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हौजरानी के हर घर में बना है होटल, न सुरक्षा और न दमकल के लिए चौड़ा रास्ता; भारी न पड़े लापरवाही

Published: Thu, 04 Jun 2026 08:52 AM (IST)

मालवीय नगर के हौजरानी इलाके में आग लगने के बाद होटलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। कई आवासीय भवनों को व्यावसायिक उपयोग में बदला गया है।

आग के दौरान इमारत में फंसे लोगों ने इन्हीं गद्दों पर कूद कर बचाई अपनी जान। हरीश कुमार

आग के दौरान इमारत में फंसे लोगों ने इन्हीं गद्दों पर कूद कर बचाई अपनी जान। हरीश कुमार

HighLights

  1. हौजरानी में आवासीय भवन व्यावसायिक होटलों में बदले गए।

  2. होटलों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, आपातकालीन निकास का अभाव।

  3. मालवीय नगर अग्निकांड के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मालवीय नगर के हौजरानी इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद क्षेत्र में संचालित हो रहे होटलों और गेस्ट हाउसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, जिस इलाके में 21 लोगों की मौत हुई, वहां मैक्स अस्पताल के आस-पास संकरी गलियों में दर्जनों होटल और गेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इनमें से अधिकांश भवन मूलत: आवासीय हैं, जिन्हें व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया गया है। इस तरह यह पूरा क्षेत्र होटलों के जाल सा बन गया है।

संकरी सीढ़ियां और तंग रास्ते

स्थानीय निवासियों के अनुसार, इलाके की अधिकांश इमारतों में एक ही प्रवेश और निकास मार्ग है। कमरों की संख्या बढ़ाने के लिए भवनों में जगह-जगह अस्थायी निर्माण किए गए हैं, जिससे आपात स्थिति में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कई इमारतों में पर्याप्त वेंटिलेशन तक नहीं है और संकरी सीढ़ियां ही लोगों के आवागमन का एकमात्र साधन हैं।

कम जगह में ज्यादा कमरे

स्थानीय लोगों का कहना है कि मैक्स अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की बढ़ती संख्या के कारण यहां होटल कारोबार तेजी से फैला है। कई होटल 1,000 से 5,000 रुपये प्रतिदिन तक किराया वसूलते हैं। आरोप है कि अधिक कमाई के लिए कम जगह में ज्यादा कमरे बनाए गए हैं, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है।

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बेसमेंट में किचन और ऊपर कमरे

निवासियों ने बताया कि कई भवनों में अग्निशमन उपकरण, फायर बॉक्स और आपातकालीन निकास जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। कुछ होटलों में बेसमेंट का उपयोग किचन के रूप में किया जाता है, जिससे आग लगने का खतरा और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी इमारतों में आग लगने की स्थिति में धुआं तेजी से पूरे भवन में फैल सकता है। वहीं, शीशे का अधिक प्रयोग ऐसी परिस्थितियों में भयावह रूप अख्तियार कर लेता है।

कैसे पहुंचें दमकल की गाड़ियां?

इलाके के लोगों ने यह भी बताया कि कुछ वर्ष पहले आपातकालीन वाहनों की आवाजाही के लिए सड़क चौड़ी की गई थी, लेकिन अब सड़क के दोनों ओर वाहनों की पार्किंग होने से दमकल और एंबुलेंस को निकलने में कठिनाई होती है। अग्निकांड के दौरान भी दमकल वाहनों को मौके तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

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आज से शुरू हो रही जांच में सामने आएगा सच

स्थानीय निवासी लंबे समय से क्षेत्र में संचालित हो रहे होटलों और गेस्ट हाउसों की सुरक्षा जांच की मांग करते रहे हैं। ताजा हादसे के बाद प्रशासन ने क्षेत्र के भवनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। गुरुवार से सघन जांच अभियान में और भी तथ्य सामने आने की उम्मीद है। हालांकि, सवाल यही है कि आखिर शासन-प्रशासन की नींद तभी क्यों टूटती है जब कोई जानलेवा हादसा होता है?

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