AAP, सपा और भीम आर्मी ने भड़काई थी संसद मार्ग पर हिंसा, तीनों राजनीतिक दलों पर FIR; स्पेशल सेल करेगी जांच
जंतर-मंतर पर संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा छात्रों का आक्रोश नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की साजिश का नतीजा थी। दिल्ली पुलिस की एफआईआर में आप, सपा और भीम ...और पढ़ें

संसद मार्ग पर तीन राजनीतिक दलों ने भड़काई थी हिंसा, एफआईआर में तीनों के नाम। फोटो: आर्काइव
HighLights
हिंसा आक्रोश नहीं, राजनीतिक साजिश का नतीजा थी
FIR में आप, सपा और भीम आर्मी का नाम शामिल
जांच के लिए स्पेशल सेल को सौंपा गया मामला
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के बीच संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा छात्रों का आक्रोश नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के इशारे पर भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों की साजिश का नतीजा था।
यह बात दिल्ली पुलिस की जांच में भी सामने आ रही है। पुलिस ने संसद मार्ग थाने में दर्ज एक FIR में राजनीतिक दलों के नाम सामने आए हैं। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इसमें दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) और यूपी की समाजवादी पार्टी (SP) व भीम आर्मी पार्टी के लोगों द्वारा हिंसा किए जाने का जिक्र किया गया है।
सूत्र बताते हैं कि जल्द ही पुलिस इन पार्टियों के नेताओं को नोटिस भेजकर पूछताछ कर सकती है। इस मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच के लिए इसे स्पेशल सेल को ट्रांसफर कर दिया गया है। इससे पहले, शुरुआती जांच संसद मार्ग थाने के इंस्पेक्टर दिनेश कुमार इसकी जांच कर रहे थे।
क्या हिंसा के पीछे राजनीतिक साजिश थी?
आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी एक FIR संसद मार्ग थाने में इंस्पेक्टर इंद्रजीत की शिकायत पर दर्ज की गई है। सूत्रों के मुताबिक इसमें कहा गया है कि संसद मार्च के दौरान हुई सुनियोजित साजिश के तहत हिंसा को अंजाम दिया गया।
संसद मार्ग थाने में वैसे तो हिंसा से जुड़े कुल 21 मामलों में FIR दर्ज की गई हैं। लेकिन, इस FIR में राजनीतिक दलों के इशारे पर काकरोच जनता पार्टी द्वारा हिंसा किए जाने की बात कही गई है।
साथ ही हिंसा किस तरह हुई इसका भी विस्तार से जिक्र किया गया है। जिसमें भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की 15 गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों में क्या मिला?
पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के जरिये हिंसा से जुड़े उपद्रवियों की पहचान कर रही है। इसी कड़ी में तीनों राजनीतिक दलों का प्रमुखता से जिक्र किया गया है।
इसमें कहा है कि 16 मई को सीजेपी के गठन से लेकर 20 जुलाई की सुबह तक आप के नेताओं ने भीड़ को संबोधित किया। उनके उकसावे में आकर भीड़ आक्रामक हो गई। सुरक्षा इंतजामों को तोड़ते हुए पुलिस पर हमला किया गया और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
खबरें और भी
पुलिस का दावा है कि अब तक उपलब्ध दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और इंटरनेट मीडिया सामग्री से यह साफ है कि इसके पीछे बड़ी आपराधिक साजिश, संगठित योजना थी। इसके लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई।
भीड़ को कैसे उकसाया गया?
FIR में ये भी कहा गया है कि 20 जुलाई की सुबह सीजेपी अध्यक्ष के ''संसद मार्च'' के आह्वान पर हजारों की भीड़ इकट्ठा हुई थी। इसमें शामिल असामाजिक तत्वों भीड़ को उकसाते हुए कहा था
सुरक्षाकर्मियों के सिर पर लाठी-डंडों और पत्थरों से वार करो, जीत तभी मिलेगी जब पुलिस वालों के सिर फूटेंगे और वे मारे जाएंगे। इसके बाद ही भीड़ बेकाबू हुई और पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया।

इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
FIR में बीएनएस की धारा 109 (हत्या का प्रयास), 61 (आपराधिक साजिश), 191(2,3) (दंगा और घातक हथियारों से लैस होना), 181 (गैरकानूनी सभा), 121 (सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए गंभीर चोट पहुंचाना), आर्म्स एक्ट की धारा 25(1एबी) (बलपूर्वक पुलिस का हथियार छीनना) और दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 3 सहित कई अन्य धाराएं जोड़ी गई हैं।