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    RSS सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल बोले- गीता मनुष्य को कर्तव्य का बोध कराती है, नई पुस्तक का हुआ लोकार्पण

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 06:33 AM (IST)

    डा. कृष्ण गोपाल ने कहा कि गीता ने विश्व को नवीन दर्शन दिया है और मनुष्य को कर्तव्य का बोध कराती है। उन्होंने डा. मार्कंडेय आहूजा की पुस्तक 'संघ प्रार् ...और पढ़ें

    पुस्तक विमोचन के दौरान सहसरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल व गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज। साथ में लेखक डा. मार्केंडेय आहूजा।

    पुस्तक विमोचन के दौरान सहसरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल व गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज। साथ में लेखक डा. मार्केंडेय आहूजा।

    HighLights

    1. गीता मनुष्य को उसके कर्तव्य का बोध कराती है।

    2. डा. कृष्ण गोपाल ने 'संघ प्रार्थना' पुस्तक का लोकार्पण किया।

    3. पुस्तक स्वयंसेवकों में कर्तव्य और राष्ट्रभाव जगाने का कार्य करेगी।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल ने कहा कि गीता ने विश्व के सामने एक नवीन प्रकार का दर्शन प्रस्तुत किया है। यह मनुष्य को उसके कर्तव्य का बोध कराती है।

    वह सुरुचि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डा. मार्कंडेय आहूजा की पुस्तक संघ प्रार्थना: गीता के परिप्रेक्ष्य में, के केशव कुंज में आयोजित लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    उन्होंने आगे कहा कि लेखक ने पुस्तक में उस भाव को जागृत करने का प्रयास किया है, जिसकी आज आवश्यकता है। जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के मोह का निवारण किया था, उसी प्रकार यह पुस्तक स्वयंसेवकों के मन में कर्तव्य और राष्ट्रभाव को जागृत करने का कार्य करेगी।

    कार्यक्रम की शुरुआत में सुरुचि प्रकाशन के प्रबंध निदेशक रजनीश जिंदल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और सुरुचि प्रकाशन की साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डाला।

    संघ की प्रार्थना का मूल भाव गीता के संदेश से प्रेरित

    प्रख्यात गीता मनीषी व जीओ गीता के संस्थापक स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने कहा कि संघ की प्रार्थना का मूल भाव गीता के संदेश से ही प्रेरित है और उसका उद्देश्य मन पर पड़े अज्ञान के आवरण को दूर करना है।

    पुस्तक लेखक डा. मार्कंडेय आहूजा ने पुस्तक की रचना-प्रक्रिया और उसके मूल उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ प्रार्थना केवल कुछ शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि वह भारतीय जीवन-दृष्टि, राष्ट्रचेतना, कर्तव्यबोध और आध्यात्मिक मूल्यों का सजीव घोष है।

    इस अवसर पर सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली, न्यासी मनमोहन सिंह, सुमित मालूजा और राहुल सिंह सहित शिक्षा, साहित्य, अध्यात्म तथा सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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