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    अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कश्मीरियों को आवास देने से की दूरी, धौज पंचायत ने एलान- पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी

    Updated: Fri, 22 May 2026 08:32 PM (IST)

    फरीदाबाद की धौज पंचायत ने अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कश्मीरियों को आवास देने से इनकार कर दिया है। पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा। ...और पढ़ें

    धौज पंचायत अलफलाह यूनिवर्सिटी व अस्पताल में आने वाले कश्मीरियों पर खास नजर रखेगी। फाइल फोटो

    धौज पंचायत अलफलाह यूनिवर्सिटी व अस्पताल में आने वाले कश्मीरियों पर खास नजर रखेगी। फाइल फोटो

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    अनिल बेताब, फरीदाबाद। सफेदपोश आतंक के बाद धौज पंचायत ने अल फलाह यूनिवर्सिटी वालों को आवास देने से बायकाॅट कर दिया है। इतना ही नहीं धौज पंचायत अलफलाह यूनिवर्सिटी व अस्पताल में आने वाले कश्मीरियों पर खास नजर रखेगी। यहां नौकरी पाने, मेडिकल काॅलेज में दाखिला लेने और अस्पताल में सेवा देने को आने वाले डाॅक्टरों की पुलिस से पूरी जानकारी ली जाएगी।

    कश्मीरियों पर रखेंगे खास नजर

    अलफलाह से जुड़े किसी भी कश्मीरी स्टाफ को किराये पर कमरा न देने का फैसला सर्वसम्मति से ले लिया है। नवंबर 2025 में सफेदपोश आतंकी माॅड्यूल के पर्दाफाश के बाद धौज के सरपंच ने ग्रामीणों संग पंचायत की थी।

    पंचायत ने इस बात पर जोर दिया कि गांव की पुरानी पहचान को बनाए रखने के लिए भरपूर कोशिश की जाएगी, जिससे कि गांव का भाईचारा बना रहे।

    गांव के सरपंच साजिद हुसैन और मौजिज लोगों ने आतंकी घटना के चलते यहां किराये के मकानों में रह रहे कश्मीर से जुड़े डाक्टरों और एमबीबएस कर रहे छात्रों को पहले ही बाहर कर दिया है। अब वह इस मामले में पूरी तरह सतर्क हो गए हैं और पुलिस के संपर्क में हैं।

    गांव की छवि को बचाने की मुहिम

    सरपंच साजिद हुसैन ने बताया कि गांव के भाईचारे की अलग पहचान है। विभिन्न संप्रदाय के लोग यहां मिल जुल कर रहते हैं। आतंकी घटना से गांव की छवि धूमिल हुई है। अब आगे ऐसी घटनाएं न हों। इसलिए अलफलाह से जुड़े किसी भी कश्मीरी को किराये पर मकान नहीं दिया जाएगा। ग्रामीण युनूस, साबिर, वाजिद और खुर्शीद ने कहा कि उन्हें अपनी गांव की पहचान और छवि को बचाकर चलना है।

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    ग्रामीणों ने खाली कराए कमरे

    इसलिए वह पुलिस के संपर्क में रहेंगे। बुजुर्ग मोहम्म्द इलियास ने बताया कि उनकी गांव में खेतीबाड़ी है। गांव में अलग-अलग बिरादरी के लोग प्रेम भाव से रहते हैं और यह भाईचारा आगे भी बना रहेगा। किसी भी को भी किराये पर मकान देने से पहले सौ बार सोचना पड़ेगा। 

    बता दें कि पहले गांव में मेडिकल काॅलेज व अस्पताल से जुड़े लगभग 70 डाॅक्टर व छात्र धौज के अलग-अलग मोहल्लों में किराये के मकान में रहते थे। ग्रामीणों ने सबसे मकान खाली करवा लिए हैं। अब वह कहीं और स्थानांतरित हो गए हैं।

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