Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    रेवाड़ी के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 800 पद खाली, बिना मुखिया के चल रहे कई विद्यालय

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 02:49 PM (IST)

    रेवाड़ी के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जहां 800 और शिक्षकों की तत्काल आवश्यकता है। ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    प्रतीकात्मक तस्वीर


    HighLights

    1. रेवाड़ी के सरकारी स्कूलों में दशकों से शिक्षकों की कमी

    2. टीजीटी, पीजीटी के कुल 3100 शिक्षकों की आवश्यकता

    3. रेवाड़ी के सरकारी स्कूलों में 100 से अधिक मुखिया के पद भी रिक्त

    जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सरकार की तरफ से हर साल ट्रांसफर ड्राइव के माध्यम से रिक्त पदों पर व्यवस्था करने के सपने दिखाए जाते हैं, लेकिन दावे हकीकत से कोसों दूर हैं।

    विद्यार्थी हर साल शिक्षकों के आने का इंतजार करते हैं, लेकिन बिना शिक्षक के मायूस होते हैं और बैठकर चले जाते हैं। यह सिलसिला अनवरत चल रहा है। वहीं, शिक्षिका द्वारा मैटरनिटी लीव लेने पर व शिक्षक के सेवानिवृत्ति होने जाने पर भी विद्यालयों में शिक्षक की नियुक्ति नहीं होती है, जिसके कारण सालभर विद्यार्थी परेशान रहते हैं। जिला स्तर पर शिक्षकों को डेपुटेशन पर भेजने की व्यवस्था नहीं होने के कारण भी विद्यार्थियों को खासी परेशानी होती है।

    जिले के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से अभी टीजीटी व पीजीटी के 800 के करीब शिक्षकों की जरूरत है। जबकि वर्तमान में 2280 के करीब टीजीटी व पीजीटी शिक्षक विद्यालयों में कार्यरत हैं।

    वहीं 100 से अधिक विद्यालय तो ऐसे हैं जहां पर मुखिया के पद रिक्त चल रहे हैं। जिनमें वरिष्ठ शिक्षकों को चार्ज दिया हुआ है। यह आकड़े गत वर्ष दिसंबर माह में किए गए रेशनेलाइजेशन प्रक्रिया के दौरान सामने आए थे। इससे सहज ही सरकारी शिक्षा व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    जिले में है 3100 टीजीटी व पीजीटी की जरूरत

    जानकारी के अनुसार जिले में टीजीटी के 1083 तथा पीजीटी के 1200 के करीब शिक्षक कार्यरत हैं। रेशनेलाइजेशन के हिसाब से जिले में 3100 टीजीटी व पीजीटी की जरूरत है। साथ ही विद्यालयों में हेडमास्टर, एलीमेंट्री हेडमास्टर और प्राचार्य के भी 100 से अधिक पद रिक्त चल रहे हैं। शिक्षकों की कमी के कारण हर साल विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

    खबरें और भी

    अगर समय रहते यहां पर शिक्षकों की कमी को दूर नहीं किया गया तो आने वाले समय में सरकारी विद्यालयों की हालत और खराब होने वाली है। हालांकि सरकारी भर्ती के दौरान कुछ नए शिक्षक मिलते हैं भी उसका खास फर्क नहीं पड़ता है। क्योंकि हर साल 10 से 20 शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

    यह भी पढ़ें- रेवाड़ी SDM सुरेश कुमार का तबादला, धरना समाप्त करने को लेकर वकीलों की आज होगी बैठक

    यह भी पढ़ें-  रेवाड़ी वालों के लिए जरूरी खबर, अस्थायी रूप से शिफ्ट होगा सिविल सर्जन कार्यालय