जलभराव के बीच बढ़ा संक्रमण का खतरा, दिल्ली में दस्त-उल्टी के मरीज 20% तक बढ़े
राजधानी दिल्ली में लगातार बारिश और जलभराव के कारण पेट और जलजनित रोगों का खतरा बढ़ गया है। पिछले सप्ताह अस्पतालों की ओपीडी में दस्त, उल्टी और गैस्ट्रोए ...और पढ़ें

शुक्रवार की बारिश के बाद संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। फाइल फोटो
HighLights
दिल्ली में बारिश-जलभराव से संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ा।
दस्त, उल्टी, गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मरीज 20% तक बढ़े।
दूषित पानी, संक्रमित भोजन से बचें, ओआरएस का उपयोग करें।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी में लगातार हो रही वर्षा और जलभराव के बीच पेट और जलजनित संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। पिछले सप्ताह में अस्पतालों की ओपीडी में दस्त, उल्टी, पेट दर्द, बुखार और गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ने की जानकारी सामने आई है। बदलते मौसम में वायरल संक्रमण के साथ दूषित पानी और संक्रमित भोजन से होने वाली बीमारियां भी बढ़ रही हैं।
इलेक्ट्रोलाइट की कमी होने का खतरा
आरएमएल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. रमेश मीणा के अनुसार मौसम में बदलाव के कारण ओपीडी में एलर्जिक राइनाइटिस, वायरल हेपेटाइटिस, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और त्वचा संबंधी एलर्जी के मरीज बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि दूषित पानी या संक्रमित भोजन से डायरिया और गैस्ट्रोएंटेराइटिस हो सकता है, जिससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी होने का खतरा रहता है।
जलभराव से दूषित हो सकता है पानी
विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा के दौरान जलापूर्ति की पाइपलाइन में सीवर का पानी मिलने या दूषित पानी के इस्तेमाल से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और लंबे समय से रखा भोजन भी इसका कारण बन सकते हैं। जून में गुलमोहर पार्क इलाके में दूषित पानी की शिकायत के बाद टाइफाइड, दस्त, नोरोवायरस समेत अन्य जलजनित संक्रमण के मामले सामने आए थे।
किस तरह की बीमारियों का खतरा
एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में दूषित पानी से हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए, हेपेटाइटिस-ई, अमीबायसिस, जिआर्डियासिस तथा ई-कोलाई और साल्मोनेला से होने वाले तीव्र दस्त का खतरा बढ़ जाता है। इनके प्रमुख लक्षण दस्त, उल्टी, पेट दर्द, बुखार और डिहाइड्रेशन हैं। कुछ संक्रमणों में पीलिया भी हो सकता है।
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बच्चों में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा
पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में दस्त होने पर डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक रहता है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के वर्ष 2024 के स्टाप डायरिया अभियान के दौरान 35,309 बच्चों में दस्त के मामले सामने आए थे। इन बच्चों को ओआरएस और जिंक दिया गया था।
डाक्टरों के अनुसार दस्त या उल्टी होने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी नहीं होने देनी चाहिए। ओआरएस दिया जा सकता है। बार-बार उल्टी, बहुत कम या बंद पेशाब, तेज बुखार, मल में खून, अत्यधिक कमजोरी या बच्चों की आंखें धंसने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या दस्त रोकने वाली दवा नहीं लेनी चाहिए।
बचाव के लिए
- पीने के लिए उबला या सुरक्षित फिल्टर किया पानी इस्तेमाल करें।
- खाना खाने और शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोएं।
- कटे फल और खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचें।
- जलभराव वाले क्षेत्रों में दूषित पानी के इस्तेमाल से बचें।
- दस्त होने पर ओआरएस दें और डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखने पर तुरंत उपचार लें।
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