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मालवीय नगर अग्निकांड के बाद घरों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर सवाल, क्या हैं दिल्ली में भवन निर्माण के नियम?

Published: Thu, 04 Jun 2026 10:29 AM (IST)Updated: Thu, 04 Jun 2026 11:46 AM (IST)

मालवीय नगर अग्निकांड के बाद दिल्ली में रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सवाल उठ रहे हैं। लेख में सुरक्षा ...और पढ़ें

मालवीय नगर के हौजरानी स्थित गेस्ट हाउस में आग लगने के बाद का दृश्य। जागरण

मालवीय नगर के हौजरानी स्थित गेस्ट हाउस में आग लगने के बाद का दृश्य। जागरण

HighLights

  1. मालवीय नगर अग्निकांड ने रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक उपयोग पर सवाल उठाए।

  2. दिल्ली में भवन निर्माण नियमों और सुरक्षा मानकों पर चिंता व्यक्त की गई।

  3. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद जांच में कमी पर जोर दिया गया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मालवीय नगर के हौजरानी में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के बाद एक बार फिर दिल्ली के रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सवाल उठने लगे हैं। हादसे के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या रिहायशी क्षेत्रों में होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का संचालन सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो रहा है।

सुरक्षा और नियमों के पालन पर चिंता

जानकारों का कहना है कि यदि संबंधित भवन का उपयोग केवल आवासीय उद्देश्य के लिए होता तो संभवतः इतनी बड़ी त्रासदी नहीं होती। मौजूदा समय में दिल्ली के कई रिहायशी इलाकों में बड़े पैमाने पर होटल, गेस्ट हाउस, रेस्तरां, दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिससे सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर चिंता बढ़ रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी दिए थे जांच के आदेश

उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष अप्रैल माह में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने रिहायशी क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक उपयोग की जांच शुरू करने का आदेश जारी किया था। अदालत ने देश के सभी राज्यों के नगर निकायों से रिहायशी परिसरों के व्यावसायिक उपयोग की पहचान कर कार्रवाई करने को कहा था।

क्या जांच के नाम पर की गई थी खानापूर्ति?

निर्देशों के तहत एमसीडी अधिकारियों को सात दिनों के भीतर सभी रिहायशी कॉलोनियों का सर्वे कर दुकान, कोचिंग सेंटर, कार्यालय और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की सत्यापित सूची तैयार करने को कहा गया था। हालांकि, अदालत के आदेश के बाद कई महीने बीत जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर व्यापक कार्रवाई नहीं हो सकी।

दिल्ली में ईमानदारी से हो जांच

मालवीय नगर अग्निकांड के बाद अब यह मांग उठ रही है कि रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा जांच कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। ऐसे में गुरुवार से दिल्ली में शुरू हो रहे अभियान को ईमानदारी से सम्पन्न करने की आवश्यकता को मजबूती मिलती है।

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क्या है दिल्ली में भवन निर्माण के नियम?

दिल्ली में भवन निर्माण को नियंत्रित करने के लिए यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज फॉर दिल्ली-2016 लागू हैं। इन नियमों के तहत भवन निर्माण, नक्शा स्वीकृति, एफएआर, सेटबैक, ऊंचाई, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी मानकों का पालन अनिवार्य है।

  • नियमों के अनुसार किसी भी भवन का निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित एजेंसी से स्वीकृत नक्शा प्राप्त करना जरूरी है।
  • यदि भवन में स्टिल्ट पार्किंग का प्रावधान किया गया है तो भवन की ऊंचाई साढ़े 17 मीटर तक रखी जा सकती है।
  • आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग वाले भवनों के लिए अलग-अलग मानदंड निर्धारित किए गए हैं।
  • भवन निर्माण में एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) का निर्धारण भूखंड के आकार और उसके उपयोग के आधार पर किया जाता है।
  • भवन और सड़क सीमा के बीच न्यूनतम दूरी बनाए रखना भी अनिवार्य है। भवन की ऊंचाई सड़क की चौड़ाई और प्लॉट के आकार के अनुसार तय की जाती है।
  • नियमों के तहत आवासीय और व्यावसायिक भवनों में निर्धारित मानकों के अनुरूप पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती है।
  • बड़े भवनों में अग्निशमन उपकरण, फायर एग्जिट और अन्य सुरक्षा उपायों का पालन करना अनिवार्य है।
  • कई मामलों में दिल्ली अग्निशमन सेवा, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी लेना पड़ता है।
  • पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 105 वर्गमीटर से बड़े भूखंडों पर वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), सौर ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता से जुड़े प्रावधान भी लागू किए गए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि भवन निर्माण के दौरान इन नियमों का पालन करने से न केवल निर्माण कानूनी रूप से सुरक्षित रहता है, बल्कि भविष्य में कार्रवाई और विवाद की संभावना भी कम हो जाती है।

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