24 साल पहले आई इस हॉरर फिल्म में इस्तेमाल हुई थी 'असली चुड़ैल' की आवाज? चीख सुनकर थिएटर में कांप गए थे लोग
विक्रम भट्ट की 2002 में आई हॉरर फिल्म में एक 'असली चुड़ैल' की आवाज का इस्तेमाल किया गया था, जिसने ...और पढ़ें
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समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। आपने कई हॉरर फिल्में देखी होंगी। इनमें से कुछ ने आपको वाकई डराकर आपके रोंगटे खड़े कर दिए होंगे। जबकि कुछ इतनी अजीब लगीं होंगी कि डरने की जगह हंसी झूठ गई।
दरअसल रियल और फैंक्ट्स की जगह जब चीजें ओवर ड्रेमेटिक हो जाती है तो डर की जगह हंसी छूट जाती है। लेकिन आज हम आपको बॉलीवुड की एक ऐसी फिल्म के बारे में बताने वाले हैं जिसमें असली चुड़ैल की आवाज का इस्तेमाल किया गया था।
बिपाशा बसु ने निभाया था लीड रोल
क्यों सुनकर शॉक लगा ना? साल 2002 में आई विक्रम भट्ट् (Vikram Bhatt) की फिल्म राज (Raaz) के बारे में ऐसा ही कहा जाता है। ये मूवी जब थिएटर में रिलीज हुई तो लोगों के पसीने छूट गए। मूवी ने डीनो मोरिया और बिपाशा बसु (Bipasha Basu) ने लीड रोल निभाया था। इस फिल्म के गाने भी खूब पसंद किए जाते हैं और ये आज भी बहुत हिट हैं।
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ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसने धुंआधार कमाई की थी। इस फिल्म में हॉरर सीन के बीच में अचानक से एक चीख सुनाई देती है। हाल में जब ये मूवी लगी तो देखने वालों की रूह कांप गई। असली आत्माओं की आवाज ने लोगों को काफी ज्यादा डराया था।
कहां सुनी थी रियल आवाज?
अब आप सोच रहे होंगे की ये असली चुड़ैल आई कहां से। तो चलिए वो किस्सा भी आपको बताते हैं। दरअसल निर्देशक विक्रम भट्ट जब अपनी फिल्म सड़क की शूटिंग मुकेश मिल्स में कर रहे थे तो उन्होंने रात में वहां बहुत ही अजीब सी आवाजें सुनी थीं। मुकेश मिल्स वैसे ही भूतिया इलाका माना जाता था। सड़क की शूटिंग के दौरान ऐसे कई किस्से हुए थे और सेट पर अजीबो-गरीब घटनाएं होती रहती थी। वहीं जिस दिन लास्ट शूट था तो विक्रम भट्ट उस सीन को टॉप से शूट करना चाहते थे।
इसके लिए कैमरा मैन को ऊपर वाले कमरे में भेज दिया गया। लेकिन जब शूट स्टार्ट हुआ तो कैमरा मैन के हाथ पांव कांप गए। उसके पीछे से एक तेज चीखने की आवाज सुनाई दी, जब पीछे मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था।
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ये सारा वाक्या विक्रम भट्ट ने घोस्ट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था। दरअसल मुकेश मिल्स के चौकीदार के अनुसार 1982 में वहां पर भीषण आग लग गई थी। इसके बाद से रात के 2 से 3 बजे वहां अक्सर इस तरह की आवाजें सुनाई देती थीं। विक्रम के दिमाग में वो आवाज बैठ गई और वो इंतजार करने लगे कि इसका कहा इस्तेमाल करेंगे। बाद में उन्होंने राज में एक डबिंग आर्टिस्ट की मदद से दो आवाजों को क्लब करके वैसी ही आवाज रिक्रिएट की थी।
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