'शोले' को 'गब्बर' को 14 दिन तक भूखे-प्यासे बिठाया बाहर, फिर छीना था उनसे रोल, बेटे ने सुनाई दर्द भरी आपबीती
शोले में 'गब्बर' की भूमिका निभाकर अमर हुए अमजद खान को एक फिल्म से बाहर कर दिया गया था। बेटे शदाब खान ने हाल ही में पिता के संघर्ष से जुड़ा किस्सा शेयर ...और पढ़ें

अमजद खान से जब फिल्म में छीना गया था रोल/ फोटो- Instagram

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। अमजद खान ने अपने करियर में कई ऐसे पावरफुल किरदार निभाए हैं, जो उनके जाने के बाद भी कई सालों तक दर्शकों को याद रह गए हैं। आज फैंस उन्हें 'शोले' के 'गब्बर' के रूप में याद करते हैं। हालांकि, शोले में रोल मिलने के सफर से पहले उनके पिता के फिल्म इंडस्ट्री में होने के बावजूद अमजद खान ने खूब धक्के खाए।
हाल ही में रानी मुखर्जी (Rani Mukerji) के अपोजिट 'राजा की आएगी बारात' से डेब्यू करने वाले अमजद खान के बेटे शादाब खान ने पिता के संघर्ष से जुड़ा एक ऐसा किस्सा बताया, जिसके बारे में आज तक शायद दिग्गज अभिनेता के फैंस को भनक भी नहीं होगी।
निर्देशक ने 2 हफ्ते तक एक्टर को सेट पर बिठाकर रखा
अमजद खान के बेटे शादाब खान ने जर्नलिस्ट विक्की लालवानी से खास बातचीत करते हुए अमजद खान को 'शोले' ऑफर होने से पहले का एक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा,
"मेरे पापा अमजद खान को शोले से पहले एक फिल्म में छोटा सा रोल मिला था, लेकिन वह फिल्म बहुत बड़ी थी, अजीत साहब उसमें विलेन थे। उसमें पिता अमजद खान को विलेन के राइट हैंड का रोल मिला था। उन्हें बोला गया कि तुम हर फ्रेम में विलेन के साथ हो, लेकिन डायलॉग नहीं है। एक ही डायलॉग था डैड का फिल्म में 'कमॉन ब्वॉयज'। उन्हें बुलाया शूट के लिए, मेकअप करवाया दाढ़ी लगवाई सूट पहना दिया और पापा को बोला बुलाएंगे तुम्हें अभी बैठ जाओ, लेकिन उस दिन शॉट नहीं लगा। दूसरे दिन भी बुलाया और मेकअप लगा के बिठा दिया, लेकिन उनका शूट नहीं हुआ। दो हफ्ते तक यही चला, उन्हें बुलाया, लेकिन शूट नहीं होता था। वो जाते थे, लेकिन निर्देशक उन्हें सेट पर नहीं बुलाते थे।"
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सेट पर खाना-पानी तक नहीं होता था ऑफर
शदाब ने पिता के साथ किए गए बुरे बर्ताव पर आगे कहा, "वह रोज सेट पर जाते थे, लेकिन न उनसे चाय पूछी जाती थी और न ही खाना। पापा के माइंड में 2 हफ्ते यही चलता रहा कि कोई बात नहीं बुलाएंगे। दो हफ्ते बाद जब अमजद खान सेट पर आए, तो उन्हें मना कर दिया गया कि तुम जाओ, तुम्हारा रोल कट कर दिया गया है। उन्हें 400-500 रुपए मजदूरी दे दी।"
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ड्रेस दादा ने अमजद खान को दी ये सलाह
शदाब ने आगे कहा, "जब अमजद खान सेट पर अपना मेकअप उतारकर जाने लगे, तो एक ड्रेस दादा उनके पास आए और बोला बेटा आप जैन साहब के लड़के हो। उन्होंने पापा को बोला कि एक बात बोलूं बुरा तो नहीं मानोगे, तो अमजद खान ने बोला नहीं। ड्रेस दादा ने पापा को बोला कि तुम बहुत सीधे हो, तुम जानते हो कि अजीत साहब फिल्म के विलेन हैं और तुम्हारे डैड के अच्छे दोस्त है, फिर भी तुमने अंदर जाकर उनसे नहीं कहा कि मैं जैन साहब का लड़का हूं। तुम्हें डायरेक्टर ने बाहर बिठाया, अगर तुम एक बार अजीत साहब को बोलते कि मैं जैन साहब का लड़का हूं अमजद, तो वह निर्देशक का कान पकड़ के बोलते कि इसे मेरे साथ फ्रेम में खड़ा करो, तुम्हारी लाइंस और रोल बढ़ता फिर तुमने क्यों नहीं लिया। पापा ने बोला मैंने सोचा ही नहीं। फिर ड्रेस दादा ने उसे कहा कि मैंने तुम्हें एक एडवाइज देता हूं कि ये लाइन तुम्हारे लिए नहीं है, तुम बहुत सीधे हो, यहां तुम धक्के खाओगे।"
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इस निर्माता ने बदली थी अमजद खान की जिंदगी
अपने सरल स्वभाव के कारण इंडस्ट्री में धक्के खा रहे अमजद खान की जिंदगी का सबसे बड़ा मौका तब आया, जब अभिनेता ने एक प्ले में एक्टिंग करने के साथ-साथ उसे डायरेक्टर भी किया। उस नाटक में अमजद खान की पत्नी ने रमेश सिप्पी की बहन का किरदार अदा किया। जिस तरह से अमजद खान ने उस प्ले में काम किया, रमेश सिप्पी ने उसी दौरान ये डिसाइड कर लिया था कि वह अमजद खान को अपनी फिल्म 'शोले' का 'गब्बर' बनाएंगे।
'शोले' में गब्बर बनकर अमजद खान ने जो इतिहास रचा, उसका गवाह आज पूरा इंडियन सिनेमा है। उनके डायलॉग से लेकर हंसी तक आज आइकॉनिक बन चुकी है।
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