CAG Report: दिल्ली में तीन गुना तक बढ़ा बिजली सब्सिडी का बोझ, निष्क्रिय कनेक्शनों को भी मिला लाभ
दिल्ली में बिजली सब्सिडी पर कैग की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसमें निष्क्रिय कनेक्शनों और सभी उपभोक्ताओं को सब्सिडी दिए जाने से खर्च में तीन गु ...और पढ़ें

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HighLights
दिल्ली में बिजली सब्सिडी खर्च 10 साल में तीन गुना बढ़ा।
कैग ने निष्क्रिय कनेक्शनों पर सब्सिडी को बताया अनुचित।
योग्य लाभार्थियों को लक्षित करने और डीबीटी की सिफारिश।
संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। वोट बैंक की राजनीति में दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की सिफारिश को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।
सिर्फ वंचित वर्ग की जगह सभी उपभोक्ताओं को इसका लाभ देने के साथ ही लंबे समय से निष्क्रिय कनेक्शन वालों को भी सब्सिडी दी जा रही है। यही कारण है कि इस मद में होने वाले खर्च में लगातार वृद्धि हो रही है।
पिछले 10 वर्षों में बिजली सब्सिडी की राशि लगभग तीन गुना तक बढ़ गई है। वर्ष 2015 में बिजली सब्सिडी पर 1442.76 रुपये खर्च किए गए थे यह वर्ष 2025-26 में बढ़कर 4,037.62 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
घरेलू उपभोक्ताओं को भुगतान करना अनुचित?
विधानसभा के पटल पर शुक्रवार को दिल्ली सरकार के कामकाज से संबंधित वर्ष 2023 का कैग रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया, जिसमें बिजली सब्सिडी नीति की कमियों को इंगित किया गया है। यह कहा गया है कि पात्र और वंचित वर्ग को लक्षित करने की जगह समस्त घरेलू उपभोक्ताओं को भुगतान करना अनुचित है।
रिपोर्ट में यह भी जानकारी है कि 50 हज़ार से अधिक उपभोक्ताओं को 12 महीने से अधिक समय तक लगातार शून्य खपत थी और उन्हें भी 17.81 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई।
90 हज़ार से अधिक उपभोक्ताओं को 6 से 11 महीने तक लगातार शून्य खपत पर 11.88 करोड़ रुपये की और 1.70 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को 3 से 5 महीने तक लगातार शून्य खपत पर 12.57 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई।
यह खराब नीतिगत ढांचे का संकेत है। लंबे समय तक निष्क्रिय या बंद पड़े कनेक्शनों पर सब्सिडी खर्च करना व्यर्थ है और इससे कोई तर्कसंगत आर्थिक उद्देश्य पूरा नहीं होता है।
कैग ने सरकार को सचेत किया था कि सभी घरेलू उपभोक्ताओं को उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर विचार किये बिना सब्सिडी प्रदान का असर सरकार के बजट पर पड़ेगा। प्रति माह 400 यूनिट खपत करने वाले उपभोक्ताओं को भी सब्सिडी देने के औचित्य पर भी प्रश्न उठाया गया है।
खबरें और भी
- वर्ष 2019-20 से वर्ष 2022-23 के दौरान कुल सब्सिडी में केवल बिजली सब्सिडी का हिस्सा 66.96 से 70.39 प्रतिशत था।
- प्रति माह 0से 200 यूनिट उपभोग श्रेणी ( 100 प्रतिशत सब्सिडी) के अंदर आने वाले 30 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को प्रति कनेक्शन प्रति वर्ष औसतन 6000 रुपये की सब्सिडी दी गई।
- प्रति माह 201 से 400 यूनिट उपभोग श्रेणी (50 प्रतिशत सब्सिडी) वाले लगभग 16.60 लाख उपभोक्ताओं को प्रति कनेक्शन प्रति वर्ष औसतन आ10,000 रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली।
कैग रिपोर्ट में की गई सिफारिश
-योग्य लाभार्थियों को बिजली सब्सिडी को लक्षित करने के लिए डिस्काम के उपभोक्ता बिलिंग डाटा की समीक्षा करें।
-संपन्न उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने की जगह सब्सिडी को तीन किलोवाट तक स्वीकृत लोड से जोड़ने के लिए डीईआरसी की वैधानिक सलाह पर विचार करें।
-सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए डीबीटी शुरू करने की व्यवहार्यता का पता लगाएं।
दिल्ली सरकार द्वारा पिछले वर्षों में बिजली सब्सिडी पर खर्च की गई राशि
| वर्ष | सब्सिडी राशि (करोड़ रुपये) |
|---|---|
| 2015-16 | 1,442.76 |
| 2016-17 | 1,577.94 |
| 2017-18 | 1,676.70 |
| 2018-19 | 1,699.29 |
| 2019-20 | 2,405.59 |
| 2020-21 | 2,939.99 |
| 2021-22 | 3,250.00 |
| 2022-23 | 3,161.22 |
| 2023-24 | 2,426.65 |
| 2024-25 | 3,600.50 |
| 2025-26 | 4,200.00 |
| 2026-27 | 3,500.00 (बजट आवंटन) |
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