4.20 करोड़ की जमीन का सौदा बना जाल, 23 लाख गंवाने के बाद हुआ ठगी का अहसास; फर्जी पेपर्स से रची साजिश
गोहाना में जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर अजमेर सिंह से 23 लाख रुपये की ठगी हुई है। फर्जी दस्तावेज तैयार कर पांच लोगों ने इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। पुलिस ...और पढ़ें

पुलिस की प्रारंभिक जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार कर सुनियोजित तरीके से ठगी करने की बात सामने आई है।
HighLights
जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर 23 लाख रुपये की ठगी।
फर्जी दस्तावेज तैयार कर सुनियोजित तरीके से की गई धोखाधड़ी।
पांच लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया।
जागरण संवाददाता, गोहाना (सोनीपत)। जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर 23 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। थाना शहर गोहाना में महम के अजमेर सिंह की शिकायत पर पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में फर्जी दस्तावेज तैयार कर सुनियोजित तरीके से ठगी करने की बात सामने आई है।
खुद को प्राॅपर्टी डीलर बताया
रोहतक में महम के गांव कृष्णगढ़ के अजमेर सिंह ने बताया कि वह खेती के साथ प्रापर्टी खरीदने-बेचने का काम भी करता है। 27 अप्रैल को उनके पास एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने अपना नाम प्रदीप बताते हुए खुद को प्राॅपर्टी डीलर बताया। कुछ दिन बाद हरेंद्र नाम के व्यक्ति ने फोन कर दिल्ली की एक केमिकल कंपनी के लिए महम और सोनीपत क्षेत्र में जमीन खरीदने की बात कही।
मुनाफा तीन हिस्सों में बांटा जाएगा
इसके बाद 21 मई को बहालगढ़ चौक के पास उनकी मुलाकात कराई गई, जहां आरोपितों ने एनएच-334बी के पास गांव लिवान क्षेत्र में दो एकड़ जमीन दिखाई और व्हाट्सएप पर उसकी जमाबंदी भेजी। 27 मई को गोहाना-सोनीपत रोड स्थित एक किराये की दुकान में दोबारा बैठक हुई। वहां एक व्यक्ति को जमीन मालिक जसवंत बताकर 4.20 करोड़ रुपये में सौदा तय कराया गया। इसके बाद आरोपितों ने कंपनी को 4.90 करोड़ रुपये में जमीन बेचकर 1.40 करोड़ रुपये का मुनाफा होने का लालच दिया और कहा कि मुनाफा तीन हिस्सों में बांटा जाएगा।
ढाबा की पार्किंग में 6.50 लाख रुपये और दे दिए
इसी बहाने उसे बयाने के लिए नकद राशि देने के लिए तैयार किया गया। अजमेर के अनुसार उसने परिचितों से पैसे जुटाकर 27 मई को नई गोहाना में 16.50 लाख रुपये नकद दे दिए। अगले दिन आरोपितों ने कंपनी के सीए द्वारा भुगतान जारी करने के नाम पर और पैसे मांगे। इस पर उसने 28 मई को मुरथल में एक ढाबा की पार्किंग में 6.50 लाख रुपये और दे दिए। बाद में जब आरोपितों ने दो लाख रुपये और मांगे तो उसे संदेह हुआ। मौके पर जाकर जांच करने पर पता चला कि जमीन न तो बिकाऊ थी और न ही जसवंत नाम का कोई मालिक मिला।
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धोखाधड़ी को अंजाम देने की बात स्वीकारी
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपितों ने फर्जी जमाबंदी और अन्य दस्तावेज तैयार कर ठगी की योजना बनाई थी। जांच के दौरान जागसी के प्रदीप से पूछताछ की गई। पुलिस पूछताछ में अपने अन्य साथियों लोकेश तोमर, बंटी और प्रदीप लांबा के साथ मिलकर धोखाधड़ी को अंजाम देने की बात स्वीकार की। वारदात के दौरान रकम के लेन-देन और आने-जाने के लिए एक्सयूवी-300 गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था। गांव जागसी के प्रदीप के साथ गाजियाबाद के लोकेश तोमर, हापुड़ के बंटी और दिल्ली के हरेंद्र व प्रदीप के विरुद्ध केस दर्ज किया गया।