दिल्ली के खान मार्केट में NDMC के बुलडोजर एक्शन से व्यापारियों में रोष, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
एनडीएमसी ने खान मार्केट में लगभग 15 दुकानों के साइनेज हटाए और पानी के पंप जब्त किए, जिससे व्यापारियों में भारी रोष है। सांसद बांसुरी स्वराज के हस्तक्ष ...और पढ़ें

खान मार्केट की दुकानों के बाहर से एनडीएमसी द्वारा हटाये गये साइनेज। जागरण
HighLights
एनडीएमसी ने खान मार्केट में 15 दुकानों के साइनेज हटाए।
कार्रवाई के दौरान बिजली आपूर्ति ठप, व्यापार प्रभावित हुआ।
सांसद बांसुरी स्वराज के हस्तक्षेप से कार्रवाई रोकी गई।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। लुटियंस दिल्ली के प्रतिष्ठित खान मार्केट में सोमवार को एनडीएमसी की कार्रवाई के बाद व्यापारियों में रोष है। एनडीएमसी की टीम जेसीबी और भारी पुलिस बल के साथ मार्केट पहुंची और लगभग 15 दुकानों के साइनेज (बोर्ड) को अवैध अतिक्रमण बताते हुए हटा दिया।
कार्रवाई के दौरान एनडीएमसी के दस्ते ने एहतियातन बिजली आपूर्ति भी ठप कर दी, जिसके चलते दिन के समय ही दुकानों और रेस्त्रां में अंधेरा छा गया और व्यवसाय ठप हो गया था। अधिकारियों की इस कार्रवाई से बाजार में अफरातफरी का माहौल बन गया।
यह कार्रवाई सिर्फ साइनेज तक ही सीमित नहीं रही। एनडीएमसी की टीम ने दुकानों के बाहर लगे पानी के कुछ मोटर पंप भी जब्त कर लिए।
विरोध पर कार्रवाई बीच में छोड़ी
इसके बाद जब दस्ता सर्विस लेन में लगे एयर कंडीशनर (एसी) के आउटर यूनिट्स को हटाने और जब्त करने की कोशिश करने लगा, तो व्यापारी ने जमकर विरोध जताया था। व्यापारियों के भारी विरोध के चलते टीम को एसी आउटर हटाने की कार्रवाई बीच में ही रोकनी पड़ी।
बता दें कि हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय सांसद बांसुरी स्वराज ने मामले में हस्तक्षेप किया और एनडीएमसी के उच्च अधिकारियों से बात की। उनके हस्तक्षेप के बाद एनडीएमसी ने अपनी कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया, जिससे मामला किसी तरह शांत हुआ।
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ट्रेडर्स एसोसिएशन ने जताई कड़ी आपत्ति
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना या उचित समय दिए इस तरह की कठोर कार्रवाई से व्यवसाय को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही बाजार में दूसरे दिन भी कारोबार प्रभावित रहा
उन्होंने एनडीएमसी के उच्च अधिकारियों और दिल्ली सरकार से तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि नियमन के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न बंद हो सके।
उनके अनुसार, दुकानों के आगे लेंगे साइनेज को अतिक्रमण बताकर कार्रवाई विधि सम्मत नहीं है। यह उत्पीड़न है।
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