पश्चिम एशिया युद्ध का असर: दिल्ली में सड़क निर्माण सामग्री 30% महंगी, 400 किमी तो दूर 150 किमी सड़कें बनना मुश्किल
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण दिल्ली में सड़क निर्माण सामग्री 30-35% महंगी हो गई है, जिससे कोलतार और जर्मनी से आने वाले ब्लेड की कमी हो गई है। ...और पढ़ें

सड़क निर्माण सामग्री में डाला जाने वाला कोलतार अब देश में कम आ पा रहा है। इससे काम की रफ्तार घट गई है। एआई इमेज

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
वीके शुक्ला, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने दिल्ली में सड़कों के निर्माण पर असर डाला है, इस युद्ध से सड़क निर्माण सामग्री 30 प्रतिशत तक महंगी हो गई है। दसअस निर्माण सामग्री में डाला जाने वाला कोलतार अब देश में कम आ पा रहा है। जिन कंपनियों को पहले से सड़क बनाने का काम मिल चुका है वे काम करने से कतरा रही हैं और इस उम्मीद में हैं कि निर्माण सामग्री कुछ सस्ती हो तो वे अपना काम आगे बढ़ाएं।
150 किलोमीटर सड़कों का निर्माण होना भी मुश्किल
इसी तरह सड़कों काे खरोचने के लिए मशीनों में लगने वाला ब्लैड भी नहीं आ पा रहा है, यह ब्लैड जर्मनी से आता है। ऐसे में दिल्ली में सड़कों के निर्माण को लेकर सरकार की चुनौती बढ़ रही है। सरकार का 31 मार्च तक 400 किलोमीटर तक सड़क बनाने का लक्ष्य था, मगर इस तारीख तक इस कार्य में से 150 किलोमीटर सड़कों का निर्माण होना भी मुश्किल है। दिल्ली सरकार ने दिसंबर में ही यह दावा किया था कि मार्च तक 400 किलोमीटर तक सड़कों का काम पूरा कर लिया जाएगा।
बडे़ खर्च वाली सड़काें को एनएचएआई को सौंपेंगे
लोक निर्माण विभाग के पास दिल्ली की प्रमुख सड़कें हैं जिनकी लंबाई 1440 किलोमीटर के करीब है। सड़क परिवहन से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो यह सरकार सड़कों के मामले में बेहतर काम इसीलिए भी कर पाएगी, क्योंकि इसे केंद्र सरकार से भी इस काम से लिए मदद मिल रही है। एक तरफ सरकार ने कई महत्वपूर्ण और बडे़ खर्च वाली सड़काें को एनएचएआई को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
काम की रफ्तार हो गई है कम
वहीं सड़कों के लिए केंद्र से भी फंड हासिल कर रही है। मगर समस्या सडकों के निर्माण में हो रही देरी से आ रही है। जिस तेजी से दिल्ली में काम हाेना चाहिए था, वह नहीं हो रहा है। जबकि फरवरी से दिल्ली में बहुत तेजी से काम करने की सरकार की रणनीति थी। जिन इलाकों में काम चल रहा है वह धीमा है।
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सड़कें बनाने का काम तेजी नहीं पकड़ पा रहा
निर्माण कार्य से जुड़े लोगों का कहना है कि पश्चिमी एरिशा में चल रहे युद्ध से सड़क निर्माण सामग्री 30 प्रतिशत से 35 प्रतिशत तक महंगी हो गई है। इन लाेगों का कहना है कि विदेश से आने वाले तेल की कमी से कोलतार बनाए जाने पर असर पड़ा है।
इसके अनुसार ये लोग जिन कंपनियों से निर्माण सामग्री खरीदते हैं उन्होंने सामग्री के दाम 30 से 35 प्रतिशत तक बढृा दिए हैं। इनका कहना है कि सड़क बनाने से पहले खरोचने के मशीन में लगाए जाने वाले ब्लेड मिल पाने में भी कठिनाई हो रही है। इनकी मानें तो जर्मनी युद्ध में शामिल नहीं है मगर वहां से सामान आने में परेशानी है। इनके अनुसार इन सब मामलों के चलते सड़कें बनाने का काम तेजी नहीं पकड़ पा रहा है।
सीएम के अनुरोध पर एनएचएआई ने शुरू किया काम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण प्राधिकरण (एनएचएआई) को भी दिल्ली की सीमा के अंदर स्थित उनकी सड़कों को बेहतर किए जाने के लिए कहा है। कुछ समय पहले हुई मुख्यमंत्री की बैठक में एनएचएआइ के अधिकारियों ने आश्वस्त किया था कि वह जल्द ही अपनी सड़कों को बेहतर बनाने का काम शुरू करेंगे। इसके बाद एनएचएआई ने दिल्ली के सीमा में राजमार्गों पर सड़कों को बेहतर बनाने का काम शुरू किया है। पिछले हफ्ते ही दिल्ली से मेरठ एक्सप्रेस पर यमुना के पास सड़क पर डेंस कारपेटिंग का काम चल रहा है।
आईओसी ने कहा कि कोलतार की कमी नहीं, कंपनियां माल उठाएं
उधर आइओसी (इंडियन आयल काॅर्पोरेशन) के अधिकारिक सूत्रों ने कोलतार कम होने की खबरों का खंडन किया है। अधिकारी ने कहा कि कोलतार की कोई कमी नहीं है जिन जिन रिफाइनरी में कोलतार बनता है, वहां पर्याप्त मात्रा में मौजूद है।
अधिकारी ने कहा कि जिन्हें भी कोलतार की जरूरत है वे कंपनियों में संपर्क करें। उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि अपने यहां बड़े स्तर पर काेलतार उपयोग होता है, मगर कोलतार की कमी की गलत खबर फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को कोलतार चाहिए है वे माल उठाएं।
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