90 के दशक में एक ही दिन पर रिलीज हुईं 3 बड़ी फिल्में, बिल्कुल सेम थी तीनों की कहानी, एक को मिला था नेशनल अवॉर्ड
बिल्कुल सिमिलर कहानी वाली फिल्मों का एक ही दिन पर रिलीज होना अजीब लगता है। हालांकि, ऐसा हुआ है, क्योंकि 90 में जुलाई के महीने में तीन ऐसी फिल्में रिली ...और पढ़ें

एक साथ सिनेमाघरों में दर्शकों ने देखी सेम कहानी/ फोटो- Imdb

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में एक अरसे से एक जैसी कहानियों पर फिल्में बनती रही हैं। हालांकि, उनकी रिलीज का टाइमिंग अलग-अलग रहती है, जिससे दर्शकों के जहन में उनकी कहानी धुंधली हो जाए। हालांकि, 90 के दशक में तीन डायरेक्टर्स से एक बहुत बड़ी मिस्टेक हुई थी।
90 के दौर में तीन बड़ी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर टकराई थी, जिनकी कहानी बिल्कुल सेम टू सेम थी। कौन सी थीं वह तीन फिल्में और क्या थी उनकी कहानी, नीचे डिटेल में पढ़ें आर्टिकल:
एक साथ सिनेमाघरों में चल रही थीं तीन फिल्में
90 के दौर में जुलाई के महीने में सिनेमा में एक बहुत ही अजीब और मजेदार बात हुई थी। तीन अलग-अलग फिल्में एक दिन पर ही रिलीज हुई थी, जिसमें पहली फिल्म विनोद खन्ना (Vinod Khanna), मीनाक्षी शेषाद्री और संगीता बिजलानी की फिल्म 'जुर्म थी, जिसका निर्देशन महेश भट्ट ने किया था और कहानी सलीम खान ने लिखी थी।
इसके अलावा दूसरी फिल्म जो सिनेमाघरों में सेम दिन पर रिलीज हुई थी, वह अवतार भोगल की फिल्म 'हार जीत' थी, जिसमें कबीर बेदी-फराह नाज और माधवी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इन दोनों फिल्मों के अलावा जुलाई में उसी दिन पर एक मराठी फिल्म भी रिलीज हुई, जिसका टाइटल था, 'कड़त-नकड़त', जिसमें विक्रम गोखले, अशोक सराफ मुख्य भूमिका में थी। मराठी फिल्म 'कड़त-नकड़त' को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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क्या थी तीनों फिल्मों की कहानी?
विनोद खन्ना की जुर्म की कहानी एक हंसते-खेलते परिवार की है, जिसकी एक बीवी है और बच्चे हैं। वह आदमी मुश्किलों में फंसी एक दूसरी महिला की बचाने के लिए जाता है, लेकिन उसका उस औरत के साथ अफेयर हो जाता है। जब ये बात उसकी पत्नी को पता चलती है तो वह बच्चों के साथ घर छोड़ देती है और उनका हंसता-गाता परिवार तबाह हो जाता है। आखिर में वो फिर कैसे एक-साथ आ जाते हैं, यही फिल्म की कहानी है।
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यही सिमिलर कहानी कबीर बेदी की फिल्म 'हार जीत' की भी थी और यही सेम कहानी मराठी फिल्म 'कड़त-नकड़त' में भी दिखाई गई थी। जुर्म में जहां विनोद खन्ना एक पुलिस ऑफिसर बनते हैं, तो वहीं कबीर बेदी ने मूवी में एक आर्मी ऑफिसर का किरदार अदा किया था।

जुर्म और हार जीत की कहानी भी थी कॉपी
जुर्म और हार जीत मूवी जो एक जैसी कहानी लेकर बड़े पर्दे पर आईं, वह ओरिजिनल स्टोरी नहीं थी। यह दोनों ही मूवीज एक इंग्लिश फिल्म से इंस्पायर थीं, जिसका टाइटल था Some One To Watch Over Me। जबकि मराठी फिल्म 'कड़त-नकड़त' की कहानी शकुंतला गोकटे की नॉवेल 'शून्याची' व्यथा से ली गई थी।
तीन फिल्मों का एक ही समय पर सिनेमाघरों में आना एक अजीब इत्तेफाक था। हालांकि, एक ही सब्जेक्ट पर बनी फिल्मों का हिट होना एक बड़ी बात थी। जहां 1990 में आई मराठी फिल्म सुपर-डुपरहिट रही, तो वहीं एवरेज शुरुआत करने वाली विनोद खन्ना की 'जुर्म' भी अपनी पकड़ मजबूत बना पाई। हालांकि, हांर जीत का जादू फैंस के सिर चढ़कर नहीं बोला।