निर्जला एकादशी: 25 जून को व्रत रखने पर मिलेगा 26 एकादशी का महाफल; क्या आपको पता है इसकी कथा?
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को 25 जून को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाएगा, जिसे सभी एकादशियों का फल देने वाला माना गया है। इस दिन निर्जल रहकर व्रत करने की शुरुआ ...और पढ़ें

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निर्जला एकादशी 25 जून को, सभी एकादशियों का फल।
भीमसेन की कथा से जुड़ा है इस व्रत का महत्व।
जागरण संवाददाता, महेंद्रगढ़। हर साल ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला व्रत रखा जाता है। वैसे तो सभी एकादशियों का फल विशेष फलदाई होते हैं। परंतु निर्जला एकादशी का बहुत ही अधिक महत्व बताया गया है।
माना जाता है कि इस एकादशी के व्रत को करने से सभी एकादशी का व्रत करने समान फल की की प्राप्ति होती है। यानि साल 24 में एकादशी होती है इस साल 26 एकादशी है अधिकमास होने के कारण ,बताते है इन सभी एकादशियों का फल निर्जला एकादशी के व्रत से ही मिल जाता है।
निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा
इस एकादशी पर निर्जल व्रत करने का विधान है यानि कुछ खाया-पिया नहीं जाता है भूखे प्यासे रहकर बिना अन्न पानी के इस व्रत को किया जाता है। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को स्नान कर श्रीहरी विष्णु भगवान की पूजा करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण व्रत का पारण किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि 25 जून गुरुवार को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा।
निर्जला एकादशी की क्या है कथा?
इस को एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार भीम को छोड़कर सभी पांडव सभी एकादशियों पर व्रत करते थे। भीमसेन के लिए भोजन के बिना रह पाना मुश्किल था। इस कारण वो एकादशी का व्रत नहीं कर पाते थे। एक दिन भीम ने महर्षि वेदव्यास से पूछा कि कोई ऐसा उपाय बताइए, जिससे मुझे भी एकादशी व्रत का पुण्य मिल सके, मेरे लिए भूखे रहकर व्रत करना बहुत मुश्किल है।
तब ऋषि व्यास ने भीम को सलाह दी यदि वे सभी एकादशियों का पुण्य साथ प्राप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को बिना बिना जल-अन्न के उपवास करना चाहिए। ऋषि व्यास कि सलाह अनुसार भीम ने भूखे-प्यासे रहकर इस व्रत को किया था। भीम के व्रत से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया था इस से वजह से इस एकादशी का नाम 'भीमसेनी' पड़ा। जो भी भक्त श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत को करेगा वो सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त कर अंत में बैकुंठ लोक में जाएगा।
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भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि इस दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन दान करना पुण्यदायक होता है और ऐसा करने पर अक्षय फल की प्राप्ति होती है। जल से भरे मटके, बार, पैसा, मीठा पानी, फल आदि का दान करना श्रेष्ठ होता है। इस दिन विष्णु भगवान के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप व विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र के पाठ करने से ऐश्वर्य, परलोक, सांसारिक सुख व विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
व्रत से होती है मोक्ष की प्राप्ति
भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि निर्जला एकादशी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। इसलिए इस दिन निर्जल वत, दान-पुण्य करने से प्राणी श्री हरि का सानिध्य प्राप्त कर जीवन-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति करता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस बत को निर्जल करने मात्र से ही समस्त पापों का नाश हो जाता है। इस व्रत के प्रभाव से व्रती को चारों पुरुषार्थ यानी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।