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    सेना की वर्दी में सोशल मीडिया पर शिकायत पोस्ट करना गंभीर दुराचार, दिल्ली HC ने एयरमैन की बर्खास्तगी को दी मंजूरी

    Updated: Thu, 28 May 2026 08:00 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने एक एयरमैन की बर्खास्तगी को सही ठहराया, जिसने वर्दी में रहते हुए सोशल मीडिया पर सेवा संबंधी शिकायतें उठाई थीं। ...और पढ़ें

    अदालत ने वर्दी में रहते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करने के लिए नौकरी से हटाने के निर्णय को सही ठहराया है।

    अदालत ने वर्दी में रहते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करने के लिए नौकरी से हटाने के निर्णय को सही ठहराया है।

    HighLights

    1. एयरमैन की बर्खास्तगी को दिल्ली हाई कोर्ट ने सही ठहराया।

    2. वर्दी में सोशल मीडिया पर शिकायतें उठाना गंभीर कदाचार।

    3. सार्वजनिक शिकायतें सैन्य अनुशासन और मनोबल के लिए हानिकारक।

    विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना के एक एयरमैन की बर्खास्तगी को सही ठहराते देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने इंटरनेट मीडिया पर सैन्यकर्मियों द्वारा उठाई जा रही शिकायतों पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अनिल क्षत्रपाल व न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने टिप्पणी की कि वर्दीधारी सैन्य कर्मी द्वारा सेवा से जुड़ी शिकायतों को सार्वजनिक रूप से उठाना एक गंभीर दुराचार है और यह सैन्य अनुशासन के लिए हानिकारक है। अदालत ने वर्दी में रहते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करने के लिए नौकरी से हटाने के निर्णय को सही ठहराया है।

    पीठ ने उक्त टिप्पणी करते हुए एक पूर्व कार्पोरल सचिन कुमार सोलंकी द्वारा दायर याचिका काे खारिज कर दिया।। याचिका में याची को नौकरी से हटाने के निर्णय को सही ठहराने के आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती दी गई थी। पीठ ने कहा कि एक सैन्य का सर्विस से जुड़ी शिकायतों को सार्वजनिक रूप से फैलाने के परिणाम कहीं अधिक होते हैं और इसका असर सैन्य अनुशासन, मनोबल और संस्थागत छवि पर पड़ सकता है।

    याचिकाकर्ता 2011 में भारतीय वायुसेना में एयरमैन-कम्युनिकेशन टेक्नीशियन के तौर पर भर्ती हुआ था। जनवरी 2017 में उसने फेसबुक पर एक वीडियो अपलोड कर अधिकारियों और जवानों के बीच राशन, वर्दी, भत्ते, यात्रा सुविधाओं और सामाजिक व्यवहार जैसे मामलों में असमानताओं को लेकर शिकायतें उठाई थीं। वीडियो में यह दावा किया गया था कि अधिकारियों को मुफ्त राशन, सिलाई की हुई वर्दी और बेहतर यात्रा सुविधाएं मिलती हैं, जबकि जवानों की उपेक्षा की जाती है और उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है।

    मामले में हुई कोर्ट आफ इंक्वायरी के बाद, वायुसेना ने याची को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और दिसंबर 2017 में एक आदेश पारित कर उसे अनुशासनहीनता व वायुसेना की छवि को धूमिल करने के लिए वायुसेना अधिनियम की धारा 20(तीन) के तहत नौकरी से हटा दिया गया। आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल ने भी वायुसेना के निर्णय को सही ठहराया था। उक्त निर्णय को याची ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

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    पीठ ने याचिका खारिज करते हुए दोहराया कि सशस्त्र बलों के अनुशासन से जुड़े मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा बेहद सीमित होता है। साथ ही पीठ ने याची के इस तर्क को भी ठुुकरा दिया कि कोर्ट मार्शल न होने से पूरी कार्यवाही ही दोषपूर्ण हो गई। पीठ ने कहा कि सक्षम प्राधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने और याचिकाकर्ता के जवाब पर विचार करने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई करने का अधिकार था।

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