'गोविंदा से बड़ा कोई एक्टर नहीं लगता उन्हें...', Ayushmann Khurrana ने अवॉर्ड्स को लेकर बेबाकी से रखी राय
'पति-पत्नी और वो दो' एक्टर आयुष्मान खुराना ने सितारों को मिलने वाले अवॉर्ड्स पर खुलकर अपनी राय रखी और बड़ी बेबाकी के साथ गोविंदा के सपोर्ट में उतरे। ...और पढ़ें

आयुष्मान खुराना ने गोविंदा को बताया सबसे बड़ा स्टार/ फोटो- Instagram

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प्रियंका सिंह, मुंबई। लीक से हटकर फिल्मों और अनोखे किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले आयुष्मान खुराना और कमर्शियल व सार्थक सिनेमा के बीच संतुलन बनाकर चल रहीं रकुल प्रीत सिंह आज सिनेमाघरों में रिलीज हो रही फिल्म पति पत्नी और वो दो में साथ नजर आएंगे। दोनों का मानना है कि कॉमेडी करना अभिनय की सबसे कठिन विधा है। इस फिल्म, जोखिम भरे चुनावों, कामेडी को न मिलने वाले सम्मान जैसे कई मुद्दों पर दोनों से हुई बातचीत।
रिलीज वाला दिन आप दोनों का कैसा बीतता रहा है?
आयुष्मान - कई बार ऐसा लगता है कि दसवीं का रिजल्ट आने वाला है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में मैंने इन चीजों से खुद को अलग करना सीख लिया है। मैं फिल्ममेकिंग की प्रक्रिया और उसके सफर से प्यार करता हूं। उसके अलावा जो होगा, वो होगा। एक उम्मीद बनी रहती है कि पब्लिक को फिल्म पसंद आएगी। अब उतना डर नहीं लगता है, जितना पहले लगा करता था।
रकुल – मैं तो बहुत नर्वस होती हूं। मैं लगातार देख रही होती हूं कि क्या हो रहा है, लोगों की क्या प्रतिक्रिया आ रही है।
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कॉमेडी के मुकाबले ड्रामा करने वाले कलाकारों को ज्यादा सम्मान और अवॉर्ड्स मिलते हैं। क्या इस सोच को बदलने की जरुरत है?
आयुष्मान- बिल्कुल, मेरा मानना है कि कॉमेडी करना सबसे कठिन है। जो एक्टर कॉमेडी नहीं कर सकता है, वह एक्टर ही नहीं है। आप किसी भावुक सीन को बैकग्राउंड म्यूजिक या स्क्रीनप्ले से बेहतर कर सकते हैं, लेकिन एक कॉमिक सीन को बिना टाइमिंग के उस स्तर तक लेकर ही नहीं जा सकते हैं। जो कॉमेडी अच्छी करता है, वो ही सबसे अच्छा एक्टर है। मुझे गोविंदा से बड़ा कोई एक्टर नहीं लगता है। उन्हें सारे अवॉर्ड्स दे देने चाहिए।
रकुल – यह बहुत दुखद है कि जब आप रो रहे हैं या गंभीर सीन कर रहे है, तो उसे सारे अवॉर्ड्स मिल जाते हैं, लेकिन वह करना सबसे आसान है। लोगों को हंसाना बहुत कठिन है।
क्या स्थापित कलाकार बन जाने के बाद मुद्दों या वर्जित विषयों वाली फिल्में करने का जोखिम लेना आसान हो जाता है?
आयुष्मान - मैंने शुरुआत से जोखिम लिया है, क्योंकि मेरे आने से पहले साल 2007 के आसपास तक सब अभिनेता 30 साल के ऊपर हो चुके थे। सभी मिलेनियल (1981-1996 के बीच पैदा हुए) थे, कोई मिलेनियल स्टार नहीं था। तब मुझे लगा था कि मैं मुंबई आकर धमाल मचा दूंगा। अचानक से रणबीर कपूर की एंट्री होती है, फिर रणवीर सिंह आ जाते हैं। मैंने सोचा ये क्या हो गया, अब तो मुझे अलग ही फिल्में करनी होंगी। मैं कंवेंशनल (पारंपरिक) काम तो कर ही नहीं सकता हूं, वो तो ये सब कर रहे हैं। इसलिए मैंने विकी डोनर की। उससे पहले मैंने पांच फिल्मों के लिए ना कहा था, जो करियर की शुरुआत में सबसे बड़ा जोखिम था। मुझे लगता है कि जब तक आप जोखिम नहीं लेते हैं, तब अलग नहीं कर पाएंगे।
