अब दिल्ली में भी खुलेंगे निजी विश्वविद्यालय, कैबिनेट ने विधेयक को मंजूरी दी; क्या होंगे नियम
दिल्ली कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी प्रारूप विधेयक को मंजूरी दे दी है। इससे दिल्ली उच्च शिक्षा का बड़ा केंद्र बनेगी और छात्रों को ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
दिल्ली कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालय विधेयक को मंजूरी दी।
राजधानी उच्च शिक्षा का बड़ा केंद्र बनेगी, छात्रों को लाभ।
पारंपरिक बड़े कैंपस की अनिवार्यता नहीं, गुणवत्ता पर होगा मूल्यांकन।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी में भी जल्द निजी विश्वविद्यालयों के खुलने का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा परिसर में हुई दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी प्रारूप विधेयक को मंजूरी दे दी।
अब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस कानून के लागू होने से दिल्ली उच्च शिक्षा का बड़ा केंद्र बनेगी और छात्रों को बेहतर पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों या विदेश का रुख नहीं करना पड़ेगा।
पारंपरिक बड़े कैंपस की अनिवार्यता नहीं
प्रस्तावित विधेयक के कानून बन जाने पर दिल्ली में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाई जाएगी। सरकार का कहना है कि राजधानी में सीमित भूमि उपलब्ध होने के कारण पारंपरिक बड़े कैंपस की अनिवार्यता नहीं होगी।
इसके बजाय बहुमंजिला और हाई-टेक शहरी परिसरों की अनुमति दी जाएगी। विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन भूमि के आकार के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, बुनियादी ढांचे, छात्र सुविधाओं और संस्थागत प्रशासन के आधार पर किया जाएगा।
विधेयक में छात्रों के हितों को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक पाठ्यक्रम में दिल्ली के विद्यार्थियों के लिए लागू आरक्षण नीति के अनुरूप 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। साथ ही सभी निजी विश्वविद्यालयों में पारदर्शी और भेदभावरहित प्रवेश प्रक्रिया अनिवार्य होगी।
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निजी विश्वविद्यालयों की निगरानी के लिए दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित की जाएगी। यह प्राधिकरण शिक्षण, शोध, प्रवेश, परीक्षा, छात्र अभिलेख और संस्थानों के समग्र प्रदर्शन की निगरानी करेगा तथा आवश्यक होने पर सुधारात्मक निर्देश भी जारी कर सकेगा।
किसी भी विश्वविद्यालय को मंजूरी देने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षाविदों, यूजीसी प्रतिनिधियों और वित्त विशेषज्ञों की समिति प्रस्तावों की विस्तृत जांच करेगी।
फीस में बरतनी होगी पारदर्शिता
कैबिनेट के फैसले के अनुसार निजी विश्वविद्यालय खोलने वालों को अपनी जमीन खरीदनी होगी। फीस में पारदर्शिता बरतनी होगी। सभी निजी विश्वविद्यालय स्व-वित्तपोषित होंगे और उन्हें नियमित सरकारी अनुदान नहीं मिलेगा, हालांकि वे शोध परियोजनाओं के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता योजनाओं का लाभ ले सकेंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे दिल्ली को वैश्विक शिक्षा और नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह कानून राजधानी के युवाओं को अपने ही शहर में विश्वस्तरीय उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
