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दफनाना कोई व्यापार नहीं, ईसाई कब्रिस्तानों की कमी पर दिल्ली HC सख्त, DDA-MCD से मांगी रिपोर्ट

Published: Wed, 02 Sep 2026 09:28 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने ईसाई समुदाय के लिए दफनाने की जगह को व्यावसायिक गतिविधि नहीं मानने का निर्देश दिया है। ...और पढ़ें

कब्रिस्तानों पर दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट। फोटो: आर्काइव

कब्रिस्तानों पर दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. दफनाने की प्रक्रिया व्यावसायिक गतिविधि नहीं: हाई कोर्ट

  2. ईसाई कब्रिस्तानों पर स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

  3. डीडीए, एमसीडी को अदालत ने दिए निर्देश

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में ईसाई समुदाय के लिए कब्रिस्तान और दफनाने की जगह की उपलब्धता पर स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दफनाने की प्रक्रिया को व्यवसायिक गतिविधि नहीं माना जा सकता है।

एक जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने डीडीए, एमसीडी सहित अन्य अधिकारियों को मामले पर स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए जगह की व्यवस्था करना और उनका रखरखाव करना एमसीडी व संबंधित अधिकारियों का प्राथमिक नागरिक कर्तव्य है।

ई-नीलामी से जमीन देने के सुझाव पर टिप्पणी

सुनवाई के दौरान पीठ ने डीडीए के एक उपनिदेशक के पत्र पर भी विचार किया, जिसमें कहा गया था कि प्राधिकरण ई-नीलामी के जरिए लीजहोल्ड आधार पर जमीन उपलब्ध करा रहा है और याचिकाकर्ता से ई-नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए कहा गया था।

इस पर पीठ ने कहा कि दफनाने की प्रक्रिया की तुलना व्यावसायिक गतिविधि से नहीं की जा सकती। पीठ ने डीडीए को इस संबंध में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

मौजूदा कब्रिस्तानों के भरने से जगह की कमी

याचिका में दिल्ली में ईसाई कब्रिस्तानों के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान और आवंटन की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता लीगल क्रिश्चियंस एक्शन कमिटी ऑल इंडिया के अध्यक्ष जॉर्ज सिंह (राहुल) ने याचिका दायर कर कहा कि मौजूदा ईसाई कब्रिस्तान अपनी क्षमता तक भर चुके हैं या भरने वाले हैं।

इसके कारण परिवारों के पास भविष्य में शवों को दफनाने के लिए बहुत कम जगह बची है। यह भी कहा कि इस संबंध में एमसीडी और डीडीए से संपर्क किया था। याचिकाकर्ता ने दफनाने की जगह की कमी को दूर करने के लिए इस प्रक्रिया को एक तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने की भी मांग की है।

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