दिल्ली में बंद होगी मिक्स लैंड यूज नीति? SC की कमेटी ने उठाया सवाल; अवैध होटल-कोचिंग पर एक्शन की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी ने दिल्ली के रिहायशी इलाकों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों पर चिंता जताई है, जिससे आग लगने जैसे हादसों का ख ...और पढ़ें

रिहायशी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटीज से बढ़ रहीं आग की घटनाएं। फोटो: आर्काइव
HighLights
रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों से बढ़ रहा आग का खतरा
सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने मिक्स लैंड यूज नीति की समीक्षा की सिफारिश
असुरक्षित भवनों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के रिहायशी इलाकों में बढ़ रही व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित माॅनिटरिंग कमेटी ने चिंता जाहिर की है। साथ ही इस पर त्वरित कार्रवाई की मांग की करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट जमा कर दी है।
दिल्ली के हौजरानी अग्निकांड और लखनऊ कोचिंग सेंटर हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि रिहायशी संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं जहां अग्निश्मन से बचाव के इंतजामों की अनदेखी से बड़े हादसों का खतरा है।
इसलिए कमेटी ने इसे गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए तत्काल नीति में बदलाव और सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई है। साथ ही व्यावसायिक उपयोग बढ़ने से दिल्ली में मिक्स लैंड यूज (रिहायश के साथ व्यवसाय) की नीति की समीक्षा कर पुर्नविचार करने की सिफारिश की है।
रिहायशी इलाकों में चल रहीं कमर्शियल एक्टिविटी
माॅनिटरिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दिल्ली के अनेक नियोजित और अनधिकृत क्षेत्रों में होटल, गेस्ट हाउस, रेस्तरां, कोचिंग सेंटर, अस्पताल, बैंक्वेट, जिम, कैफे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान आवासीय भवनों से संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश भवन निर्धारित अग्निशमन निकास और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है।
जिसका पालन न होने की वजह से हौजरानी जैसे अग्निकांड हो रहे है। कमेटी का कहना है कि यदि निर्धारित मानकों का पालन किया जाता तो इन हादसों में कई जानें बचाई जा सकती थीं।
कई इलाकों में नियमों के उल्लंघन का दावा
रिपोर्ट के तहक दिल्ली में कई होटल और गेस्ट हाउस बेड एंड ब्रेकफस्ट (बीएंडबी) या गेस्ट हाउस की अनुमति लेकर पूर्ण व्यावसायिक होटल की तरह संचालित हो रहे हैं।
इसी प्रकार कोचिंग सेंटर, पुस्तकालय, नर्सिंग होम, अस्पताल, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हाल भी रिहायशी भवनों में निर्धारित मानकों का पालन किए बिना चल रहे हैं। कमेटी ने इन असुरक्षित भवनों की श्रेणी में उल्लेखित करते हुए स्थानीय निकायों से इन भवनों को चिह्नित कर कार्रवाई की बात कही है।
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प्रमुख बाजारों और कॉलोनियों का किया उल्लेख
कमेटी ने विशेष रूप से खान मार्केट, सुंदर नगर, डिफेंस काॅलोनी, ग्रेटर कैलाश, साउथ एक्सटेंशन, ग्रीन पार्क, हौज खास, माॅडल टाउन और राजेंद्र नगर का उल्लेख करते हुए कहा है कि इन इलाकों में आवासीय भवनों की ऊपरी मंजिलों का बड़े पैमाने पर रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा रहा है।
इसके अलावा राजौरी गार्डन मार्केट और लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट का भी उल्लेख करते हुए कमेटी ने कहा है कि यहां अधिकांश भवनों के बेसमेंट से लेकर ऊपरी मंजिलों तक व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। ऐसे भवन अग्निशमन का आपातकालीन निकास के मानक का पालन नहीं करते हैं।
मिक्स लैंड यूज नीति की समीक्षा की सिफारिश
रिपोर्ट में कहा गया है कि मास्टर प्लान-2021 के तहत रिहायशी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर गैर-आवासीय गतिविधियों की अनुमति मिलने से अनेक गलियां बाजार में बदल गई हैं। इससे ट्रैफिक, पार्किंग, प्रदूषण और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं।
अनधिकृत काॅलोनियों की स्थिति इससे भी अधिक गंभीर बताई गई है। माॅनिटरिंग कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि स्थानीय निकायों को असुरक्षित भवनों की पहचान कर कार्रवाई का निर्देश दिया जाए।
दिल्ली फायर सर्विस से फायर एनओसी वाले भवनों का पुनः निरीक्षण कराया जाए। बीएंडबी नीति की समीक्षा कर उसके दुरुपयोग पर रोक लगाई जाए।
रिपोर्ट में दिए गए हैं यह सुझाव
- सभी स्थानीय निकाय अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वे कर असुरक्षित भवनों की पहचान करें और उनके खिलाफ कार्रवाई करें।
- आवासीय भवनों में मिश्रित उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों की मौजूदा नीति पर पुनर्विचार कर उसे समाप्त करने का निर्देश दिया जाए।
- दिल्ली अग्निशमन विभाग पहले से जारी एनओसी वाले भवनों का रैंडम निरीक्षण और पुनर्मूल्यांकन करने का निर्देश दिया जाए।
- एमसीडी के 2022 के सर्कुलर जिनके तहत होटल, मोटल, फार्महाउस तथा कुछ अन्य क्षेत्रों में सामाजिक समारोहों की अनुमति दी गई है, उन्हें वापस लिया जाए।
- दिल्ली सरकार बीएंडबी नीति की समीक्षा की जाए ताकि उसका दुरुपयोग कर आवासीय भवनों को होटल में न बदला जा सके।
- आवासीय परिसरों के दुरुपयोग और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों को संबंधित न्यायिक पीठ के समक्ष एक साथ सुनवाई के लिए भेजा जाए।
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