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    FIFA World Cup 2026 पर महा-संकट, 104 में से 97 मैच खतरे में; क्या रद हो जाएगा फुटबॉल वर्ल्ड कप?

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 06:47 PM (GMT+05:30)

    क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग 2026 फीफा वर्ल्ड कप के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। भीषण गर्मी खिलाड़ियों के प्रदर्शन और खेल की ग ...और पढ़ें

    क्लाइमेट चेंज के चलते भीषण गर्मी को लेकर फीफा वर्ल्ड कप के 104 में से 97 मैचों पर असर। फोटो: एआई जनरेटेड

    क्लाइमेट चेंज के चलते भीषण गर्मी को लेकर फीफा वर्ल्ड कप के 104 में से 97 मैचों पर असर। फोटो: एआई जनरेटेड

    HighLights

    1. 2026 वर्ल्ड कप के 97 मैचों पर गर्मी का खतरा

    2. 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान खेल बिगाड़ेगा

    3. क्लाइमेट चेंज से खिलाड़ियों की रफ्तार, रिकवरी प्रभावित होगी

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। फुटबाल का खेल सिर्फ पैरों का हुनर नहीं, बल्कि फेफड़ों का दम, सांसों की रफ्तार और शारीरिक सहनशक्ति की आखिरी सीमा का इम्तिहान है। 90 मिनट तक मैदान पर लगातार दौड़ते खिलाड़ी सिर्फ गेंद के पीछे नहीं भागते, बल्कि वे अपने शरीर को चरम सीमा तक धकेलते हैं।

    लेकिन अब दुनिया का यह सबसे लोकप्रिय खेल एक नए और अदृश्य प्रतिद्वंद्वी से टकराने जा रहा हैऔर उसका नाम है ग्लोबल वार्मिंग। 'क्लाइमेट सेंट्रल' की एक ताजा और चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी 2026 फीफा वर्ल्ड कप के दौरान भीषण गर्मी खिलाड़ियों के खेल को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।

    आंकड़ों की जुबानी : मौसम का खेल बिगाड़ने वाला अनुमान

    रिपोर्ट के विश्लेषण में सामने आया है कि इस महाकुंभ में होने वाले मैचों पर जलवायु परिवर्तन का सीधा असर पड़ेगा।

    • 97 मैचों पर खतरा: वर्ल्ड कप के कुल 104 मैचों में से 97 मैचों में ऐसी 'परफॉर्मेंस बिगाड़ने वाली गर्मी' होने की आशंका है, जो खिलाड़ियों की सेहत और खेल पर असर डालेगी।
    • आधे मैचों में 50 प्रतिशत से ज्यादा जोखिम: करीब 49 मैचों में इस तरह की भीषण गर्मी पड़ने की संभावना 50 प्रतिशत या उससे अधिक है।
    • 26 मैचों में स्थिति गंभीर: कम से कम 26 मैच ऐसे होंगे, जहां क्लाइमेट चेंज के कारण अत्यधिक गर्मी का जोखिम 10 प्रतिशत अंक तक बढ़ गया है।

    सबसे बड़ा खतरा इस मैच पर

    रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा जोखिम 26 जून को मेक्सिको के गुआडालाजारा में होने वाले उरुग्वे और स्पेन के मैच पर है। यहां खेल को प्रभावित करने वाली गर्मी की संभावना 70 प्रतिशत तक आंकी गई है, जिसमें क्लाइमेट चेंज का योगदान 37 प्रतिशत अंक तक है।

    28 डिग्री सेल्सियस: जहां थमती है फुटबाल की 'स्पीड'

    विज्ञानियों और खेल विशेषज्ञों का मानना है कि 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान फुटबाल खिलाड़ियों की रफ्तार, रिकवरी (शारीरिक थकान से उबरना) और मैदान पर उनकी सक्रियता को सीधे प्रभावित करता है।

    खबरें और भी

    इस तापमान के पार जाते ही खिलाड़ियों की स्प्रिंट फ्रीक्वेंसी (तेज दौड़ने की आवृत्ति) कम हो जाती है। खिलाड़ी मैदान पर कुल मिलाकर कम दूरी तय कर पाते हैं। शरीर को दोबारा ऊर्जा हासिल करने में सामान्य से ज्यादा वक्त लगता है।

    इसका असर सिर्फ सेहत पर नहीं, खेल के रोमांच पर भी पड़ेगा। जब खिलाड़ी जल्दी थकेंगे, तो मैच का टेम्पो (गति) धीमा होगा, रणनीतियां बदलेंगी और मैच का स्वाभाविक फ्लो टूट जाएगा।

    विशेषज्ञों और खिलाड़ियों की जुबानी 

    शेल विंकले (मौसम वैज्ञानिक, क्लाइमेट सेंट्रल): पुराने वर्ल्ड कप अब इतिहास की बात हो चुके हैं, क्योंकि हमारा ग्रह बदल चुका है। हीटवेव, अप्रत्याशित मौसम और बदलते सीजन अब खेलों के नियम तय कर रहे हैं। खिलाड़ी अब ज्यादा सावधानी से खेलेंगे, जिससे वो जोखिम और रोमांच कम हो जाएगा जो कभी इस खेल की जान हुआ करता था।

    कैसे किया गया यह शोध?

    क्लाइमेट सेंट्रल के शोधकर्ताओं ने 2026 वर्ल्ड कप (जो अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में संयुक्त रूप से आयोजित होना है) के सभी मैचों की तारीखों और उनकी लोकेशन का गहन अध्ययन किया।

    शोधकर्ताओं ने इस डेटा की तुलना एक ऐसी 'काल्पनिक दुनिया' के मौसम से की जहां इंसानों द्वारा फैलाया गया प्रदूषण या क्लाइमेट चेंज नहीं होता। इस तुलना से साफ हो गया कि ग्लोबल वार्मिंग ने गर्मी के इस खतरे को कितना ज्यादा बढ़ा दिया है।

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