आशिकों के दिलों की धड़कन है 38 साल पुरानी कव्वाली, Nusrat Fateh Ali Khan के निधन के बाद हुई थी सुपरहिट
मशहूर सिंगर नुसरत फतेह अली खान ने यह कव्वाली 38 साल पहले गाई थी और अब तक कई बार इसके रीक्रिएट वर्जन आ चुके हैं। ...और पढ़ें
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बॉलीवुड में कव्वाली के बने रीक्रिएट वर्जन
HighLights
बॉलीवुड में कव्वाली के बने रीक्रिएट वर्जन
नुसरत फतेह अली खान ने दी थी आवाज
38 साल बाद भी आशिकों की पसंद
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान के मशहूर सिंगर नुसरत फतेह अली खान (Nushrat Fateh Ali Khan) की कव्वाली और गीतों के आज भी लोग उतने ही दीवाने हैं। इतना ही नहीं उनके पॉपुलर गानों को कई बार बॉलीवुड में रीक्रिएट भी किया जा चुका है।
17 मिनट की है ये कव्वाली
आज हम जिस कव्वाली की बात करने जा रहे हैं वो उन्होंने लगभग 4 दशक पहले गाई थी। लेकिन आज भी आशिकों की प्लेलिस्ट में ये शुमार है। यह ओरिजिनल कव्वाली लगभग 17 मिनट की है लेकिन बॉलीवुड में कई बार इसके शॉर्ट वर्जन में रीक्रिएट सॉन्ग बनाए जा चुके हैं।
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38 साल बाद भी आशिकों के दिलों में
इस कव्वाली के लिरिक्स, धुन, कंपोजिशन इतने शानदार हैं कि 38 साल भी यह आशिकों की प्लेलिस्ट का हिस्सा बनी हुई है। नुसरत फतेह अली खान (Ustad Nusrat Fateh Ali Khan) की आवाज में अमर इस कव्वाली के बोल हैं- मेरे रश्के कमर (Mere Rashke Qamar)।
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ओरिजिनली इसे 1988 में बनाया गया था और नुसरत ने ही इसे कंपोज किया था। वहीं इस उर्दू गजल-कव्वाली है तो फना बुलंद शहरी ने लिखा था।
क्या है इसका मतलब?
गाने की टाइटल लाइन मेरे रश्के कमर का मतलब है- चांद को भी ईर्ष्या हो', यानी महबूब इतना खूबसूरत है कि चांद को भी उससे जलन होती है।
सालों बाद बना कल्ट क्लासिक
यह गाना उस्ताद नुसरत फतेह अली खान के जीते-जी उनके सबसे बड़े मेनस्ट्रीम हिट्स में से एक नहीं था, लेकिन सालों बाद यह एक जबरदस्त कल्ट क्लासिक बन गया। दिलचस्प बात ये है कि यह गाना राहत फतेह अली खान की आवाज में सुपरहिट हुआ।
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राहत फतेह अली खान की आवाज में हुआ हिट
1988 में बना ये 2017 की बॉलीवुड फिल्म 'बादशाहो' के लिए टी-सीरीज ने जब इस गाने को उनके भतीजे राहत फतेह अली खान (Rahat Fateh Ali Khan) की आवाज में फिर से तैयार किया, तो यह गाना सुपरहिट हो गया। इसे अजय देवगन और इलियाना डिसूजा पर फिल्माया गया था।
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नुसरत फतेह अली खान
नुसरत फतेह अली खान एक पाकिस्तानी गायक, गीतकार, संगीतकार और संगीत निर्देशक थे। वे मुख्य रूप से कव्वाली से जुड़े थे, जो पाकिस्तान और भारत का एक सूफी भक्ति संगीत है।
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