विचार: झूठे नैरेटिव की करारी हार
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में एबीवीपी की ऐतिहासिक जीत ने यह सिद्ध किया है कि भारत का युवा आज केंद्र की भाजपा सरकार, राष्ट्रवादी विचार और 'नेशन फर्स्ट' के संकल्प के साथ खड़ा है।
HighLights
डूसू में एबीवीपी की जीत युवाओं का राष्ट्रवादी संदेश।
छात्रों ने मोदी सरकार की नीतियों पर अटूट विश्वास दिखाया।
कांग्रेस-वामपंथी संगठनों के झूठे नैरेटिव को छात्रों ने नकारा।
अनिल बलूनी। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के हालिया चुनाव परिणाम केवल एक छात्र संगठन की जीत या हार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह देश की राजधानी के प्रबुद्ध और ऊर्जावान युवाओं द्वारा समग्र भारतवर्ष को दिया गया एक अत्यंत मुखर और ऐतिहासिक संदेश है।
दिल्ली विश्वविद्यालय, जिसे देश की बौद्धिक चेतना की धड़कन माना जाता है, जो उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूरब से लेकर पश्चिम तक, देश के हर राज्य के युवाओं का प्रतिनिधित्व करता है और जो देश के युवाओं के सोच को प्रतिबिंबित करता है, वहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ऐतिहासिक जीत ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि भारत का युवा आज पूरी दृढ़ता के साथ केंद्र की भाजपा सरकार, राष्ट्रवादी विचार और 'नेशन फर्स्ट' के संकल्प के साथ खड़ा है। डूसू के केंद्रीय पैनल में चार में से तीन शीर्ष पदों पर एबीवीपी की जीत युवाओं के मोदी सरकार पर अटूट विश्वास का प्रतीक है।
अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद पर शानदार जीत इस बात की गवाही देती है कि छात्र शक्ति अब केवल सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की सकारात्मक राजनीति को ही स्वीकार करती है।
कांग्रेस, राहुल गांधी एवं उनकी टीम और उसके वामपंथी इकोसिस्टम द्वारा लंबे समय से यह झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा था कि देश की नई पीढ़ी राष्ट्रवाद और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ है। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपना मत देकर इस फर्जी विमर्श की धज्जियां उड़ा दी हैं। आज का युवा इंटरनेट मीडिया के दुष्प्रचार, खोखले नारों और षड्यंत्रकारी प्रोपेगंडा से भ्रमित होने वाला नहीं है।
यह वह पीढ़ी है, जो तथ्यों को परखती है, तर्कों को समझती है और भविष्य के अवसरों को पहचानती है। यह जीत सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और देश की युवा पीढ़ी के बीच बने उस गहरे भावनात्मक और वैचारिक जुड़ाव का परिणाम है, जिसे विपक्ष कभी समझ ही नहीं पाया। प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को केवल मतदाता नहीं, बल्कि विकसित भारत का सबसे बड़ा शिल्पकार माना है।
स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षण संस्थानों का विस्तार और युवाओं के लिए नवाचार के असीम अवसर, ये सभी ठोस कदम आज के युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रहे हैं। युवाओं को भली-भांति अनुभव हो रहा है कि वर्तमान केंद्र सरकार की नीतियां उनके भविष्य को न केवल सुरक्षित, बल्कि स्वर्णिम बना रही हैं।
डूसू चुनाव के इन परिणामों का सबसे बड़ा और कड़ा संदेश कांग्रेस और वामपंथी संगठनों के लिए है। जो संगठन दिन-रात झूठ, फरेब और देश-विरोधी नैरेटिव गढ़कर यूनिवर्सिटी परिसरों को अशांत करने का दिवास्वप्न देख रहे थे, उनका पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया है। शून्य पर सिमट जाने का यह हश्र बताता है कि कैंपस को नकारात्मक राजनीति का अखाड़ा बनाने वालों को छात्रों ने सिरे से नकार दिया है।
विशेषकर वामपंथी छात्र संगठनों की स्थिति इतनी हास्यास्पद हो चुकी है कि इन संगठनों को उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नोटा से भी कम वोट मिले हैं। यह जनादेश साबित करता है कि जब युवा मतदान करता है तो वह विभाजनकारी और अवसरवादी राजनीति को कूड़ेदान में डाल देता है। यह वैचारिक जागरण केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है।
हाल के दिनों में पंजाब से लेकर महाराष्ट्र और कर्नाटक से लेकर केरल तक, देशभर के प्रमुख विश्वविद्यालयों के छात्र संघ चुनावों में एबीवीपी ने लगातार विजय का परचम लहराया है। यह वैचारिक क्रांति इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत के शैक्षिक परिसरों से वामपंथी और कांग्रेसी सोच का प्रभाव अब निर्णायक रूप से समाप्त हो रहा है। छात्र समुदाय अब विकास, अनुशासन और राष्ट्रहित के साथ जुड़कर देश को आगे ले जाना चाहता है।
जब दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र राहुल गांधी को सच का आईना दिखा रहे थे, तब इंदौर में वह झूठ की गूंज में अपने ही छात्र संगठन एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं को सामान्य छात्र बनाकर स्टैंडअप कॉमेडी और फूहड़ राजनीति कर रहे थे। यह कांग्रेस की वैचारिक दरिद्रता को उजागर करता है। पूरे देश ने देखा कि किस तरह इंदौर में राजनीतिक विरोध के नाम पर प्रधानमंत्री मोदी की दिवंगत मां पर अपमानजनक टिप्पणियां की गईं और कांग्रेस नेतृत्व उस पर हंसता रहा।
राहुल गांधी हर बार प्रधानमंत्री मोदी को नीचा दिखाने की ओछी राजनीति करते हैं, लेकिन हर बाद देश की जनता और देश के युवा राहुल गांधी को सच्चाई का आईना दिखाते हैं। चाहे 'चौकीदार चोर है' का अनर्गल प्रलाप हो, विदेशी धरती पर जाकर देश को बदनाम करना हो, हिंदुओं को अपमानित करना हो, किसानों के नाम पर भ्रम फैलाना हो, सेना के पराक्रम का अपमान हो या भारतीय अर्थव्यवस्था के ध्वस्त होने की झूठी भविष्यवाणियां-हर बार राहुल गांधी के झूठे नैरेटिव देश की जनता एवं देश के युवाओं द्वारा ध्वस्त किए जाते हैं।
नकारात्मकता और ओछी राजनीति करने वाली कांग्रेस एवं उसके सहयोगियों को दिल्ली विश्वविद्यालय के युवाओं ने संदेश दे दिया है कि नए भारत के निर्माण में झूठ और फूहड़ता के लिए कोई स्थान नहीं है।
(लेखक लोकसभा के सदस्य एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक हैं)





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