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    पद से हटाई गईं दिल्ली स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. वत्सला, प्रतीक्षा सूची में भेजा; कल ही विजिलेंस ने मारी थी रेड

    Updated: Fri, 22 May 2026 08:42 PM (GMT+05:30)

    विजिलेंस की छापेमारी के 24 घंटे के भीतर दिल्ली स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल को पद से हटा दिया गया है और उन्हें प्रतीक्षा सूची में रखा गया है ...और पढ़ें

    दिल्ली स्वास्थ्य महानिदेशक डाॅ. वत्सला अग्रवाल को पद से हटा दिया गया। फाइल फोटो

    दिल्ली स्वास्थ्य महानिदेशक डाॅ. वत्सला अग्रवाल को पद से हटा दिया गया। फाइल फोटो

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतों पर स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय (डीएचएस) कार्यालय पर विजिलेंस की छापेमारी के महज 24 घंटे के भीतर दिल्ली स्वास्थ्य महानिदेशक डाॅ. वत्सला अग्रवाल को पद से हटा दिया गया। इन्हें प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। उनके स्थान डाॅ. जग प्रवेश चंद्र अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. सुषमा जैन को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

    संतुष्ट नहीं थी सरकार

    इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया, वहीं राजधानी के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। डाॅ. वत्सला अग्रवाल की दिल्ली सरकार से नजदीकियों के कारण उन्हें हटाए जाने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

    विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डाॅ. वत्सला अग्रवाल को हटाने के पीछे एक कारण डीएमसी चुनाव के दौरान उनकी भूमिका को लेकर सरकार की नाराजगी भी मानी जा रही है।

    बताया जा रहा है कि डीएमसी चुनाव में उनकी भूमिका, एक पक्ष के हावी रहने, चुनावी रणनीति और समन्वय को लेकर सरकार उनसे पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी।

    कार्यालय से भाग निकलने की कोशिश 

    भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतों को लेकर विजिलेंस टीम ने बुधवार को डीएचएस कार्यालय में कई घंटों तक जांच की और खरीद संबंधी फाइलें, दस्तावेज तथा डिजिटल रिकार्ड अपने कब्जे में लिए। बताया गया कि जांच के दौरान अधिकारियों की मौजूदगी में विभाग के एक वरिष्ठ मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के कथित तौर पर अपने कार्यालय में मौजूद ठेकेदार के साथ कार्यालय से भाग निकलने की कोशिश करने से मामला गंभीर हो गया था।

    350 करोड़ की खरीद पर सवाल

    विजिलेंस सूत्रों के अनुसार जांच का केंद्र दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में पिछले छह महीनों में हुई करीब 350 करोड़ रुपये की खरीदारी बताई जा रही है। इसमें एनएसटीआरआइ मशीनें, आक्सीजन प्लांट, दवा और अन्य चिकित्सा उपकरण शामिल हैं। आरोप है कि कई टेंडरों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और कुछ कंपनियों को बार-बार फायदा पहुंचाया गया। प्रारंभिक जांच में फर्जी बिलिंग, ओवर-इनवाइसिंग और उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे हैं।

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    चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की खरीद में गड़बड़ी

    सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई, जबकि प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया पर भी संदेह जताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की खरीद में गड़बड़ी साबित होती है, तो इसका सीधा असर मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता पर पड़ता है।

    विजिलेंस सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में और अधिकारियों से पूछताछ तथा अतिरिक्त छापेमारी हो सकती है। इस मामले में डाॅ. वत्सला अग्रवाल से उनका पक्ष जानने को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। उन्हें संदेश भी भेजा गया पर समाचार लिखे जाने तक उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया।

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