यमुना बाढ़ क्षेत्र 'जोन ओ' में 91 अनधिकृत कॉलोनियों पर हाई कोर्ट सख्त, अभियंताओं को व्यक्तिगत पेशी का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना बाढ़ क्षेत्र के 'जोन ओ' में 91 अनधिकृत कॉलोनियों और नए अवैध निर्माणों पर कड़ा रुख अपनाया है। ...और पढ़ें

मजनू का टीला स्थित न्यू अरुणा कालोनी में अवैध निर्माण। सौजन्य: अदालती दस्तावेज

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विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। यमुना बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त रखने की अपनी जिम्मेदार से मुंह फेरने वाले अधिकारियों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है और ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का संकेत भी दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली के यमुना बाढ़ क्षेत्र में स्थित 'जोन ओ' के अंतर्गत आने वाली आवासीय कालोनियां पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं।
सुनवाई में उपस्थित रहने का भी आदेश
पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील बाढ़ क्षेत्र में जारी अवैध निर्माण पर चिंता व्यक्त करते हुए अदालत ने कहा कि यह साफ है कि एमसीडी के अभियंताओं की देखरेख में ही जोन 'ओ' में यह नया अनधिकृत निर्माण किया जा रहा है। कोर्ट ने 'जोन ओ' में आने वाले क्षेत्रों के संबंधित अधिशासी अभियंताओं के नाम अगली सुनवाई पर अदालत के समक्ष रखने का निर्देश दिया। साथ ही अधिशासी अभियंताओं को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का भी आदेश दिया।
डात्मक कार्रवाई से अस्थायी सुरक्षा
यमुना बाढ़क्षेत्र के जोन 'ओ' में व्याप्त अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण से संबंधित एक मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह व न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने चेतावनी दी कि नए अनधिकृत निर्माणों की अनुमति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने यह भी नोट किया कि इस क्षेत्र में स्थित 91 अनधिकृत कालोनियां हैं और भले ही इसे नियमित नहीं किया गया है, लेकिन इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रविधान) द्वितीय अधिनियम, 2011 के तहत 31 दिसंबर 2026 तक दंडात्मक कार्रवाई से अस्थायी सुरक्षा प्राप्त है।
एजेंसियों के बीच बातचीत चल रही
वहीं, दूसरी तरफ हलफनामा दाखिल कर आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने अदालत को बताया कि 'विशेष प्रविधान अधिनियम' के तहत मिली अस्थायी सुरक्षा जोन 'ओ' में मौजूद अनाधिकृत कालोनियों पर भी लागू होती है, लेकिन इन कालोनियों में रहने वालों को मालिकाना हक नहीं दिया जा रहा है। अदालत को यह भी बताया गया कि इन 91 कालोनियों में करीब पांच से छह लाख लोग रहते हैं, जो लगभग एक लाख घरों के बराबर है। इस इलाके के पुनर्वास और भविष्य की योजनाओं को लेकर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार व अन्य एजेंसियों के बीच बातचीत चल रही है।
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मरम्मत या नवीनीकरण की आड़ में नहीं होगा नया निर्माण
पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि बाढ़ क्षेत्र में किसी भी नए निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि मरम्मत या नवीनीकरण की आड़ में जोन 'ओ' में कोई भी नया निर्माण न हो। अदालत ने उक्त आदेश हाल में दाखिल स्थिति रिपोर्ट व इसके साथ पेश की गई तस्वीरों को देखते हुए दिया।
कार्रवाई रिपोर्ट अगली सुनवाई पर पेश करें
तस्वीरों में जगतपुर गांव, वजीराबाद, राम घाट और न्यू अरुणा नगर (मजनू का टीला) जैसे इलाकों में नए अनाधिकृत निर्माण होते हुए दिखाई दे रहे थे। इसके साथ ही अदालत ने आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय, दिल्ली नगर निगम और डीडीए के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आठ जून को एक बैठक करें और जोन 'ओ' में नए अतिक्रमणों को रोकने तथा अवैध निर्माणों को गिराने के लिए उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी देते हुए एक कार्रवाई रिपोर्ट अगली सुनवाई पर पेश करें।
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