भारत में 70 करोड़ लोग ओरल हेल्थ समस्याओं से पीड़ित, जागरूकता से रुक सकती हैं 90% बीमारियां
भारत में ओरल हेल्थ एक गंभीर चुनौती है, जिससे लगभग 70 करोड़ लोग पीड़ित हैं। राष्ट्रीय मौखिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के ...और पढ़ें
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ओरल हेल्थ समस्याओं से 70 करोड़ भारतीय इससे पीड़ित हैं। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। भारत में ओरल हेल्थ अब एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। राष्ट्रीय मौखिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के आंकड़ों के अनुसार, करीब 70 करोड़ भारतीय इससे पीड़ित हैं। दंत कैंसर के मामले भी भारत में सबसे अधिक है।
जागरूकता में कमी के कारण इसे नजरअंदाज किया जाता है, जबकि 90 प्रतिशत ओरल बीमारियों को समय रहते रोका जा सकता है। भारतीय दंत परिषद के अनुसार, उपचार से ज्यादा रोकथाम जरूरी है पर, ऐसा नहीं हो रहा है। बीमारी के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 20 मार्च को ओरल हेल्थ डे मनाया जाता है।
जागरूकता की कमी सबसे बड़ी बाधा
दंत परिषद के अनुसार, स्थिति यह है कि अधिकांश लोग तब तक डॉक्टर के पास नहीं पहुंचते, जब तक समस्या गंभीर न हो जाए। जागरूकता की कमी इसकी सबसे बड़ी बाधा है। ओरल हेल्थ केवल दांतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर, मानसिक स्वास्थ्य व जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा है। पहला दांत निकलने के साथ सफाई की आदत, नियमित ब्रशिंग, फ्लासिंग और वृद्धावस्था में दांतों की मजबूती यानी ‘हैप्पी माउथ, हैप्पी लाइफ।’
इसी उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन व एफडीआइ वर्ल्ड डेंटल फेडरेशन ने इस वर्ष ‘स्वस्थ मुंह, खुशहाल जिंदगी’ का नारा देते हुए हर आयु में मुंह की देखभाल को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है।
बच्चे, युवा और वृद्ध ओरल समस्या से पीड़ित
परिषद् के अनुसार, देश में करीब चार लाख दंत चिकित्सक हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी संख्या बेहद कम है। डब्ल्यूएचओ व राष्ट्रीय मौखिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के आंकड़े बताते हैं कि भारत की कुल आबादी का 50 प्रतिशत जिसमें बच्चे, युवा और वृद्ध सभी किसी न किसी ओरल समस्या से पीड़ित हैं।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अनुसार, देश में हर वर्ष दांतों के कैंसर के 77 हजार से अधिक मामले सामने आते हैं, जिनका प्रमुख कारण तंबाकू और सुपारी का सेवन है। राष्ट्रीय मौखिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अनुसार दंत क्षय (कैरीज) से पूरे जीवन में 90 प्रतिशत लोग कभी न कभी इससे प्रभावित होते हैं। पांच से 12 वर्ष के 50 प्रतिशत बच्चें इससे प्रभावित होते हैं।
इसी तरह 15 वर्ष से अधिक आयु के 50 प्रतिशत से ज्यादा युवा मसूड़ों की बीमारी से पीड़ित हैं। राष्ट्रीय मौखिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के आंकड़ों अनुसार देश में 45 वर्ष से अधिक आयु के 61.9 प्रतिशत आंशिक रूप से अपना दांत खो चुके हैं, जबकि सात प्रतिशत से अधिक पूरी तरह दांत खो चुके हैं।
हर आयु में देखभाल जरूरी
- बच्चों में: दांतों की समस्या से पोषण, पढ़ाई और आत्मविश्वास प्रभावित होता है।
- युवाओं में: तंबाकू, अधिक चीनी और अनियमित दिनचर्या मसूड़ों को नुकसान पहुंचाती है।
- बुजुर्गों में: दांतों की कमी से कुपोषण, मधुमेह और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
क्या करें
- दिन में दो बार टूथपेस्ट से ब्रश करें
- प्रतिदिन फ्लासिंग और जीभ की सफाई करें
- मीठा कम खाएं और पानी अधिक पिएं
- हर छह महीने में दंत जांच कराएं
- बच्चों में पहला दांत आते ही सफाई शुरू करें
बन गया 18,000 करोड़ का बाजार
ओरल केयर में लापरवाही ने देश में बड़ा उपभोक्ता बाजार खड़ा कर दिया है। इंस्टीट्यूट आफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (आइबीईएफ) और उद्योग रिपोर्ट्स के अनुसार भारत का ओरल केयर बाजार 2025 तक लगभग 18,000 करोड़ रुपये का हो चुका था। टूथपेस्ट इस बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा है, जबकि टूथब्रश, माउथवाश, डेंटल फ्लास और व्हाइटनिंग उत्पाद भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादों की बढ़ती खपत के बद् भी सही ब्रशिंग तकनीक, नियमित जांच और बुनियादी स्वच्छता को लेकर जागरूकता कमी समस्या को बढ़ा रही है।
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