा था पूरा नेटवर्क

    जांच में पता चला कि आरोपित मनोज कुमार जैन नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण, री-लेबलिंग और वितरण में शामिल पूरे रैकेट का सरगना और मुख्य संचालक था। वह अपने साथियों वतन और विक्रम के जरिए प्रयागराज के सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों के लिए निर्धारित दवाओं को हासिल करता था। इन दवाओं को मुखर्जी नगर में लाकर उनके असली लेबल और पहचान के निशान हटाकर उनकी जगह नकली लेबल लगाया जाता था। री-लेबलिंग की गतिविधियों के अलावा, आरोपित उस ठिकाने पर नकली दवाओं का भी निर्माण करते थे। शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि इस अवैध व्यापार से जुड़े वित्तीय लेन-देन के लिए आनलाइन नहीं बल्कि हवाला चैनलों के जरिये नकद रुपये लिए जाते थे।

    गिरफ्तार आरोपितों की भूमिका

    आरोपित मनोज कुमार जैन और राजू कुमार मिश्रा प्रयागराज में सरकारी अस्पतालों से हासिल दवाओं की पैकेजिंग व लेबल बदलकर उन्हें बाजार में बेचते थे। मनोज ने बताया कि उसने 2023 में मुखर्जी नगर में यह गैरकानूनी काम शुरू किया। राजू ने पंचकूला और डेराबस्सी में फर्म व यूनिट बनाकर नकली ‘ह्यूमन एल्ब्यूमिन’ तैयार करने की बात कबूली। वहीं प्रयागराज के लैब संचालक विक्रम सिंह और उसके साथी वतन सरकारी अस्पतालों से बची दवाएं जुटाकर मनोज को सप्लाई करते थे। वतन इससे पहले एनडीपीएस एक्ट के तहत मध्य प्रदेश के रीवा में बीते वर्ष गिरफ्तार भी किया गया था।

    इस वर्ष बरामदगी के मामले

    अप्रैल में क्राइम ब्रांच ने मुजफ्फरनगर में नकली दवाएं बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। इस रैकेट के तार भागीरथ पैलेस से जुड़े थे और इसमें छह लोग गिरफ्तार हुए हैं।
    फरवरी में दिल्ली पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 50 करोड़ रुपये से अधिक की नकली दवाएं बनाने वाले गिरोह को पकड़ा था, जो बिहार के गया और पटना में दो फैक्ट्रियां चला रहा था। नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया।

    कली दवा से कैसे बचें

    • हमेशा पक्के बिल के साथ दवा खरीदें
    • बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपायरी डेट की जांच करें
    • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन पोर्टल व कंपनी साइट पर बैच वेरिफाई करें
    • क्यूआर कोड (जहां उपलब्ध) स्कैन करें
    • असामान्य रूप से सस्ती दवाओं से सावधान रहें
    • पैकेजिंग, होलोग्राम वसील में गड़बड़ी दिखे तो दवा न लें

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