निर्देशन छोड़ Mahesh Bhatt ने बनाई नई 'पहचान', पर्दे पर अभिनय करने को लेकर खोले दिल के राज
निर्देशन से दूर महेश भट्ट (Mahesh Bhatt) एक नई पहचान लेकर लौट आए हैं। हाल ही में उन्होंने अभिनय चुनने को लेकर बात की है। ...और पढ़ें

अभिनय को लेकर क्या बोले महेश भट्ट। फोटो क्रेडिट- एक्स

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दीपेश पांडेय, मुंबई। कैमरे के पीछे रहकर दुनिया को जज्बात सिखाने वाले महेश भट्ट (Mahesh Bhatt) सोनी लिव की वेब सीरीज 'पहचान' में बतौर होस्ट नजर आए। शो में लोगों के दिलों की बातें करने वाले महेश ने इस बारे में बात की है।
कैमरे के पीछे रहकर ‘आशिकी’, ‘सड़क’ और ‘जख्म’ जैसी कई हिट फिल्मों का निर्देशन करने वाले फिल्मकार महेश भट्ट सोनी लिव पर हालिया प्रदर्शित वेब सीरीज ‘पहचान’ में मेजबान की भूमिका में
नजर आए।
नए सफर पर निकले महेश भट्ट
इसमें महेश विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय और असाधारण काम करने वाले 13 सिख व्यक्तियों से उनके सफर पर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। अपनी जिंदगी की पहचान को लेकर महेश कहते हैं, "लोगों के साथ जुड़कर उन्हें शिखर तक पहुंचाना, वो मेरी पहचान रहेगी। मैं जिसको साथ लेता हूं, मैं उससे यही कहता हूं कि मैं आपके साथ हूं, आप आगे बढ़ो। अगर कहीं गिरे तो खुद उठ जाओगे, मुझे इस बात का यकीन है। फिल्में तो अच्छी-बुरी बनती रहती थीं, उनका एक अलग दौर था। आजकल तो लोगों की जिंदगियां बनाने में लुत्फ आता है।"
लोगों की बदलती पसंद पर महेश भट्ट
इंटरनेट मीडिया के इस दौर में युवाओं की बदलती पसंद को लेकर महेश कहते हैं, "लोग कहते हैं कि आज के युवाओं में संवेदनशीलता नहीं है, मैं यह नहीं मानता। उनके अंदर बहुत गहराई है। हम ही उनसे बात करने की हिम्मत नहीं करते हैं। इंसान जब कोई कहानी दिल से बोलता है तो हर आयुवर्ग उसकी ओर आकर्षित होता है।"
पहली बार टॉक शो को कर रहे होस्ट
अपने टॉक शो को लेकर महेश कहते हैं, "आज पूरी दुनिया ने अपने आप को सिर्फ मनोरंजन तक ही व्यस्त रखा है, आस-पास जलती हुई लपटें और चिंगारियों को देखना ही नहीं चाहते हैं। ऐसी परिस्थितियों में यह शो बहुत जरूरी है। इसमें ऐसे लोगों की कहानी है, जिन्होंने मानवता की सेवा करते हुए बहुत कुछ हासिल किया है।"
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अभिनय चुनने पर बोले निर्देशक
कई निर्देशक अभिनय की दिशा भी चुन चुके हैं, ऐसे में निर्देशन के अलावा अभिनय के विकल्प को लेकर महेश कहते हैं, "मैं जो काम (फिल्म निर्देशन) करता था, वही बड़ी मुश्किल से कर पाता था। फिर अभिनय का विचार कहां से आता। मेजबानी करना तो अलग है, इसमें तो दिल खोलकर बातें करनी थीं।"