ढोलक पर खूब बजता है Rekha का 'देसी' गीत, 35 सालों से देहाती शादियों की बना हुआ है शान
वेटरन एक्ट्रेस रेखा का एक कल्ट गीत ऐसा है, जो 35 सालों से देहाती शादियों में ढोलक पर खूब बजता था। ...और पढ़ें

रेखा का कल्ट गीत (फोटो क्रेडिट- स्क्रीन शॉट)
HighLights
1991 में रिलीज हुआ था ये गाना
लता मंगेशकर की आवाज में हुआ अमर
ढोलक पर खूब बजता है देहाती गीत
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। देहाती शादियों में अक्सर देखा जाता है कि घरों में हफ्ते भर पहले से ही ढोलक पर महिलाओं का संगीत कार्यक्रम शुरू हो जाता है। जहां वह तरह की बन्नी और विवाह से संबंधित गानों को गाती हैं। इस मामले में वेटरन एक्ट्रेस रेखा का एक पॉपुलर गीत भी शामिल है, जो पिछले 35 सालों से ढोलक की शान बना हुआ है और देसी शादियों में रौनक बढ़ाने का काम करता है।
इस गीत को सुरों की कोकिला रहीं लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज में अमर किया था। आइए जानते हैं कि रेखा के कौन से देसी गाने के बारे में इस लेख में चर्चा की जा रही है।
रेखा का देसी गाना
हिंदी सिनेमा जगत के कई सदाबहार गाने ऐसे हैं, जो गांव-देहात में शादी समारोह में खूब सुनने को मिलते हैं। इस मामले में अभिनेत्री रेखा की फिल्म फूल बने अंगारे का एक लोकप्रिय गाना भी शामिल होता है, जिसके बोल हैं- छोरी कब से हुई जवां... (Gori Kabse Hui Jawan)। इस गाने को लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज में गाकर हमेशा-हमेशा के लिए कालजयी बना दिया था।
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फिल्म फूल बने अंगारे में भी छोरी कब से हुई जवां... उस मौके पर फिल्माया गया है, जब एक शादी संगीत समारोह चलता है। इसी तर्ज पिछली 35 सालों से रेखा का ये गीत शादियों में महिला संगीत की पहली पसंद बना हुआ है और खूब सुनने को मिलता है। ढोलक पर इस गाने की ताल काफी शानदार लगती है। गांव-देहात की महिलाएं इस देसी गीत को ढोलक के माध्यम से और अधिक लोकप्रिय बनाती आ रही हैं।
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इस तरह से रेखा का छोरी कब से हुई जवां... देसी शादियों की शान बना हुआ है। सिर्फ ये गाना ही नहीं बल्कि कई ऐसे और अन्य बॉलीवुड सॉन्ग्स भी हैं, जो अक्सर ढोलक की थाप के जरिए शादी फंक्शन में सुनने को मिल जाते हैं। लेकिन फूल बने अंगारे का इस गाने के मायने अलग हैं और अपने आप में बेहद खास माना जाता है।
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इस संगीतकार ने किया अमर
फूल बने अंगारे छोरी कब से हुई जवां... सिर्फ लता मंगेशकर की गायिकी के लिए ही नहीं बल्कि संगीतकार बप्पी लहरी के अद्भुत संगीत के लिए भी याद किया जाता है। लहरी साहब से जिस तरह से इसको धुनों को तैयार किया, वह सुनने में शानदार अनुभव की प्राप्ति कराता है। साथ ही गीतकार अंजान की कलम द्वारा लिखे गए थे।