पार्ट-3: फरीदाबाद में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 30% पद खाली, मिड-डे-मील वर्कर संभाल रहे कक्षाएं
फरीदाबाद के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की 30 प्रतिशत कमी और गैर-शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी से शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। कई स्कूलों में मिड-डे-मील ...और पढ़ें
HighLights
फरीदाबाद के सरकारी स्कूलों में 30% शिक्षकों के पद खाली।
शिक्षक गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त, मिड-डे-मील वर्कर पढ़ा रहे।
शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई और परिणाम प्रभावित।
निभा रजक, फरीदाबाद। सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। कई स्कूलों में शिक्षक गैर शैक्षणिक कार्यों में इतने व्यस्त हैं कि नियमित रूप से कक्षाएं लेने का समय तक नहीं मिल पा रहा। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई जगहों पर मिड-डे-मील वर्करों को ही बच्चों की निगरानी और कक्षाएं संभालने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। स्कूलों में शिक्षकों की ड्यूटी समय-समय पर विभिन्न प्रशासनिक और सरकारी कार्यों में लगा दी जाती है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
गुरुजी का काम कर रहे बच्चे
साल बदला स्कूलों की स्थिति नहीं के तहत 'दैनिक जागरण' की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिले के अधिकांश सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ सहित अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों में लगा दी गई है। कई स्कूल ऐसे भी देखने को मिले, जहां एक भी अध्यापक नहीं है। डेप्युटेशन पर आए अध्यापक विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। यहां तक तो फिर भी ठीक था, विभाग ने व्यवस्था बनवाई है, लेकिन कुछ स्कूल ऐसे भी देखने को मिले, जिनमें मिड डे मील वर्कर गुरुजी की जगह बच्चों संभालते हुए दिखाई दी।
मिड-डे-मील वर्कर संभाल रही कक्षाएं
चावला कालोनी स्थित राजकीय माॅडल संस्कृति प्राथमिक पाठशाला में विद्यार्थियों की संख्या 340 है। यहां अध्यापकों की संख्या 13 है, इनमें दस की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में लगी है। एक अध्यापक को डेपुटेशन पर रन्हेड़ा खेड़ा के सरकारी स्कूल में भेजे गए हैं।
मात्र दो अध्यापकों पर पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को संभालने की जिम्मेदारी है। ऐसे में कुछ कक्षाओं को संभलाने के लिए मिड डे मील वर्करों से सहायता ली जा रही है। सरकारी स्कूलों में फिलहाल बच्चों को संभालना बड़ी चुनौती है, पढ़ाई के बारे में तो बाद भी विचार होगा।
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215 विद्यार्थियों पर सिर्फ दो अध्यापक
बल्लभगढ़ स्थित राजकीय कन्या प्राथमिक पाठशाला में छात्राओं की संख्या 215 है। यहां पढ़ाने वाले 12 अध्यापकों में से आठ की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यों में लगी है। दो अध्यापक बीमारी के कारण छुट्टी पर हैं। ऐसे में सिर्फ दो अध्यापक छात्राओं पढ़ाने के लिए बचे हैं। हालांकि बीएलओ के काम के बाद अध्यापिकाएं स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए पहुंचती हैं, जिससे समय पर सिलेबस पूरा हो सके।
600 विद्यार्थी, एक भी नियमित अध्यापक नहीं
सेक्टर-तीन स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में एक भी नियमित अध्यापक नहीं है। डेपुटेशन पर आए 11 अध्यापकों में से तीन की ड्यूटी लगा दी गई है। ऐसे में आठ अध्यापकों पर छठी से बारहवीं के साइंस, कोमर्स और आर्ट्स संकाय के 600 से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है।
आप आरटीई के तहत 30 बच्चों पर 1 शिक्षक का अनुपात तो भूल जाएं। यहां तो एक अध्यापक पर 75 से अधिक विद्यार्थी हैं। अध्यापकों की कमी के कारण सिलेबस भी पूरा नहीं हो पा रहा है। दरअसल इस स्कूल की शुरूआत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में हुई थी, डेढ़ साल बाद भी स्कूल को नियमित शिक्षकों का इंतजार है।
सरकारी स्कूलों में 30 प्रतिशत शिक्षकों के पद रिक्त
फरीदाबाद और बल्लभगढ़ ब्लाॅक में राजकीय प्राथमिक, उच्च, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक 378 सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में अध्यापकों के 30 प्रतिशत पद रिक्त हैं। वर्तमान में केवल 3,600 अध्यापक ही पढ़ा रहे हैं।
शिक्षा विभाग स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखने तक ही सीमित है। इसके अतिरिक्त डेपुटेशन से एक स्कूल से दूसरे स्कूल में शिक्षकों को भेज दिया जाता है। शिक्षकों की कमी का असर बोर्ड परीक्षाओं पर भी पड़ता है। साल दर साल परीक्षाओं के परिणाम में भी गिरावट हो ही है।
पिछले पांच वर्षों का बोर्ड परीक्षा का परिणाम
| वर्ष | परिणाम |
| 2017 | 47.85 |
| 2018 | 57.38 |
| 2019 | 67.86 |
| 2020 | 81.61 |
| 2021 | कोरोना काल |
| 2022 | 84.59 |
| 2023 | 67.89 |
| 2024 | 93.38 |
| 2025 | 91.63 |
शिक्षक न होने से पढ़ाई हो रही प्रभावित
"सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, इसी बीच गैर शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी लग जाने से स्कूल मुखिया के लिए व्यवस्था बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है। पल्ला नंबर एक, रन्हेड़ा खेड़ा और आदर्श नगर जैसे स्कूलों में शत प्रतिशत शिक्षकों की बीएलओ ड्यूटी लगा दी गई है। शिक्षक नहीं होने की वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। यह शुरूआती शिक्षा ठीक से नहीं मिलेगी तो विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। अध्यापकों की ड्यूटी रोस्टर के अनुसार भी लगाई जा सकती है।"
-चतर सिंह, जिला प्रधान, हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन।
"सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, लेकिन सरप्लस शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजकर व्यवस्था बनाई जा रही है। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो सके। शिक्षा विभाग की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है कि विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।यह विभाग की प्राथमिकता है। साथ ही उच्च अधिकारियों को शिक्षकों की कमी के संबंध में पत्र के माध्यम से अवगत कराया जाता है। उम्मीद है कि शिक्षकों की कमी पूरी हो सकेगी।"
-डाॅ. मनोज मित्तल, उप जिला शिक्षा अधिकारी।
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