13 साल कोमा, कानूनी जंग और फिर अंतिम विदाई: एक्सीडेंट से इच्छा मृत्यु तक, हरीश राणा के संघर्ष की पूरी कहानी
साल 2013 में छत से गिरने के बाद कोमा में गए हरीश राणा का 13 साल बाद आज यानी 24 ...और पढ़ें
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बीते 13 साल से कोमा में गहरी नींद में सो रहे हरीश राणा को मंगलवार को एम्स के डॉक्टरों की देखरेख में गौरवपूर्ण मृत्यु मिल गई।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बीते 13 साल से कोमा में गहरी नींद में सो रहे हरीश राणा को मंगलवार को एम्स के डॉक्टरों की देखरेख में गौरवपूर्ण मृत्यु मिल गई। इस मामले की देशभर में चर्चा हुई। यह मामला भारत में सम्मान से मरने के अधिकार के ऐतिहासिक आदेश की तर्ज पर भी देखा जा रहा है। इस युवा की जिंदगी में 20 अगस्त 2013 को हुए एक दुर्घटना ने सबकुछ बदल दिया। समय के साथ परिवार की हिम्मत भी टूट गई।
आइए जानते हैं कि देश के सबसे चर्चित एवं ऐतिहासिक पैसिव यूथेनेशिया (परोक्ष इच्छामृत्यु) के मामले में कब-कब क्या हुआ...
20 अगस्त 2013: हरीश राणा (तब 20 वर्षीय) चंडीगढ़ में पेइंग गेस्ट हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। इस हादसे में उन्हें गंभीर ब्रेन इंजरी हो गई। इस कारण वे परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट (पीवीएस) में चले गए। उसके बाद से वे 13 वर्ष तक कोमा/वेजिटेटिव स्टेट में रहे।
2024: परिवार ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया (कहा गया कि वे टर्मिनली इल नहीं हैं क्योंकि वे खुद सांस ले सकते हैं)।
2025: परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने प्राइमरी और सेकेंडरी मेडिकल बोर्ड गठित किए। दोनों बोर्डों ने रिपोर्ट दी कि हरीश की स्थिति स्थिर है और रिकवरी की कोई संभावना नहीं है।
11 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। भारत में पहली बार पैसिव यूथेनेशिया (जीवन रक्षक उपचार, विशेष रूप से डॉक्टरी देखरेख में दिये जाने वाले न्यूट्रिशन एवं हाइड्रेशन के लिए लगाए गए फीडिंग ट्यूब हटाने की अनुमति दी।

13 मार्च 2026: परिवार ने एम्स में हरीश को शिफ्ट करने की तैयारी शुरू की। ब्रह्माकुमारी बहनों ने घर पर भावुक विदाई समारोह किया।
14 मार्च 2026: हरीश को एम्स दिल्ली के पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ्ट करने का आदेश दिया गया। गाजियाबाद में उनके घर से एम्स तक लाने का काम बड़ी ही कुशलता के साथ किया गया। इसके लिए सीएमओ भी मौके पर उपस्थित रहे थे। इस बीच हरीश की मां ने एक भावपूर्ण अपील करते हुए अपने बेटे से कहा था, 'सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए, सो जाओ…।'
15 मार्च 2026: हरीश राणा को घर से AIIMS दिल्ली (Dr. B.R. Ambedkar Institute Rotary Cancer Hospital के palliative care unit) शिफ्ट किया गया।
मार्च 2026 का तीसरा सप्ताह: एम्स के डॉक्टर्स ने परोक्ष इच्छामृत्यु के प्रोटोकॉल को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया। इसमें फीडिंग ट्यूब और अन्य दूसरे उपकरणों को हटा दिया गया। इस बीच उन्हें दर्द और तनाव कम करने के लिए पैलिएटिव सिडेशन दिया जा रहा था।
24 मार्च 2026: हरीश राणा अंतिम सांस लेते हुए सदा के लिए गहरी नींद में सो गए।
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पैसिव यूथेनेशिया
