'ससुरी कभी बेसुरी नहीं होती...' जब बड़े गुलाम अली खान ने Lata Mangeshkar के लिए कह डाला था कुछ ऐसा
Lata Mangeshkar, बड़े गुलाम अली खान को अपना उस्ताद मानती थीं, लेकिन एक बाद खान साहब उनके बारे में कुछ ऐसा कह दिया था कि सब सुनकर दंग रह गए थे। ...और पढ़ें
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जब गुलाम अली ने कह दिया था कुछ ऐसा
HighLights
जब गुलाम अली ने कह दिया था कुछ ऐसा
दिलचस्प है ये पुराना किस्सा
लता मंगेशकर, गुलाम अली खान को मानती थीं उस्ताद
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संगीत में स्वर साम्राज्ञी के नाम से मशहूर लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की गायकी की आज की पीढ़ी भी दीवानी है। उन्होंने भारतीय सिनेमा को कई ऐसे गीत दिए जो सदाबहार हो गए। म्यूजिक लवर्स तो उनकी गायकी के दीवाने हैं हीं संगीत जगत के महान गायक भी उनकी गायकी की तारीफ किए बिना रह पाते थे।
इसी बीच संगीत की दुनिया के महान गायक गुलाम अली खान ने लता दीदी के बारे में कुछ ऐसे कहा था जिसे सुनकर सब हैरान भी हुए और खुश भी।
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20वीं सदी के तानसेन थे बड़े गुमाल अली खां
'20 सदी के तानसेन' कहे जाने वाले बड़े गुलाम अली खां (Ghulam Ali Khan) का नाम संगीत की दुनिया में बड़े ही अदब से लिया जाता है। वे भारतीय संगीत के सबसे प्रतिभाशाली गायकों में से एक थे। भले ही उनका करियर बहुत लंबा ना रहा हो लेकिन कम वक्त में भी वे संगीत की दुनिया में वो काम कर गए जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा।
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लता दीदी के लिए कही थी ये बात
लता मंगेशकर, गुलाम अली खां को अपना उस्ताद मानती थीं और दोनों से जुड़ा एक बड़ा मजेदार किस्सा है जब पंडित जसराज के साथ वे गीतों और बंदिशों पर चर्चा कर रहे थे। तभी बीच में लता मंगेशकर की गायकी का भी जिक्र हुआ, जिस पर गुलाम अली खान तुरंत बोल पड़े कि 'ससुरी कभी बेसुरी नहीं होती'।

इतना ही नहीं एक लोकप्रिय किस्से के अनुसार, जब उस्ताद गुलाम अली खान ने पहली बार लता मंगेशकर की आवाज रेडियो पर सुनी तो वे इतना डूब गए कि अपनी ही बंदिश भूल गए थे।
गुलाम अली खान के बेहतरीन गीत
गुलाम अली खान ने कई गीतों को अपनी आवाज दी जिनमें याद पिया की आए, आए ना बालम, नैना मोरे तरस गए, सैंया बोलो, प्रेम अगन जियरा शामिल हैं। गुलमा अली खान को 1962 में पद्म भूषण से नवाजा गया था।
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शुरुआत में गुलाम अली खान ने फिल्मों के लिए गाने से इनकार कर दिया था, लेकिन के. आसिफ की शानदार फिल्म 'मुगल-ए-आजम' (1960) के लिए उन्होंने अपना यह सख्त नियम तोड़ा और राग सोहिनी में 'प्रेम जोगन बन के' गाना गाकर एक यादगार प्रस्तुति दी।
लता मंगेशकर मानती थीं उस्ताद
लता मंगेशकर बड़े गुलाम अली खान को उस्ताद मानती थीं, उन्होंने कई बार इंटरव्यू में कहा कि वे उनका बहुत आदर करती हैं और उनके जैसे महान कलाकार रोज-रोज पैदा नहीं होते। 50 के दशक में लता अपने एक कॉन्सर्ट के लिए गुलाम अली खान साहब का आशीर्वाद लेने गई थीं।