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    फरीदाबाद में जीआरपी का आदेश, थाने के क्षेत्र के चक्कर में नहीं भटकेंगे पीड़ित; तुरंत दर्ज होगी जीरो FIR

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 11:47 AM (IST)

    संजय कुमार के मोबाइल चोरी मामले के बाद फरीदाबाद जीआरपी ने सीमा विवाद खत्म कर सभी शिकायतों पर तुरंत जीरो एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह कदम 2013 ...और पढ़ें

    जीआरपी को तुरंज जीरो एफआईआर करने का आदेश। फोटो:सांकेतिक

    जीआरपी को तुरंज जीरो एफआईआर करने का आदेश। फोटो:सांकेतिक

    HighLights

    1. फरीदाबाद जीआरपी ने जीरो एफआईआर तुरंत दर्ज करने का आदेश दिया

    2. संजय कुमार के मोबाइल चोरी मामले से डीएसपी ने सबक लिया

    3. जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिशों पर आधारित है यह कदम

    सुधीर बैसला, फरीदाबाद। मथुरा से दिल्ली आने के लिए आगरा पेसेंजर ट्रेन में सवार हुए संजय कुमार का 28 अप्रैल को मोबाइल फोन यात्रा के दौरान चोरी हो गया था। उसे फोन चोरी का पता बाटा रेलवे स्टेशन पर आने के बाद पता चला।

    अगला रेलवे स्टेशन ओल्ड फरीदाबाद था, तो वह वहीं उतर गया। पहले आरपीएफ थाने गया। वहां से उसे जीआरपी थाने भेज दिया। जीआरपी थाने में पुलिसकर्मियों ने सवालों की बौछार शुरू कर दी।

    कहां से बैठे, कहां चोरी हुआ, जहां से बैठे, उसी थाने में एफआईआर दर्ज कराओ। ऐन वक्त जीआरपी के डीएसपी राजेश चेची थाने पहुंच गए। उन्होंने संजय से पूछा, किसलिए आए हो, तब मामला उनके संज्ञान में आया।

    डीएसपी ने तुरंत जीरो एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। संजय की तरह अनेकों लोग सफर के दौरान चोरी का शिकार होकर सीमा विवाद में उलझकर थाने-चौकियों के चक्कर काटते रहते हैं।

    संजय के मामले को सबक के रूप में लेते हुए डीएसपी ने न केवल थाना प्रभारी को लताड़ा बल्कि आदेश दिए कि कोई भी किसी प्रकार के अपराध की सूचना लेकर थाने आएं तो तुरंत एफआइआर दर्ज की जाएं।

    पीड़ित अपराधस्थल नहीं बता रहा तो जीरो एफआईआर दर्ज करने में देरी नहीं होनी चाहिए। अब तक जीआरपी फरीदाबाद थाने में छह प्राथमिकी बिना संख्या के दर्ज हो चुकी है। हालांकि इन मामलों में जांच विचाराधीन है।

    2013 में जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिश से हुआ था सुधार

    वर्ष 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार मामले के बाद देश में महिला सुरक्षा और कानूनी सुधारों के लिए न्यायमूर्ति वर्मा समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने सिफारिश की कि क्षेत्राधिकार विवाद के कारण पुलिस को शिकायत दर्ज करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    इसी सिफारिश के आधार पर आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 के जरिए इसे पेश किया गया और कहा गया कि कहीं बिना नंबर यानी जीरो एफआइआर दर्ज करके उसे संबंधित वारदात क्षेत्र की पुलिस के पास भेजा जाएगा।

    इसके बाद नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 173 के तहत जीरो एफआईआर के प्रावधान को पूरी तरह से वैधानिक और लिखित रूप से अनिवार्य बना दिया गया।

    अब कोई भी व्यक्ति मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रानिक माध्यम (ई-एफआइआर) से देश के किसी भी कोने से शिकायत दर्ज करा सकता है।

    जीरो एफआईआर का कानून 2013 से है। केवल हत्या, बलात्कार जैसे मामलों में पुलिस जीरो एफआइआर दर्ज कर रही है। मोबाइल चोरी व अन्य सामान चाेरी के मामलों में घटनास्थल का सही ब्योरा न मिलने के बाद जीआरपी और आरपीएफ दोनों अपना पल्ला झाड़ लेती थी। सख्ती से कहा गया है कि प्रत्येक शिकायत जो थाने तक आएं, उसे फौरी दर्ज किया जाए। यदि एफआइआर दर्ज न हो तो कोई भी पीड़ित उनके कार्यालय में आकर शिकायत कर सकता है।

    - राजेश चेची, डीएसपी जीआरपी

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