दिल्ली दंगों के 4 बड़े केस अब भी अधूरे, अंकित शर्मा हत्याकांड में फैसले के बाद इन मामलों पर फोकस
अंकित शर्मा हत्याकांड में फैसला आने के बाद भी, दिल्ली दंगों के कई बड़े मामले अदालतों में लंबित हैं। उमर खालिद-शरजील इमाम, हेड कांस्टेबल रतन लाल और दिल ...और पढ़ें

दिल्ली दंगा। फाइल फोटो
HighLights
अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत का फैसला आ चुका है।
उमर खालिद-शरजील इमाम केस में ट्रायल अभी शुरू नहीं हुआ।
रतन लाल, दिलबर नेगी हत्याकांड में गवाहों के बयान दर्ज हो रहे।
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत का फैसला आ चुका है, जिससे इस मामले में एक अहम पड़ाव तय हुआ है। हालांकि, इसी हिंसा से जुड़े कई अन्य बड़े मामलों में अब भी अदालतों में सुनवाई जारी है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।
दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े उमर खालिद- शरजील इमाम केस, हेड कांस्टेबल रतन लाल हत्याकांड, दिलबर नेगी हत्याकांड और जाफराबाद- मौजपुर हिंसा जैसे मामलों में अलग-अलग चरणों में कार्यवाही चल रही है। कहीं गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं तो कहीं ट्रायल की प्रक्रिया जारी है।
उमर खालिद-शरजील इमाम केस
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश से जुड़े इस मामले में यूएपीए के तहत कार्रवाई हुई थी। दोनों को 2020 में गिरफ्तार किया गया था और तब से न्यायिक हिरासत में हैं।
निचली अदालत से लेकर उच्च अदालतों तक कई बार जमानत याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन आरोपों की गंभीरता और यूएपीए प्रावधानों का हवाला देते हुए खारिज कर दी गईं। वर्ष 2026 में भी अदालतों ने पिछली टिप्पणियों को आधार बनाकर राहत देने से इनकार किया। अभी तक ट्रायल शुरू नहीं हो सका है।
हेड कांस्टेबल रतन लाल हत्याकांड
24 फरवरी 2020 को चांदबाग इलाके में ड्यूटी के दौरान हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या हुई थी। मामले में कई आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल है। कुछ आरोपितों को निचली अदालतों से सशर्त जमानत मिली, जबकि मुख्य आरोपितों की जमानत याचिकाएं गंभीर धाराओं के चलते खारिज होती रही हैं। अदालत में गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
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दिलबर नेगी हत्याकांड
उत्तराखंड निवासी दिलबर नेगी की 24 फरवरी 2020 को शिव विहार में दंगों के दौरान भीड़ ने पीट-पीटकर और जिंदा जलाकर हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने कई आरोपितों को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की है।
कुछ आरोपितों को निचली अदालत से जमानत मिली है, जबकि अन्य की जमानत याचिकाएं मामले की गंभीरता को देखते हुए खारिज हुई हैं। गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
जाफराबाद-मौजपुर हिंसा केस
23-24 फरवरी 2020 को जाफराबाद और मौजपुर इलाके में सीएए के विरोध और समर्थन के बीच हिंसा भड़की थी, जिसमें पथराव, आगजनी और गोलीबारी हुई। इस मामले में कई एफआइआर दर्ज हुईं।
अलग-अलग मामलों में कुछ आरोपितों को अदालत से जमानत मिली, जबकि कई की जमानत याचिकाएं साक्ष्यों और आरोपों की प्रकृति के आधार पर खारिज हुईं। कुछ मामलों में अदालत ने आरोपितों को बरी भी किया है।
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