'अयोध्या-मथुरा की तर्ज पर दमकेगा कुरुक्षेत्र', मंत्री अरविंद शर्मा ने बताया हरियाणा के पर्यटन का मास्टरप्लान
हरियाणा के पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने 'जागरण विमर्श' में राज्य के पर्यटन विकास का मास्टरप्लान बताया। उन्होंने कहा, कुरुक्षेत्र को अयोध्या-मथुरा ...और पढ़ें

'दैनिक जागरण विमर्श' कार्यक्रम में गुरुवार को हरियाणा के पर्यटन एवं सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने रखे विचार। फोटो : संजय
HighLights
कुरुक्षेत्र का अयोध्या-मथुरा की तर्ज पर होगा विकास।
राखीगढ़ी सभ्यता को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास।
हरियाणा में धार्मिक पर्यटन स्थलों का समग्र विकास।
जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। 'दैनिक जागरण विमर्श' कार्यक्रम में गुरुवार को हरियाणा के पर्यटन एवं सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य पर्यटन क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। सरकार सिंधु-सरस्वती सभ्यता और धार्मिक पर्यटन दोनों को बढ़ावा देकर हरियाणा को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने का प्रयास कर रही है। इस बीच उन्होंने कहा कि अयोध्या-मथुरा की तर्ज पर कुरुक्षेत्र का पर्यटन विकास करेंगे।
सिंधु-सरस्वती सभ्यता को वैश्विक पहचान
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि राखीगढ़ी विश्व की सबसे बड़ी और प्राचीन सभ्यताओं में से एक है, जिसका इतिहास करीब सात हजार वर्ष पुराना है। उन्होंने बताया कि सरस्वती नदी के पुनर्जीवन के लिए आदि बद्री से पिहोवा तक व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। राखीगढ़ी में हुई पुरातात्विक खुदाई से जल निकासी, स्वच्छता, स्नान व्यवस्था और पहिए के प्रारंभिक विकास जैसे प्रमाण मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस प्राचीन विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का काम चल रहा है।
अयोध्या-मथुरा की तर्ज पर करेंगे धार्मिक पर्यटन
एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि अयोध्या, मथुरा और वृंदावन की तरह हरियाणा के धार्मिक स्थलों को भी उच्च स्तर पर विकसित किया जाएगा। कुरुक्षेत्र, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था, सनातन संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। यहां अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव हर वर्ष 15-20 दिनों तक आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

48 कोस कुरुक्षेत्र का समग्र विकास
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कुरुक्षेत्र के 48 कोस क्षेत्र के समग्र विकास पर काम चल रहा है। इसके अलावा यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में बाबा बंदा सिंह बहादुर के स्मृति स्थल विकसित किए जा रहे हैं। गुरु रविदास जी का स्मृति स्थल एवं संग्रहालय भी तैयार किया जा रहा है। इन सभी परियोजनाओं के माध्यम से हरियाणा के धार्मिक पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का लक्ष्य है।
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'केवल पहाड़ी राज्यों तक सीमित नहीं'
कार्यक्रम के दौरान मंत्री से पूछा गया कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों के पर्यटन स्थलों की पहचान देशभर में है। हरियाणा के पहाड़ी और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को भी उसी स्तर पर विकसित करने के लिए सरकार की क्या योजना है? इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'पर्यटन केवल किसी एक चीज़ पर निर्भर नहीं करता। इसमें जलवायु, प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक विरासत और पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाएं जैसी कई बातें महत्वपूर्ण होती हैं। पहाड़ी राज्यों की अपनी अलग भौगोलिक विशेषताएं हैं, लेकिन हरियाणा के पास भी कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जिनमें अपार संभावनाएं हैं।'

