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    वजन घटाने की GLP-1 दवाओं से बढ़ सकती हैं ये समस्याएं, डॉक्टरों ने डिहाइड्रेशन और हेयर फॉल को लेकर दी चेतावनी

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 05:25 AM (GMT+05:30)

    मोटापा और मधुमेह की GLP-1 दवाओं के बढ़ते उपयोग से डिहाइड्रेशन, मांसपेशियों में सिकुड़न और बाल झड़ने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। चिकित्सकों ने बिना निगर ...और पढ़ें

    एआई जेनेरेटेड इमेज।

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    HighLights

    1. GLP-1 दवाओं से डिहाइड्रेशन, मांसपेशियों में सिकुड़न, बाल झड़ने की शिकायतें।

    2. बिना चिकित्सकीय निगरानी उपयोग से गंभीर दुष्प्रभाव का खतरा।

    3. तेजी से वजन घटने और पोषण की कमी मुख्य कारण, दवा नहीं।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली।  मोटापा और मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जीएलपी-1 (जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट) वर्ग की दवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच चिकित्सकों ने कुछ मरीजों में डिहाइड्रेशन, मांसपेशियों में सिकुड़न, अत्यधिक कमजोरी और तेजी से बाल झड़ने जैसी शिकायतों पर चिंता जताई है।

    उनका कहना है कि ये दवाएं हर मरीज में ऐसे दुष्प्रभाव नहीं करतीं, लेकिन बिना चिकित्सकीय निगरानी, तेजी से वजन घटना और पोषण की कमी के कारण कुछ लोगों में गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए इनका इस्तेमाल केवल योग्य डाक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।

    तेजी से वजन घटाने की चाह पहुंचा रही नुकसान

    मेदांता अस्पताल के त्वचा रोग विभाग के निदेशक डा. रमनजीत सिंह ने कहा कि तेजी से वजन घटाने की चाह में कई लोग बिना विशेषज्ञ की सलाह के या निर्धारित मात्रा से अधिक इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    उनके अनुसार ऐसे मामलों में बाल झड़ना आमतौर पर टेलोजन एफ्लुवियम नामक अस्थायी स्थिति होती है, जो शरीर में तेजी से हुए बदलाव और पोषण की कमी से जुड़ी होती है। समय पर इलाज, संतुलित आहार और चिकित्सकीय निगरानी से अधिकांश मरीजों में सुधार संभव है।

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    डर्मालाइफ स्किन एंड हेयर क्लिनिक के मेडिकल डायरेक्टर एवं वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. गौरव गर्ग ने बताया कि पिछले एक वर्ष में उनके क्लीनिक में जीएलपी-1 दवाएं लेने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। उनके अनुसार, ऐसे मरीजों में करीब 40 प्रतिशत हल्के से लेकर अधिक बाल झड़ने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।

    कई मरीजों में डिहाइड्रेशन, कमजोरी और मांसपेशियों में सिकुड़न भी देखी जा रही है। उनका कहना है कि अधिकांश मामलों में दवा सीधे बालों को नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि तेजी से वजन घटना, प्रोटीन, आयरन, जिंक और बायोटिन जैसे पोषक तत्वों की कमी तथा शरीर पर पड़ने वाला मेटाबालिक तनाव इसकी प्रमुख वजह होता है।

    आनलाइन प्लेटफार्म पर इन दवाओं को ''''''''काटन फैब्रिक'''''''' जैसी दूसरी श्रेणियों में सूचीबद्ध कर उपलब्ध कराया जा रहा है। कई जगह बिना डाक्टर की पर्ची दवा मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उनके अनुसार इंटरनेट मीडिया से प्रभावित होकर स्वयं दवा लेने का बढ़ता चलन अनियंत्रित इस्तेमाल का खतरा बढ़ा रहा है।

    क्या कहते हैं नियम

    जीएलपी-1 वर्ग की दवाएं भारत में प्रिस्क्रिप्शन (शेड्यूल-एच) दवाओं की श्रेणी में आती हैं और इन्हें केवल पंजीकृत चिकित्सक के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेचा जा सकता है।

    अनधिकृत बिक्री और भ्रामक प्रचार की शिकायतों के बाद मार्च 2026 में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश जारी किए। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमों की अनदेखी कर इनकी बिक्री गंभीर नियामकीय चिंता का विषय है और इसकी जांच संबंधित औषधि नियंत्रक प्राधिकरण को करनी चाहिए।

    अंतरराष्ट्रीय शोध में भी मिले संकेत

    हाल के अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में भी जीएलपी-1 दवाओं के उपयोग के दौरान बाल झड़ने के संकेत मिले हैं।

    जनवरी 2026 में स्किन अपेंडेज डिसआर्डर्स जर्नल में प्रकाशित ''''''''प्रीवेलेंस एंड प्रिडिक्टर्स आफ हेयर शेडिंग अमंग जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट यूजर्स'''''''' अध्ययन और जुलाई 2026 में डायबिटीज रिसर्च एंड क्लीनिकल प्रैक्टिस जर्नल में प्रकाशित ''''''''ग्लूकागान-लाइक पेप्टाइड-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स एंड हेयर लास : ए सिस्टेमैटिक रिव्यू एंड मेटा-एनालिसिस'''''''' में भी बाल झड़ने का जोखिम बढ़ने के संकेत मिले।

    हालांकि, शोधकर्ताओं ने इसका प्रमुख कारण दवा का सीधा असर नहीं, बल्कि तेजी से वजन घटना, पोषण की कमी और चयापचय संबंधी बदलावों को माना है।

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