Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    अभिव्यक्ति की आजादी पर दिल्ली HC ने कहा- डीयू में प्रदर्शन पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं, छात्रों को भी दी नसीहत

    Updated: Thu, 12 Mar 2026 08:11 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेश पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनो ...और पढ़ें

    विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में की गई सुनवाई।

    विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में की गई सुनवाई।

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने संबंधी दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और दिल्ली पुलिस के आदेश पर सवाल उठाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की कि प्रदर्शन और रैली पर पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं लगाया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि अगर कानून-व्यवस्था का कोई उल्लंघन होता है, तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन पूरी तरह प्रतिबंध लगाना सही नहीं हो सकता।

    अगली सुनवाई 25 मार्च को 

    उक्त टिप्पणी करने के बावजूद भी अदालत ने डीयू व पुलिस द्वारा जारी आदेश पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश पारित करने से इन्कार कर दिया। पीठ ने डीयू व पुलिस को एक सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल करने निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि हलफनामा देखने के बाद मामले पर निर्णय लिया जाएगा। मामले पर अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।

    सीआरपीसी की धारा-144 का उल्लंघन

    जारी किए गए आदेश को पढ़ते हुए पीठ ने कहा कि इसमें सार्वजनिक बैठक, रैली, जुलूस, प्रदर्शन, विरोध, धरना या किसी भी तरह का आंदोलन करने पर प्रतिबंध की बात की गई है। अदालत ने सवाल किया कि क्या डीयू सख्ती दिखाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन, रैली और जुलूस को भी इसके दायरे में लेगा।

    अदालत ने कहा कि अगर किसी ने सीआरपीसी की धारा-144 का उल्लंघन किया था, तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए थी। अदालत ने डीयू को जवाब दाखिल कर यह बताने को कहा कि ऐसा आदेश जारी करने की क्या जरूरत थी?

    खबरें और भी

    शांतिपूर्ण जमावड़े पर रोक लगाई

    अदालत ने यह टिप्पणी डीयू के विधि संकाय के छात्र उदय भदौरिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में प्राॅक्टर कार्यालय के 17 फरवरी को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है। इसमें कैंपस और उससे जुड़े कालेजों में सार्वजनिक बैठक, जुलूस, प्रदर्शन और पांच या उससे ज्यादा लोगों के शांतिपूर्ण जमावड़े पर रोक लगाई गई है।

    यह फैसला यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा जारी ताजा दिशानिर्देशों के खिलाफ छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बाद लिया गया था। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने भी विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ रोक के आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि विरोध-प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक संविधान के अनुच्छेद- 14 और 19 का उल्लंघन करती है।

    छात्रों के व्यवहार पर भी अदालत ने उठाया सवाल

    सुनवाई के दौरान अदालत ने छात्रों के व्यवहार पर भी सवाल उठाया और इस बात पर जोर दिया कि इस मामले पर सिर्फ इसलिए विचार कर रहा है क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद-19 (अभिव्यक्ति की आजादी) के अधिकारों से जुड़ा है। पीठ ने कहा कि हालांकि, अभिव्यक्ति की आजादी का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

    छात्रों को सही तरीके से पेश आना चाहिए और हालात ऐसे क्यों आए कि डीयू के प्राक्टर को ऐसा आदेश जारी करना पड़ा। अदालत ने कहा कि कोई भी एकेडमिक ऐसा आदेश नहीं देना चाहता। चुनाव के दौरान छात्रों के व्यवहार का जिक्र करते हुए कहा कि छात्र आखिर किस तरह का व्यवहार कर रहे हैं।

    यह भी पढ़ें- सुबह 6 बजे से लाइन, घंटों इंतजार... दिल्ली में पिंक कार्ड के चक्कर में महिलाओं का हाल बेहाल

    यह भी पढ़ें- पुलिस स्टेशनों में CCTV न होने पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

    यह भी पढ़ें- दिल्ली के नरेला में पुलिस मुठभेड़, गोगी गैंग का शूटर अक्षय गिरफ्तार

    यह भी पढ़ें- IIT दिल्ली में विदेशी नागरिकों के लिए पीएचडी-पीजी प्रवेश आवेदन शुरू, 30 मार्च तक करें आवेदन