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    दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद 220 अनधिकृत कॉलोनियों का भविष्य संकट में, विशेषज्ञ कह रहे-छोड़ना होगा घर

    Updated: Wed, 27 May 2026 09:44 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रीय राजधानी की 220 अनधिकृत कॉलोनियों का भविष्य संकट में है। ये कॉलोनियां यमुना खादर या संरक्षित भूमि पर होने के ...और पढ़ें

    किराड़ी की अनधिकृत काॅलोनी। जागरण आर्काइव

    किराड़ी की अनधिकृत काॅलोनी। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. 220 अनधिकृत कॉलोनियों का भविष्य संकट में।

    2. यमुना खादर, संरक्षित भूमि पर बसी हैं ये कॉलोनियां।

    3. केंद्र सरकार को लेना है अंतिम निर्णय।

    संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय के बाद राष्ट्रीय राजधानी की 220 अनधिकृत काॅलोनियों के भविष्य पर भी संकट के बादल छा गए हैं। हालांकि, इन्हें लेकर आखिरी निर्णय केंद्र सरकार को लेना है, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो ये जहां हैं, वहां उसी आधार पर इनका 'कल्याण' होना किसी सूरत में संभव नहीं है। इन काॅलोनियों में रहने वाली आबादी के मद्देनजर नियोजित विकास के अंतर्गत इन्हें कहीं और ही बसाना पड़ेगा।

    मालिकाना हक और नियमितिकरण का लाभ

    गौरतलब है कि 2019 में पीएम उदय स्कीम के तहत दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को 1,731 अनधिकृत काॅलोनियाें में संपत्ति का मालिकाना हक देने का अधिकार दिया गया था। डीडीए ने करीब 40 हजार को कन्वेंस डीड जारी भी की। लेकिन पिछले महीने जारी हुई अधिसूचना और केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल की घोषणा के बाद अब केवल 1511 काॅलोनियों में ही मालिकाना हक और नियमितिकरण का लाभ मिलेगा।

    फंसा है बड़ा पेंच

    220 काॅलोनियों को इस सूची से बाहर कर दिया गया है। इनमें से 90 ओ जोन (यमुना खादर में होने) और शेष वन विभाग व एएसआई की संरक्षित जमीन पर बसी हैं। ऐसे में कानूनी अड़चनों के चलते न इनमें मालिकाना हक मिलेगा, न ही ये नियमित हो पाएंगी।

    "फिलहाल इन 220 काॅलोनियों को नियमितीकरण की प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। भविष्य में केंद्र सरकार ही इनके लिए कोई अलग नीति या निर्णय लेगी।"

    -एन सरवन कुमार, उपाध्यक्ष, डीडीए।

    क्या है समाधान, विशेषज्ञों की राय

    डीडीए के पूर्व योजना आयुक्त अशोक कुमार जैन का कहना है कि वर्तमान नियमों के तहत 'ओ-जोन' या 'संरक्षित वन भूमि' पर बसी बस्तियों को नियमित करना असंभव है। सुप्रीम और हाई कोर्ट इसके लिए कभी भी अनुमति नहीं देगी। इसलिए इन काॅलोनियों को खाली कराकर यहां रहने वाले लोगों को पुनर्वास नीति के तहत किसी अन्य स्थान पर प्लाॅट या फ्लैट आवंटित किए जा सकते हैं।

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