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रकुल – आसान तो नहीं, लेकिन जरूरी होता है। यूं तो हर फिल्म ही एक जोखिम होती है। फिल्म कब रिलीज होगी, क्या माहौल है, फिल्म चलने न चलने को लेकर ऐसे कई फैक्टर होते हैं। फिल्म साइन करते समय ही उसकी बॉक्स ऑफिस सफलता एक जोखिम ही होती है। वह आपके हाथ में नहीं है। लेकिन हां, अपने फिल्म के जरिए, मुद्दे की बात करनी चाहिए। इसके लिए कमर्शियल फिल्में करनी पड़ती हैं, ताकि आप इतने बड़े बन जाएं कि जब आप कुछ अहम मुद्दों पर फिल्म करें, तो लोग उसे देखें।
आयुष्मान आप पर अनकंवेंशनल (अपारंपरिक) हीरो का टैग लगा है। उसके हटाने का मन करता है या अब जरुरत नहीं?
आयुष्मान खुराना: मैं अपने आप को इतनी गंभीरता से नहीं लेता हूं, जो कहानी मुझे पसंद आती है, कर लेता हूं। प्रयास यही होता है कि मैं ऐसा कुछ करूं, अलग कहानियों का हिस्सा बनूं, जो पहले किसी ने नहीं किया हो। पति पत्नी और वो दो फिल्म की बात करूं, तो मेरा पात्र प्रजापति पांडे पत्नीव्रता किस्म का इंसान है, जो एक परिस्थिति में फंसा हुआ है। उसमें से कॉमेडी निकलकर आती है। फिल्म करने से पहले मैंने फिल्म के निर्देशक (मुदस्सर अजीज) से तीन बार कहानी सुनी थी, हर बार उतनी ही हंसी आई थी।
पिछले दिनों आपके पति जैकी भगनानी ने आप दोनों की शादीशुदा जिंदगी को सिचुएशनशिप (एक ऐसा रोमांटिक रिश्ता, जिसमें कोई प्रतिबद्धता या भविष्य की योजना नहीं होती) जैसा बताया था, जिसका मतलब कुछ और था, लेकिन आप दोनों ट्रोल हो गए थे। जेन जी के इन शब्दों से अब दूरी बना ली है?
इस शब्द को मीडिया के कुछ लोगों ने घुमा दिया था। जब यह बात जब हुई थी, तब मैं जैकी के साथ ही बैठी थी। वह सवाल जिस संदर्भ में पूछा गया था, वह यह था कि आजकल के सिचुएशनशिप के जमाने में शादीशुदा होना कैसा लगता है। उस पर जैकी ने जवाब दिया था, लेकिन पहले की तीन लाइनें छोड़कर बस यह चलाया गया कि मेरी शादी सिचुएशनशिप है। खैर, उसके बाद तय कर लिया कि जेन जी बनने की कोशिश नहीं करेंगे।

इस फिल्म में एक लड़का है, जिसका नाम तीन लड़कियों से जोड़ा जा रहा है। अगर इसे उल्टा कर दिया जाए, तो क्या ऐसी फिल्में बन सकती हैं?
आयुष्मान - हां, मैं तो मानता हूं कि पत्नी पति और वो दो ऐसी फिल्में भी बननी चाहिए। इस फिल्म में तीनों लड़कियां मुझसे ज्यादा मजबूत हैं। मेरा पात्र फंसा हुआ है। मैंने हमेशा प्रोग्रेसिव (प्रगतिशील) फिल्में की हैं। यह फिल्म भी प्रोग्रेसिव है। हां, यह बात सच है कि लोग वैसा दौर देख चुके हैं, जिसमें एक लड़का और दो-तीन लड़कियां होती हैं। लेकिन यह हमारे देश की फिल्मों का अहम हिस्सा रहा है। क्लासिक रोमांस, क्लासिक लव स्टोरी, क्लासिक कॉमेडी यह आउटडेटेड (पुरानी) नहीं हो सकती हैं। दे दे प्यार दे 2 फिल्म में रकुल को सबसे अच्छा रोल मिला था।