गिनाए ऐतिहासिक स्थल
उन्होंने कहा कि मोरनी हिल हरियाणा का प्रमुख हिल स्टेशन है। इसके अलावा पिंजौर स्थित यादविंद्र गार्डन (पिंजौर गार्डन) एक ऐतिहासिक और हेरिटेज स्थल है, जहां सप्ताहांत पर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। यह अब वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी लोकप्रिय हो रहा है। इसी प्रकार महेंद्रगढ़ जिले का ढोसी हिल भी एक महत्वपूर्ण धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल है। इसके विकास के लिए सरकार पर्याप्त धनराशि खर्च कर रही है और इसे जल्द ही बेहतर सुविधाओं के साथ पर्यटकों के लिए विकसित किया जाएगा। इसके अलावा टिक्कर ताल जैसे पर्यटन स्थलों पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
दावा- चरणबद्ध तरीके से हो रहा विकास
जवाब के अंत में उन्होंने कहा कि पर्यटन का सबसे बड़ा माध्यम पर्यटकों का अनुभव और प्रचार-प्रसार होता है। जब कोई पर्यटक किसी स्थान पर जाकर अच्छा अनुभव लेकर लौटता है, तो वह दूसरों को भी वहां जाने के लिए प्रेरित करता है। इसी सोच के साथ सरकार राज्य के प्रमुख प्राकृतिक और पर्यटन स्थलों का चरणबद्ध तरीके से विकास कर रही है, ताकि हरियाणा पर्यटन के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सके।
'ऐतिहासिक स्थलों का कर रहे संरक्षण'
वहीं, जब उनसे पूछा गया कि प्रदेश के कई ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों की हालत लगातार खराब हो रही है। सूरजकुंड के पास बड़खल झील के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन उसकी स्थिति संतोषजनक नहीं है। वहीं नारनौल का जलमहल और अन्य ऐतिहासिक धरोहरें भी जर्जर होती जा रही हैं। सरकार इन स्थलों के संरक्षण और प्रभावी विकास के लिए क्या कदम उठा रही है?
'जलमहल का जीर्णोद्धार किया गया'
इसका जवाब देते हुए अरविंद शर्मा ने कहा, 'बड़खल झील के विकास के लिए विस्तृत योजना (डीपीआर) तैयार की गई है। आने वाले समय में वहां व्यापक स्तर पर विकास कार्य देखने को मिलेंगे। जहां तक जलमहल का सवाल है, वहां संरक्षण और जीर्णोद्धार का कार्य किया गया है। कुछ समय तक वहां पानी भी रहा था। नवीनीकरण का कार्य गुणवत्ता के साथ कराया गया है और भविष्य में भी उसके रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।'
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 102 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से राज्य के पुराने स्मारकों और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और जीर्णोद्धार कराया है। नूंह स्थित चोर गुम्बद जैसे ऐतिहासिक स्मारक पर आकर्षक लाइटिंग सहित अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे वहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है।

'ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करेंगे'
मंत्री ने दावा किया कि ढोसी हिल सहित अन्य पर्यटन परियोजनाओं के लिए भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है, ताकि उनका योजनाबद्ध तरीके से विकास किया जा सके। पहले की सरकारों ने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया, लेकिन पिछले दस-ग्यारह वर्षों में पहले मनोहर लाल खट्टर और अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में इन स्मारकों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और विकास के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित कर उसे पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करना है।
जेलों की सुरक्षा और क्षमता विस्तार
प्रदेश की जेलों में बढ़ती कैदियों की संख्या पर एक सवाल के जवाब में डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को लगातार आधुनिक बनाया जा रहा है। हाईटेक सीसीटीवी निगरानी और अन्य सुरक्षा प्रणालियां लगाई गई हैं। आने वाले समय में रेवाड़ी और चरखी दादरी में नई जेलों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे मौजूदा जेलों पर दबाव कम होगा। सरकार बंदियों के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दे रही है। जेलों में कौशल विकास और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि रिहाई के बाद वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

सीएम सैनी ने भी बताए महा-प्लान
बता दें कि 'जागरण विमर्श' कार्यक्रम गुरुग्राम के सेक्टर-26 स्थित ली मेरेडियन होटल में आयोजित किया जा रहा है। इसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित कई मंत्रियों, विपक्षी नेताओं और एनसीआर के गणमान्य नागरिकों की भागीदारी रही। पर्यटन मंत्री से पूर्व हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के समोचित विकास की योजना बताते हुए फरीदाबाद और हिसार एयरपोर्ट के विकास की बात उजागर की थी।