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    प्रदूषण से जूझते फरीदाबाद को राहत, 5 वर्षों में AQI में 28% सुधार; औसत AQI 189 से घटकर 137 पर

    Updated: Thu, 26 Mar 2026 07:07 PM (IST)

    वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट के अनुसार, फरीदाबाद में पिछले पांच सालों में वायु प्रदूषण में 28% का सुधार हुआ है। औसत AQI 189 से घटकर 137 पर आ गया है। औद ...और पढ़ें

    2020 में जहां औसत एक्यूआई 189 प्रतिशत था, वहीं 2025 में घटकर यह 137 पर आ गया है।

    2020 में जहां औसत एक्यूआई 189 प्रतिशत था, वहीं 2025 में घटकर यह 137 पर आ गया है। 

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    जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। प्रदूषण की वजह से परेशान शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है। वर्ल्ड एयर क्वालिटी की ओर से जारी रिपोर्ट में प्रदूषण को लेकर फरीदाबाद में 28 प्रतिशत का सुधार दिखाया गया है। यह सुधार जिले में पिछले पांच सालों में हुआ है।

    रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में जहां औसत एक्यूआई 189 प्रतिशत था, वहीं 2025 में घटकर यह 137 पर आ गया। निगम का दावा है कि टूटी सड़कों की रिपेयरिंग करने और धूल को साफ करने के लिए हर जोन में स्वीपिंग मशीन चलाने की वजह से प्रदूषित हवा काफी कम हुई।

    रिपोर्ट के अनुसार 2021 और 2022 में फरीदाबाद की हवा सबसे ज्यादा खराब रही और औसत एक्यूआई 204 और 206 तक पहुंच गया था। इसके बाद 2023 में पहली बार सुधार दर्ज हुआ और 2024 में गिरावट शुरू हुई है। पिछले वर्ष 2025 में औसत एक्यूआई 137 दर्ज किया गया।

    पीएनजी को किया गया अनिवार्य

    प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों के अनुसार सुधार की सबसे बड़ी वजह औद्योगिक इकाइयों पर सख्ती रही। कई उद्योगों में कोयला और फर्नेस आयल की जगह पीएनजी का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही पुराने बायलर को बदला गया। प्रदूषण मानक तोड़ने वाली इकाइयों पर कार्रवाई की गई है।

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    इन कदमों का सीधा असर पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में कमी के रूप में सामने आया है। इसके साथ ही अब प्रदूषण के स्तर कम करने के लिए औद्योगिक इकाइयों में एयर क्वालिटी मानीटरिंग सिस्टम को भी लागू किया गया है। अब किसी भी औद्योगिक इकाई में प्रदूषण में इजाफा होता है तो उसके संचालक को तुरंत ही सूचित कर दिया जाएगा।

    निगम ने तेजी से किया काम

    निगम के अनुसार टूटी सड़कों की मरम्मत को लेकर तेजी से काम किया गया। हर जोन में एक स्वीपिंग मशीन को लगाया गया है। इसके साथ ही एंटी स्माग गन के साथ फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को भी छिड़काव में प्रयोग किया गया। जिसकी वजह से हवा में प्रदूषण का प्रभाव काफी तेजी से कम हुआ।

    अक्टूबर से जनवरी के बीच प्रदूषण ज्यादा

    अक्टूबर से जनवरी के बीच में सबसे अधिक वायु प्रदूषण होता है। इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से पांचवीं तक के स्कूलों को भी बंद कर दिया जाता है। जनरेटर और क्रेशर जोन पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी जाती है।

    "वर्ल्ड एयर क्वालिटी की रिपोर्ट राहत देने वाली बात है। लेकिन प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए निगम को अभी और अधिक काम करने की जरूरत है, क्योंकि अक्टूबर और नवंबर के बीच में तो कई बार धुंध की वजह से सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।"

    -शैलेश गर्ग, चेयरमैन, वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन आयोग।

    "निगम की ओर से पिछले पांच सालों में वायु प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। जिसका प्रभाव आने वाले समय में भी दिखाई देगा। सबसे अधिक काम टूटी सड़कों की मरम्मत को लेकर हुआ है। जिससे धूल उड़ने पर सबसे अधिक प्रदूषण होता था।"

    -नितिन कादियान, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम

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