Thalapathy Vijay बने तमिलनाडु के नए 'जन नायकन'! रजनीकांत और कमल हासन क्यों नहीं कर पाए ऐसा?
तमिलनाडु में विजय (Vijay) की TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इस नतीजे ने उन्हें रजनीकांत और कमल हासन से अलग खड़ा कर दिया है। आखिर विजय ने ऐसा क्या ...और पढ़ें
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विजय ने तमिलनाडु में रचा इतिहास

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। जब 'थलपति' विजय ने तमिलनाडु चुनावों में अपनी दावेदारी पेश की, तो कई लोगों ने इसे राज्य की उस पुरानी परंपरा का ही एक और उदाहरण माना, जिसमें फिल्मी सितारे अपनी लोकप्रियता के दम पर राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश करते हैं। असल में, इस राज्य का इतिहास ही ऐसा रहा है कि यहां फिल्मी सितारों को नेता के तौर पर चुना जाता रहा है।
जहां MGR और जयललिता जैसी महान हस्तियों ने मुख्यमंत्री बनकर अपनी धाक जमाई, वहीं कमल हासन और रजनीकांत जैसे अन्य सितारे अपनी फैन फॉलोइंग को एक मजबूत राजनीतिक आधार में बदलने में नाकाम रहे। हालांकि, विजय ने तमिलनाडु को अपने इशारों पर नचा दिया, और उनकी पार्टी TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
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विजय ने क्या किया अलग?
तो, विजय के लिए क्या काम आया? उन्होंने कमल हासन (Kamal Haasan) और रजनीकांत (Rajinikanth) से अलग क्या किया- ये ऐसे सुपरस्टार हैं जिनकी फैन फॉलोइंग शायद उनसे ज्यादा है? ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से विजय का ब्लॉकबस्टर प्रदर्शन एक बहुत बड़ी मिसाल बन गया है।
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यह एक वजह लाई विजय को जीत के करीब!
विजय (Thalapathy Vijay) का प्रदर्शन सबसे अलग इसलिए नजर आया क्योंकि उनका एक साफ संदेश था। यह साफ करके कि वह एक्टिंग छोड़ देंगे और एक पूर्णकालिक राजनेता के तौर पर काम करेंगे, विजय ने यह दिखा दिया कि वह इस मामले में कितने गंभीर हैं; और राजनीति में उनका यह कदम महज एक 'कैमियो' बनकर नहीं रह जाएगा। उन्होंने अपने तीन दशक लंबे करियर को दांव पर लगा दिया, जिसमें उनकी 70 से ज्यादा फिल्में शामिल हैं।
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इसके अलावा, विजय की एंट्री रजनीकांत या हासन जैसी जबरदस्त नहीं थी। यहां तक कि कॉलीवुड (तमिल फिल्म इंडस्ट्री) में भी उनकी शुरुआत बहुत साधारण थी। उनकी यही सादगी मायने रखती थी। लोगों के साथ उनका एक सीधा जुड़ाव था।
पब्लिक से गहरा जुड़ाव
एक और फर्क यह है कि विजय ने 2024 में अपनी पार्टी लॉन्च करने से पहले हालात कैसे परखे। 2020 की शुरुआत में, विजय ने फिल्म रिलीज़ के दौरान पब्लिक में आकर अपने पॉलिटिकल विचार बताना शुरू कर दिया। ऑडियंस, यानी उनके फैन्स हमेशा उनकी बात सुनते थे। 2019 में, सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट की उनकी आलोचना 'पॉलिटिशियन' विजय के भेजे गए पहले सिग्नल में से एक थी।
Zen-G राजनेता के तौर पर पहचान
इसके अलावा, एक और वजह जिसने विजय को दूसरे सुपरस्टार्स के मुकाबले ज्यादा फायदा पहुंचाया, वह है तमिलनाडु की आबादी का ढांचा। जब रजनीकांत ने राजनीति में आने का ऐलान किया था, तब उनकी उम्र 70 साल से ज्यादा थी। हासन की उम्र 65 साल से ज्यादा थी।
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51 साल के विजय को एक युवा या 'Gen Z' नेता के तौर पर देखा जाता है। 40 साल से कम उम्र के 2 करोड़ से ज्यादा युवा वोटरों के बीच उनकी लोकप्रियता बहुत अहम साबित हुई। आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु में करीब 41.5% वोटर 18-39 साल के आयु वर्ग में आते हैं।
इस तरह, यह साफ जाहिर है कि विजय की पार्टी का सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने का राजनीतिक दांव-पेच काफी सोच-समझकर बनाया गया था। खैर, विजय ने साबित कर दिया कि बड़े पर्दे के जन नायकन होने के साथ-साथ वे राजनीति का 'जन नायक' बनना भी बेहतर तरीके से जानते हैं।