नूंह मेडिकल कॉलेज में बड़ी लापरवाही! 4 साल के बच्चे के जिस पैर में था फोड़ा, उसकी जगह दूसरे पैर का कर दिया ऑपरेशन
नूंह मेडिकल कॉलेज में सरकारी डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई, जहाँ चार वर्षीय बच्चे के गलत पैर का ऑपरेशन कर दिया गया। पहले गलत पैर की सर्जरी हुई, फिर सु ...और पढ़ें

गलत सर्जरी का शिकार चार साल का मासूम शाद। स्वजन
HighLights
नूंह मेडिकल कॉलेज में बच्चे के गलत पैर का ऑपरेशन हुआ।
सर्जन ने पहले गलत पैर की सर्जरी की, फिर सुधारा।
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की लापरवाही के मामले बढ़ रहे हैं।
जागरण संवाददाता, नूंह। जिले में सरकारी चिकित्सकों द्वारा इलाज के दौरान लापरवाही के मामले थमने के नाम नहीं ले रहें हैं। पहले जिला अस्पताल मांडीखेडा में प्रसव के दौरान बच्ची की उंगली आपरेशन के दौरान लापरवाही से काट दी गई, इसकेे अलावा तावड़ू सीएचसी में गर्भपात की बजाए आपरेशन के नलबंदी कर दी गई। अब नया मामला मेडिकल कालेज में चार वर्षीय बच्चे के पैर में इंफ्केशन के दौरान गलत आपरेशन का आया है।
जहां पैर में फोड़े की समस्या से परेशान चार वर्षीय मासूम की सर्जरी करते समय डाक्टर ने जिस पैर की सर्जरी होनी थी, उसकी बजाय दूसरे पैर की सर्जरी कर दी। मामले का खुलासा तब हुआ जब सर्जरी के बाद बच्चे को आपरेशन थिएटर से बाहर लाया गया और स्वजन ने देखा कि बाएं पैर की बजाए दाएं पैर की सर्जरी की गई है। इसके बाद बच्चे को दोबारा आपरेशन थिएटर में ले जाकर सीधे पैर की सर्जरी की गई।
चिकित्सकों पर उठे सवालिया निशान
बच्चे के पिता के मुताबिक सर्जन ने अपनी गलती मानते हुए दोबारा दूसरे पैर की भी सर्जरी की। कहने को तो बच्चे के स्वजन ने मामले को लेकर मेडिकल प्रशासन को लिखित में शिकायत दी है, प्रशासन ने जांच के बाद उचित कार्रवाई के लिए कहा है। लेकिन बार-बार चिकित्सकों की तरफ से आ रही लापरवाही को लेकर सवालिया निशान उठने लगे हैं।
आरिफ निवासी मेवली ने बताया कि 15 दिन पहले उनके चार वर्षीय मासूम शाद के उल्टे में एक फोड़ा हो गया। जिसमें दिन प्रतिदिन सूजन बढ़ती गई और मासूम का दर्द भी बढ़ने लगा। उसके बाद पिता ने डाक्टर की सलाह पर नूंह में एक प्राइवेट गोयल अल्ट्रासाउंड पर बच्चे के पैर का अल्ट्रासाउंड कराया, जहां पर जांच रिपोर्ट में उल्टे पैर की बजाए सीधे पैर को दर्शा दिया गया।
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उसके बाद पिता बच्चे को लेकर बीते 20 जुलाई को नूंह के मेडिकल कालेज के अस्पताल में लेकर पहुंचा। जहां पर ओपीडी कार्ड में पिता ने उल्टे पैर की सर्जरी लिखवाया। पिता का दावा है कि 23 जुलाई को आपरेशन वाले दिन आर्थो के सर्जन डा. पवन कुमार से जब वह मिले तो उन्होंने उन्हें बता दिया कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में उल्टे पैर की बजाए सीधे पैर को दर्शाया गया है जो कि गलत है सर्जरी उल्टे पैर की ही होनी है।
बताते हुए भी बरती लापरवाही
लेकिन उस समय तो डा. ने बोल दिया कि कोई बात नहीं देख लेंगे लेकिन बताते हुए भी लापरवाही बरती गई। इससे पूर्व में सर्जरी की एक घटना मांडीखेड़ा अस्पताल में हुई थी, जहां प्रसव के दौरान शिशु का हाथ काट दिया गया वहीं एक घटना तावडू सीएचसी से सामने आई थी जिसमें महिला के गर्भपात की बजाए नलबंदी की गई।
डाक्टरों द्वारा इलाज के दौरान हो रही ऐसी घटनाओं से सरकारी अस्पतालों में लोग इलाज कराने से भी डरने लगे। खास बात यह है कि ऐसे मामलों के जांच के नाम पर कुछ नहीं होता, तथा मामले को यूं रफा दफा करा दिया जाता है। दोनों मामलों में ऐसा हो चुका है।
मामले को लेकर लिखित में शिकायत मिल गई थी। जांच के लिए चार डाक्टरों की कमेटी गठित कर दी गई है। निगरानी में जांच कराई जा रही है। जांच पूरे होने पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. मुकेश कुमार, डायरेक्टर नलहड़ मेडिकल कालेज नूंह