'फैसल' बनने के लिए Nawazuddin ने गैंगस्टर छोड़ जमींदारों से ली प्रेरणा, गैंग्स ऑफ वासेपुर से जुड़ा खोल राज
गैंग्स ऑफ वासेपुर ने 8 अगस्त को अपने 14 साल पूरे किए हैं। इस मौके पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने बताया कि उन्होंने फैसल बनने की प्रेरणा अपने गांव के जमींदा ...और पढ़ें

गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 को हुए 14 साल/ फोटो- Instagram
HighLights
हॉलीवुड फिल्मों को छोड़ गांव के जमींदारों को बनाया इंस्पिरेशन
गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 ने पूरे किए 14 साल
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने खोला 'फैसल' बनने के पीछे का राज
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' हिंदी सिनेमा की कल्ट क्लासिक फिल्मों में शामिल है। इस मूवी को निर्देशक ने दो हिस्सों में बनाया था और इसके दोनों ही पार्ट्स दर्शकों को बेहद पसंद आए थे। झारखंड के धनबाद जिले के वासेपुर कस्बे में तीन पीढ़ियों तक चलने वाले खूनी संघर्ष पर आधारित इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी से लेकर मनोज बाजपेयी, ऋचा चड्ढा और हुमा कुरैशी जैसे बेहतरीन एक्टर्स नजर आए थे।
8 अगस्त 2012 को रिलीज हुई 'गैंग्स ऑफ वासेपुर-2' ने आज सिनेमाघरों में अपने 14 साल पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर फिल्म में 'फैसल खान' का किरदार अदा करने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने बताया कि उन्होंने अपने इस आइकोनिक किरदार के लिए कैसे तैयारी की थी।
गांव के जमींदारों से ली 'फैसल' बनने की प्रेरणा
नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने उस समय को याद करते हुए कहा, "जब अनुराग कश्यप ने मुझे स्क्रिप्ट भेजी, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि यह किरदार मैं तुम्हें निभाते हुए देखना चाहता हूं। सच कहूं तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह मुझे इतना दमदार किरदार देंगे। शायद उन्होंने मेरी पहले की कुछ भूमिकाओं में फैसल की झलक देखी होगी। जब मैंने स्क्रिप्ट को पहली बार पढ़ा, तो किरदार की गहराई देखकर हैरान रह गया। जैसे ही मैंने स्क्रिप्ट पढ़कर खत्म की, मैं अपने गांव की यादों में चला गया।"
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने आगे कहा, "जब मेरे पास स्क्रिप्ट आई थी, तो मैंने सोचा था कि मैं इस किरदार को 'द गॉडफादर' और 'स्कारफेस' जैसी फिल्मों से प्रेरित होकर निभाऊंगा। लेकिन बाद में मेरे दिमाग में आया कि 'फैसल' देसी मिट्टी से जुड़ा किरदार है, इसलिए मुझे अपने गांव के जमींदारों से प्रेरणा लेनी पड़ी।"
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हर जमींदार के हाव-भाव ध्यान से देखते थे
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने आगे बताया, "मेरे गांव में ऐसे कई लोग थे, जिनका रवैया बिल्कुल फैसल जैसा था। वे जमींदार और दूसरे प्रभावशाली लोग थे, जिन्हें बाहर की दुनिया की ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन उनके बैठने, चलने और बात करने के अंदाज में इतना रौब होता था कि लगता था जैसे दुनिया उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है।" इस किरदार को और जीवंत बनाने के लिए नवाज़ुद्दीन अपने गांव भी गए। उन्होंने वहां ऐसे लोगों को ध्यान से ऑब्जर्व किया और उनके बेटों से बातचीत भी की।

अगर आपने अभी तक 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' नहीं देखी है, तो आप यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म 'प्राइम वीडियो' पर देख सकते हैं। मूवी में पंकज त्रिपाठी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, तिग्मांशु धूलिया, जयदीप अहलावत और पीयूष मिश्रा ने अपने किरदारों की अमिट छाप दर्शकों के दिलों पर छोड़ी है।