एड्स-टीबी पीड़ित आरोपी को मानवीय आधार पर जमानत, दिल्ली हाई कोर्ट बोला- गरिमा से जीने का है अधिकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने एनडीपीएस मामले में एचआईवी-एड्स और टीबी से पीड़ित आरोपी को मानवीय आधार पर नियमित जमानत दी है।

अदालत ने कहा कि गरिमा के साथ जीवन जीने, ताजी हवा में सांस लेने और उचित इलाज पाने का अधिकार है।
HighLights
एचआईवी-एड्स पीड़ित आरोपी को मिली जमानत।
मानवीय आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला।
गरिमा से जीने और इलाज का अधिकार।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में गिरफ्तार एचआईवी-एड्स से पीड़ित आरोपित को मानवीय आधार पर नियमित जमानत दे दी। अदालत ने टिप्पणी की कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे आरोपित को भी गरिमा के साथ जीवन जीने, ताजी हवा में सांस लेने और उचित इलाज पाने का अधिकार है।
एड्स जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा
हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही आरोपित एक गंभीर अपराध के मामले में आरोपित है, लेकिन अदालत इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकती कि वह भी एक इंसान है और एड्स जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा मरीज है।
न्यायमूर्ति सौरभ बैनर्जी ने कहा कि आरोपित लंबे समय से एड्स समेत कई गंभीर और पुरानी बीमारियों से पीड़ित है। उसे लगातार निगरानी, परीक्षण और दवाओं की आवश्यकता है, जो जेल के माहौल में संभव नहीं दिखती।
आरोपी को नियमित जमानत दे दी
अदालत ने कहा कि जेल प्रशासन पर पहले से अधिक बोझ होने के कारण आरोपित को लगातार जरूरी चिकित्सकीय देखभाल मिल पाना मुश्किल है। मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपित को उच्च स्तर की चिकित्सा और देखभाल की आवश्यकता है, जो जेल में उपलब्ध कराना कठिन है। इसी आधार पर अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आरोपी को नियमित जमानत दे दी।
21 किलो गांजा बरामदगी का मामला
मामला वर्ष 2025 में दर्ज एनडीपीएस केस से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार 21 किलो गांजा बरामदगी मामले में दो युवक आरोपित की स्कूटी पर सवार थे। इसी मामले में आरोपित को गिरफ्तार किया गया था।
लगातार चिकित्सकीय निगरानी जरूरी
आरोपित की ओर से पेश अधिवक्ता निशांत नैन ने मेडिकल आधार पर नियमित जमानत की मांग की। उन्होंने ट्रायल कोर्ट में अभियोजन द्वारा 15 दिसंबर 2025 को दाखिल मेडिकल स्टेटस रिपोर्ट और 25 मार्च 2026 की ताजा मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आरोपित एड्स और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित है व उसे लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता है।
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