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    निर्दोष को दुष्कर्म मामले में फंसाने वाले वकील-SI की सजा बरकरार, दिल्ली HC ने कहा- और कठोर दंड मिलना चाहिए

    Updated: Sun, 05 Apr 2026 10:30 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने ढाई दशक पुराने झूठे दुष्कर्म मामले में एक निर्दोष व्यक्ति को फंसाने के आरोप में वकील हाजी अल्ताफ और एसआई नरेंद्र सिंह की दोषसिद्धि ...और पढ़ें

    दिल्ली HC ने वकील-SI की सजा बरकरार। फाइल फोटो

    दिल्ली HC ने वकील-SI की सजा बरकरार। फाइल फोटो

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने वकील-एसआई की दोषसिद्धि बरकरार रखी।

    2. झूठे दुष्कर्म मामले में निर्दोष को फंसाया था।

    3. पीड़ित के परिवार को 3 लाख मुआवजा मिलेगा।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ढाई दशक पुराने दुष्कर्म के एक झूठे मामले में एक व्यक्ति को फंसाने के लिए सुबूत गढ़ने के आरोप में अधिवक्ता हाजी अल्ताफ और एसआइ नरेंद्र सिंह को दोषी ठहराए जाने के फैसले को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है।

    ट्रायल कोर्ट के निर्णय को चुनौती देने वाली हाजी मोहम्मद अल्ताफ व नरेंद्र की याचिका को शनिवार को खारिज कर न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा की पीठ ने कहा, अल्ताफ व नरेंद्र द्वारा पेशेवर कर्तव्यों की पूर्ण अवहेलना उचित नहीं थी और उन्हें और अधिक कठोर सजा दी जानी चाहिए थी, ताकि उच्च पदों पर बैठे लोगों को कड़ा संदेश दिया जा सके।

    हालांकि, पीठ ने गौर किया कि पुलिस ने 2016 में दोषियों को दी गई अपर्याप्त चार साल की सजा के खिलाफ अपील नहीं की थी।

    दो लाख से तीन लाख तक बढ़ाया मुआवजा

    कोर्ट ने पीड़ित सुशील गुलाटी के कानूनी प्रतिनिधियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए मुआवजे को दो लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर दिया है। गुलाटी का 2014 में मुकदमे की सुनवाई के दौरान निधन हो गया था।

    पीठ ने कहा, एक वकील अदालत का अधिकारी होता है और उसका कर्तव्य मुवक्किल का बचाव करना और कोर्ट की सहायता करना है, न कि निर्दोष व्यक्तियों को अपराधों में फंसाने जैसे कृत्यों में लिप्त होना।

    इसी प्रकार एक पुलिस अधिकारी का कर्तव्य अपराधों को रोकना है, लेकिन कर्तव्य की पूर्ण अवहेलना करते हुए ऐसे कृत्यों में लिप्त हुआ है, जो किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं हैं।

    अल्ताफ और नरेंद्र सिंह द्वारा अपनी दोषसिद्धि व सजा के विरुद्ध अपील दायर की गई थी, जबकि गुलाटी के परिवार ने भी सजा व मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए याचिका दायर की थी। वर्ष 2000 में गुलाटी ने चौकी प्रभारी चंद्रमोहन दत्ता के यौन उत्पीड़न से एक महिला को बचाया था।

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    इस घटना के बाद दत्ता के विरुद्ध केस दर्ज किया गया था। दत्ता ने गुलाटी को झूठा फंसाने की योजना बनाई। उसने वकील व पुलिस अधिकारी की मदद से इसे अंजाम दिया। उन्होंने एक महिला का बयान लिया, जिसमें उसने गुलाटी व उसके दो साथियों पर चलती कार में दुष्कर्म का आरोप लगाया।

    दुष्कर्म का केस दर्ज हुआ 

    बयान के आधार पर गुलाटी और अन्य के विरुद्ध दुष्कर्म का केस हुआ। हालांकि, मामला अपराध शाखा को सौंपे जाने के बाद शिकायतकर्ता से विस्तृत पूछताछ की गई, जिससे गुलाटी के विरुद्ध रची गई साजिश का पता चला। दत्ता, अल्ताफ, नरेंद्र सिंह व सोनू के विरुद्ध मामले में आरोपपत्र दायर किए गए।

    गुलाटी की मृत्यु 2014 में हुई, उनकी मुख्य गवाही पूरी होने के तीन साल बाद चंद्रमोहन दत्ता और सोनू की भी मुकदमे की सुनवाई पूरी होने से पहले ही मृत्यु हो गई। 2016 में अल्ताफ और नरेंद्र सिंह को ट्रायल कोर्ट ने दोषी पाया।

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