गदर 2 के विलेन 5 साल बाद 'भीष्म पितामह' बनकर करेंगे टीवी पर वापसी, बोले - 'मैं अपने अंतिम समय तक...'
गदर 2 और पठान जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके अभिनेता मनीष वाधवा अब जल्द ही टीवी ...और पढ़ें

मनीष वाधवा टीवी पर करने जा रहे हैं वापसी/ फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई ब्यूरो। पठान, गदर 2 और भूल भुलैया 3 फिल्मों के अभिनेता मनीष वाधवा करीब पांच साल बाद फिर शो हस्तिनापुर के वीर से टीवी में वापसी कर रहे हैं। दो जून से सोनी सब पर प्रसारित होने जा रहे महाभारत पर आधारित इस शो में मनीष भीष्म पितामह की भूमिका निभाएंगे। उनसे धारावाहिक और करियर की प्राथमिकताओं पर बातचीत की।
गदर 2 और भूल भुलैया 3 जैसी बड़ी फिल्में करने के बाद टीवी पर वापसी का विचार कैसे आया?
टीवी, थिएटर या फिल्म कोई भी माध्यम हो, मेरे लिए सब बराबर रहे हैं। मेरे लिए पात्र और प्रोजेक्ट की कहानी ज्यादा मायने रखती है। मैं इसे टीवी पर अपनी वापसी नहीं कहूंगा। मैं तो टीवी से कहीं गया ही नहीं था। मैं पहले भी फिल्म और टीवी दोनों माध्यमों पर कुछ न कुछ काम करता रहा हूं। भीष्म पितामह जैसी भूमिका कलाकार को हमेशा नहीं मिलती। यही सोचकर मैंने यह शो करने का निर्णय किया। यह कहानी बताती है कि बच्चों को तो हर घर में एक ही तरह की शिक्षा दी जाती है। यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप कौरव बनना चाहते हैं या पांडव।
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आपकी कोशिश टीवी में पहले दिखे भीष्म पितामह के पात्रों जैसे ही कुछ करने की है या उससे कुछ अलग?
अब तक किसी भी धारावाहिक में कौरवों और पांडवों के बचपन को इतने विस्तृत तरीके से नहीं दिखाया गया है। इससे पहले के महाभारत में बचपन की कहानी को दो-तीन एपिसोड में ही खत्म कर दिया गया था। इस शो में निर्माताओं का सोच बिल्कुल अलग है। जब कौरव और पांडव बच्चे थे, तब उनके साथ भीष्म का व्यवहार कैसा था, मैं शो में वो भूमिका निभा रहा हूं। चैनल और शो के निर्माताओं से मुझे जो दिशा निर्देश मिले, मैंने उसी के आधार पर तैयारी की। इसके अलावा भीष्म पितामह के बारे में हम सबने पढ़ा और टीवी पर देखा है।
भीष्म अपनी प्रतिज्ञा के लिए जाने जाते हैं, क्या आपने अपने करियर में कभी कोई प्रतिज्ञा की?
मैंने अपनी प्रतिज्ञा कभी जगजाहिर नहीं की। बस मेरे मन में हमेशा यह प्रतिज्ञा होती है कि अच्छे से अच्छा काम करूं। इसे प्रतिज्ञा और चाह दोनों समझ सकते हैं। मैं बस यही चाहता हूं कि अंतिम समय तक अपना काम करता रहूं। मैं किसी सेट से तभी जाता हूं, जब वहां मेरा काम पूरा खत्म हो जाता है। बाकी मैंने कभी किसी भूमिका को लेकर कोई प्रतिज्ञा नहीं की। जो रास्ते में अच्छा मिलता जाता है, वो कर लेता हूं।
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भीष्म की तरह क्या गलत पक्ष जानते हुए भी आपको कभी सिर्फ कर्तव्यों के कारण कोई काम करना पड़ा?
मैं उस प्रोजेक्ट का जिक्र तो नहीं करूंगा, लेकिन मेरे साथ ऐसा हुआ है। एक फिल्मकार हैं, जिनसे हमारा संबंध परिवार की तरह है। उनके साथ मैंने कुछ काम किया है, जिसका मुझे बाद में पछतावा हुआ। हालांकि, तब मुझे कोई एहसास नहीं था कि ऐसा हो जाएगा। मैंने अब तय कर लिया है कि मैं यारी-दोस्ती में कोई काम नहीं करूंगा। जीवन में सोच-समझकर ही आगे बढ़ूंगा। टीवी में लंबे समय की प्रतिबद्धता होती है। इसके साथ दूसरे प्रोजेक्ट्स को कैसे समय देंगे? टीवी में तो हर रोज काम करना होता है। यहां मुझे थोड़ी सहूलियत मिल गई है कि मैं इसके साथ थोड़ी फिल्में और वेब सीरीज भी कर रहा हूं। मैंने इसके लिए महीने के कुछ दिन निर्धारित किए हैं कि मैं इतने दिनों में इस शो की शूटिंग करूंगा। इस बीच अगर कुछ बहुत अच्छा मिलता है तो कहा ही जाता है कि समय निकालना पड़ता है।

महाभारत की कहानी से आज की महिलाएं क्या सीख सकती हैं?
इससे महिलाएं ही नहीं, सभी सीख सकते हैं कि किसी भी घर का भविष्य महिलाओं के हाथों में होता है। कुंती जंगलों में रहीं, वहीं बच्चों का पालन-पोषण किया, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को कितनी अच्छी परवरिश दी। वहीं सारी सहूलियत और सुख सुविधाओं के बाद कौरवों को कैसी परवरिश मिली। यह मांओं पर निर्भर करता है कि वे अपने बच्चों को कैसे आगे बढ़ाती हैं। मेरी मां अब इस दुनिया में नहीं रहीं, लेकिन उन्होंने मुझे कभी साहसिक कदम बढ़ाने से नहीं रोका। मैंने भी कभी उनके प्यार का नाजायज फायदा नहीं उठाया। मैं आज जो भी हूं, अपनी मां के कारण ही हूं।
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